गुजरात राज्य के मोडासा शहर के श्री जीरावला पार्श्वनाथ लब्धि जैन मंदिर में प्रवासरत श्रमण संघीय सलाहकार दिनेश मुनि ने गुरुवार को कालधर्म को प्राप्त श्रमण संघीय श्री अमर – पुष्कर संप्रदाय की ज्येष्ठ महासाध्वी उप प्रवतिनी श्री चंदनबाला जी म. को श्रद्धांजली अर्पित करते हुए कहा कि महासती के आकस्मिक देवलोक गमन से समाज को जो क्षति हुई है, वह अपूरणीय है। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…
मोडासा। गुजरात राज्य के मोडासा शहर के श्री जीरावला पार्श्वनाथ लब्धि जैन मंदिर में प्रवासरत श्रमण संघीय सलाहकार दिनेश मुनि ने गुरुवार को कालधर्म को प्राप्त श्रमण संघीय श्री अमर – पुष्कर संप्रदाय की ज्येष्ठ महासाध्वी उप प्रवतिनी श्री चंदनबाला जी म. को श्रद्धांजली अर्पित करते हुए कहा कि महासती के आकस्मिक देवलोक गमन से समाज को जो क्षति हुई है, वह अपूरणीय है। जन-जन के मन में धर्म आस्था का सूर्य दीप्तिमान करने वाली महान साधिका का अवसान हुआ है, जिससे समाज व संघ पर वज्रपात हुआ है। धर्मसाधना उनका जीवन लक्ष्य था, दृढ़निष्ठा उनका प्रगतिपथ था, विवेक और विचार उनके मार्गदर्शक थे और यश प्रतिष्ठा मान सम्मान उनके अनुगामिनी थे। उन्होंने अपनी तपश्चर्या व अद्वितीय साधना के द्वारा जैन संस्कृति के गौरव को बढ़ाया है। उनका जीवन अनेकानेक सद्गुणों का खिला हुआ गुलदस्ता था, जिनकी सुवास से सम्पूर्ण स्थानकवासी समाज व गुरु पुष्कर देवेंद्र संप्रदाय गौरवान्वित था। इस अवसर पर डॉ. द्विपेंद्र मुनि, डॉ. पुष्पेंद्र मुनि ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की।

छाई शोक की लहर
उल्लेखनीय है कि अखिल भारतीय श्वेतांबर स्थानकवासी जैन श्रमण संघीय महासाध्वी उपप्रवर्तिनी चंदनबाला (87 वर्ष) का आज प्रातःकाल श्री शील चंदन स्वाध्याय भवन, अंवती नगर – हैदराबाद में संथारे सहित देवलोक गमन हो गया। श्रमण संघीय उपाध्याय श्री पुष्कर मुनि जी म. के संप्रदाय की ज्येष्ठ उपप्रवर्तिनी चंदनबाला को कल सायंकाल चौविहार संथारे के पचकखाण करवाएं दिए गये थे और आज प्रातःकाल 10.50 पर उनका देवलोक गमन हो गया। अंतिम डोल यात्रा शील चंदन स्वाध्याय भवन से प्रारंभ हो जो कि हैदराबाद के विविध मार्गों से होती हुई “सत्यम शिवम् गोशाला” के सामने गगनपहाड़ परिसर पहुंची, जहां साध्वी श्री का पार्थिव देव का अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। देवलोक गमन के समाचार प्राप्त होते ही उदयपुर – सूरत इत्यादि शहरों के श्रावक – श्राविकाओं में शोक की लहर छा गई।
जीवन परिचय
उदयपुर में 13 दिसंबर, 1937 को ओसवाल गोत्रीय सोहनलाल खाब्या के घर जन्मी कुमारी कमला ने 6 मार्च, 1953 को उदयपुर में ही उपाध्याय श्री पुष्कर मुनि से जैन दीक्षा ग्रहण कर नहीं साध्वी शीलकुंवर की शिष्या बनीं। चार भाषाओं की जानकार महासाध्वी श्री ने कई पुस्तकों का लेखन भी किया है। उदयपुर क्षेत्र में साध्वी श्री का विचरण अधिक रहा था। उदयपुर शहर के मालदास स्ट्रीट की सुराना की सेहरी में “अमर स्वाध्याय भवन” जैन धर्म स्थानक आपकी प्रेरणा से स्थापित है।













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