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श्री 1008 कल्पद्रुम महामंडल विधान व विश्व शांति महायज्ञ का हुआ समापन: कड़ाके की सर्दी में भी खूब हुई धर्म की प्रभावना


अंतर्मुखी मुनि श्री 108 पूज्य सागरजी महाराज ने मां अहिल्या की नगरी के पश्चिम क्षेत्र स्थित अतिशयकारी नवग्रह जिनालय ग्रेटर बाबा में चल रहे श्री 1008 कल्पद्रुम महामंडल विधान के अंतिम दिन अपने गुरु को याद किया। कार्यक्रम में श्री कल्पद्रुम विधान की 24 पूजा की समुच्चय जयमाला का महाअर्घ्य श्रीजी के समक्ष समर्पित किया गया। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…


इंदौर। अंतर्मुखी मुनि श्री 108 पूज्य सागरजी महाराज के सानिध्य में मां अहिल्या की नगरी के पश्चिम क्षेत्र स्थित अतिशयकारी नवग्रह जिनालय ग्रेटर बाबा में चल रहे

श्री 1008 कल्पद्रुम महामंडल विधान के समापन अवसर पर श्रावकों ने ठंड की परवाह न करते हुए प्रातः काल कोहरे में ही मंडप में पहुंचकर 124 अर्घ्य श्रीजी को समर्पित किए।

विधान के अंतिम दिन श्री1008 विश्व शांति महायज्ञ में करीब 108 हवन कुंडों में लगभग 250 श्रावक-श्राविकाओं ने विश्व में फैल रही

अराजकता एवं अशांति दूर करने के लिए मंत्रोच्चार के साथ आहुतियां दीं।

अंतिम दिन अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर ने कहा कि मैंने जो कुछ भी सीखा है,

वह श्रवणबेलगोला के समाधिस्थ मेरे गुरु चारुकीर्ति भट्टारक महास्वामी जी से ही सीखा, उनका मैं पूरी उम्र आभारी रहूंगा।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में नई पीढ़ी पाश्चात्य संस्कृति की ओर बढ़ रही है, यहां बैठे सभी पत्रकार बंधुओं से मैं आग्रह करता हूं कि आप अपने-अपने क्षेत्रों में माहिर हैं,

अपनी लेखनी से धर्म, समाज, राष्ट्र में फैल रही कुरुतियों को निष्पक्ष रूप से समाज व राष्ट्र तक पहुंचाते रहें।

समर्पित किया महाअर्घ्य

इसके पूर्व, प्रतिष्ठाचार्य विनोद पगारिया, पंडित किर्तेश जैन के सानिध्य में नित्य नियम की पूजा के बाद महाअर्घ्य समर्पित किया गया।

इसके बाद श्री कल्पद्रुम विधान की 24 पूजा की समुच्चय जयमाला का महाअर्घ्य श्रीजी के समक्ष समर्पित किया गया।

इससे पूर्व कन्हैयालाल विकास जावरा वाले परिवार ने शांतिधारा के साथ दिन की शुरुआत की।

संगीतमय वातावरण में जैनिषा जैन पिपलगोन,प्राची छाबड़ा, रुपाली अजमेर एवं भूमि कासलीवाल ने मंगलाचरण की आकर्षक प्रस्तुति दी।

इस अवसर पर सभी आमंत्रित अतिथियों ने दीप प्रज्वलन किया।

मुनिश्री के पाद प्रक्षालन का लाभ आयोजन समिति के प्रमुख नरेन्द्र -शकुंतला वेद एवं भरत जैन परिवार ने लिया।

हुई गुरु पूजा

विधान के आखिर में अंतर्मुखी मुनिश्री 108 पूज्य सागरजी महाराज की गुरु पूजा हुई।

इस अवसर पर कालानी नगर दिगंबर जैन महिला मंडल, स्मृति नगर महिला मंडल, जैन कॉलोनी महिला मंडल, उदय नगर महिला मंडल, बासवाड़ा दिगंबर जैन महिला मंडल, क्लर्क कॉलोनी महिला मंडल, सखी सहेली महिला मंडल, मल्हारगंज के साथ विभिन्न क्षेत्रों से पधारे समाज जनों ने आकर्षक ढंग से गुरुवर के समक्ष अष्ट द्रव्य सहित अर्घ्य समर्पित किए।

कार्यक्रम में विजय वाणी छाबड़ा, आनंद गोधा, राकेश जैन बांसवाड़ा, नकुल पाटोदी, देवेन्द्र पाटोदी, निखिल जैन, डॉ संजय जैन, कैलाश लुहाड़िया सहित इंदौर व इंदौर शहर सहित विभिन्न शहरों के श्रावक-श्राविकाओं ने मुनिश्री के समक्ष श्रीफल अर्पित कर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया।

प्राप्त किया आशीर्वा

महोत्सव समिति के प्रमुख नरेन्द्र वेद, आदित्य जैन, कमलेश जैन, हितेश कासलीवाल, विकास जैन व दीपक जैन का विशेष रूप से समाज द्वारा सम्मान किया गया।

इसके साथ ही समाज श्रेष्ठी उषा पाटनी सहित विधानाचार्य विनोद पगारिया एवं पंडित किर्तेश जैन का भी सम्मान किया गया।

समिति के प्रमुख नरेन्द्र वेद, संजय पाटनी, आदित्य जैन, कमलेश जैन, हितेश कासलीवाल, विकास जैन व दीपक जैन ने बताया कि इस ऐतिहासिक विधान के अंतिम दिन बहुत ही हर्षोल्लास, धार्मिक वातावरण के साथ अपनी-अपनी मनोकामनाओं को लेकर श्रावक-श्राविकाओ ने विश्वशांति महायज्ञ में आहुति देकर आयोजन का समापन किया।

महायज्ञ के पश्चात श्रीफल फाउंडेशन द्वारा श्रीफल पत्रकारिता पुरस्कार का आयोजन मुनि श्री के सानिध्य में हुआ, जहां समाजजनों ने अधिक संख्या में पधार कर मुनिश्री का आशीर्वाद प्राप्त किया।

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