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ज्ञानतीर्थ पर बच्चों को समझाया शिक्षा और संस्कार का महत्व : धनार्जन के साथ धर्म आराधना भी जरूरी है -आचार्य ज्ञेयसागर


सप्तम पट्टाचार्य श्री ज्ञेयसागर जी महाराज ने ज्ञानतीर्थ जैन मंदिर मुरैना में धर्मसभा के दौरान बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि मनुष्य के जीवन में अच्छी शिक्षा के साथ-साथ अच्छे संस्कारों का होना भी अति आवश्यक है। शिक्षा मानव जीवन का अनमोल हिस्सा है। यह उसके जीवन को एक नई दिशा प्रदान करती है। पढ़िए मनोज नायक की रिपोर्ट…


मुरैना। मनुष्य के जीवन में अच्छी शिक्षा के साथ-साथ अच्छे संस्कारों का होना भी अति आवश्यक है। शिक्षा मानव जीवन का अनमोल हिस्सा है। यह उसके जीवन को एक नई दिशा प्रदान करती है। शिक्षा के साथ ही अच्छे संस्कार मनुष्य के व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं। अच्छी शिक्षा जहां धनोपार्जन में सहायक होती है, वहीं अच्छे संस्कार धर्म आराधना की ओर अग्रसर करते हैं।

शिक्षा तो स्कूलों में मिल जाती है, लेकिन संस्कार तो मनुष्य को उसके परिवार एवं समाज से ही मिलते हैं । जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती जाती है, हम अपने माता-पिता और अन्य परिजनों से कुछ न कुछ सीखते रहते हैं। अच्छे संस्कारों का उद्देश्य मनुष्य के व्यक्तित्व को इस प्रकार विकसित करना है कि वह भविष्य में देश, धर्म व समाज का सर्वांगीण विकास करने में सहभागी बन सके। उक्त विचार छाणी परंपरा के सप्तम पट्टाचार्य श्री ज्ञेयसागर जी महाराज ने ज्ञानतीर्थ जैन मंदिर मुरैना में धर्मसभा के दौरान बच्चों को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।

धन सब कुछ नहीं है

आचार्य श्री ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि अच्छी शिक्षा प्राप्त करके आप धन तो बहुत कमा सकते हैं, लेकिन यदि आपने अच्छे संस्कार प्राप्त नहीं किए तो आपका जीवन अधूरा ही रहेगा। यदि आपने अपने परिजनों से, अपनी समाज से, अपने गुरुओं से अच्छे संस्कार ग्रहण कर लिए तो आप धन के साथ साथ धर्म आराधना भी कर सकेंगे। वर्तमान में धन आवश्यक तो है, लेकिन धन सब कुछ नहीं है। धन से आपको भौतिक एवं सांसारिक सुख तो मिल सकता है लेकिन मन की शांति एवं आत्मिक सुख केवल धर्म आराधना से ही मिल सकता है। इसलिए शिक्षा के साथ साथ संस्कारों का होना अति आवश्यक है। यानि कि धनार्जन के साथ धर्म आराधना भी जरूरी है।

बच्चों ने की आराधना

ज्ञानतीर्थ जैन मंदिर में आज बच्चों ने पहुंचकर भगवान श्री आदिनाथ, श्री पार्श्वनाथ सहित 24 तीर्थंकरों की आराधना करते हुए पूजा अर्चना की। क्षेत्र पर चातुर्मासरत आचार्य श्री ज्ञेयसागर महाराज, मुनिश्री ज्ञातसागर महाराज, मुनिश्री नियोगसागर महाराज, क्षुल्लक सहजसागर महाराज को श्रीफल अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया। आज की शांतिधारा करने का सौभाग्य बिमल जैन, तरुण जैन एवं रामेश्वर दयाल योगेश जैन जय जिनेन्द्र ट्रेवल्स को प्राप्त हुआ।

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