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ज्ञानतीर्थ में हो रही है सिद्धों की आराधना : 28 नवंबर को महायज्ञ एवं श्रीजी की भव्य शोभायात्रा से होगा समापन



ज्ञानतीर्थ पर विराजमान सप्तम पट्टाचार्य श्री ज्ञेयसागर महाराज, मुनिश्री ज्ञातसागर महाराज, मुनिश्री नियोगसागर महाराज, क्षुल्लक श्री सहजसागर महाराज के पावन सान्निध्य में श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के सातवें दिन 512 अर्घ्य समर्पित किए गए। वहीं आठवें दिन श्री सिद्ध परमेष्ठि को 1024 अर्घ्य समर्पित किए गए। पढ़िए मनोज नायक की रिपोर्ट…


मुरैना। श्री दिगम्बर जैन ज्ञानतीर्थ क्षेत्र में सिद्धचक्र विधान के तहत आठ दिन से निरंतर श्री सिद्ध परमेष्ठी की आराधना की जा रही है। प्रतिष्ठचार्य अशोक जैन शास्त्री लिधौरा एवं पंडित महेंद्रकुमार शास्त्री मुरैना ने बताया कि प्रत्येक जैन श्रावक को अपने जीवनकाल में कम से कम एकबार श्री सिद्धचक्र विधान अवश्य करना चाहिए। इस विधान को सर्वप्रथम सती मैनासुंदरी ने कराया था। विधान के पुण्य प्रभाव से मैना सुंदरी के पति श्रीपाल एवं अन्य लोगों का कुष्ठ रोग दूर हुआ था।

स्वर्ण कलशों से होगा अभिषेक

ज्ञानतीर्थ पर विराजमान सप्तम पट्टाचार्य श्री ज्ञेयसागर महाराज, मुनिश्री ज्ञातसागर महाराज, मुनिश्री नियोगसागर महाराज, क्षुल्लक श्री सहजसागर महाराज के पावन सान्निध्य में श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के सातवें दिन 512 अर्घ्य समर्पित किए गए। वहीं आठवें दिन श्री सिद्ध परमेष्ठि को 1024 अर्घ्य समर्पित किए गए । अंतिम दिन 28 नवंबर को प्रातः विधान के समापन पर विश्व शांति की कामना के साथ विश्व शांति महायज्ञ होगा। श्री जिनेन्द्र प्रभु की भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। श्री जिनेंद्र प्रभु को पालकी में विराजमान कर भ्रमण कराया जाएगा। तत्पश्चात पाण्डुक शिला पर प्रभु को विराजमान कर स्वर्ण कलशों से जलाभिषेक के साथ विधान का समापन होगा।

सकल जैन समाज की रही सहभागिता 

 परम पूज्य सराकोद्धारक षष्ट पट्टाचार्य श्री ज्ञानसागर महाराज के पावन आशीर्वाद से ब्रह्मचारिणी बहिन अनीता दीदी, मंजुला दीदी, ललिता दीदी के निर्देशन में पुण्यार्जक बजाज परिवार बिचपुरी वालों का विधान ज्ञानतीर्थ की पावनधरा पर हुआ है। इस विधान में सकल जैन समाज ने पूर्णता के साथ सहभागिता प्रदान करते हुए विधान में भाग लिया। अंतिम दिन कार्यक्रम के पश्चात पुण्यार्जक परिवार की ओर से वात्सल्य भोज की व्यवस्था रखी गई है।

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