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नेमिनगर जैन कॉलोनी में नौ दिवसीय सिद्धचक्र मंडल विधान का सातवां दिन : पंच परमेष्ठी का कभी तिरस्कार न करें – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर


अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर महाराज और क्षुल्लक अनुश्रमण सागर महाराज के सानिध्य में नेमिनगर जैन कॉलोनी में नौ दिवसीय सिद्धचक्र मंडल विधान के सातवें दिन सिद्धों की आराधना करते हुए 512 अर्घ्य मंडल पर समर्पित किए गए। इस अवसर पर मुनि श्री के प्रवचन भी हुए। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…


इंदौर। अंतर्मुखी मुनिश्री पूज्य सागर महाराज और क्षुल्लक अनुश्रमण सागर महाराज के सानिध्य में नेमिनगर जैन कॉलोनी में नौ दिवसीय सिद्धचक्रमंडल विधान का आयोजन किया जा रहा है। इस अवसर पर सातवें दिन शनिवार को धर्म सभा को संबोधित करते हुए अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज ने कहा कि पंच परमेष्ठी का कभी भी तिरस्कार नहीं करना।

यह पंच परमेष्ठी हमारे पापों का नाश करने वाले हैं। जिन-जिन ने इनका तिरस्कार किया है, वे सब नरक, तिर्यंच जैसी गति को प्राप्त हुए हैं। इनका चिंतन करने हमारी आत्मा निर्मल होती है।

णमोकार मंत्र में पंच परमेष्ठी को नमस्कार किया गया। इस णमोकर मंत्र के अनादि निधन है, इस मंत्र से 84 लाख मंत्रों का जन्म हुआ है। जो निरंतर इसका श्रद्धा के साथ जाप करता है, वह सिद्ध पद को प्राप्त करता है।

512 अर्घ्य किए गए समर्पित

इससे पहले शनिवार को सिद्ध चक्र विधान की आराधना करते हुए मंडल पर 512 अर्घ्य समर्पित किए। भगवान की शांतिधरा करने का लाभ प्रमिला पतंग्या, अनिमेष जैन प्रियंका जैन, ललित जी उर्मिला दोषी को प्राप्त हुआ। मुनि श्री का पाद प्रक्षालन अरविंद रश्मि जैन,रवींद्र जैन द्वारा किया गया। शास्त्र भेंट महिला मंडल द्वारा किया गया।

सभा का संचालन समाज के महामंत्री गिरिश पाटोदी ने किया और आभार समाज अध्यक्ष कैलाश लुहाड़िया ने व्यक्त किया। विधि विधान का कार्य महेंद्र गंगवाल द्वारा किया गया।

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