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मुनि श्री पुण्य सागर जी ने प्रदान की दीक्षाएं : संयम से चरित्र मोहनीय कर्म के विनाश से दीक्षा के भाव होते हैं


मुनि श्री पुण्य सागर जी ने सिद्ध क्षेत्र सोनागिर में एक आर्यिका एवं एक क्षुल्लिका दीक्षा दी। 72 वर्षीय 7 प्रतिमा धारी सुनीता दीदी छाबड़ा गुवाहाटी का दीक्षा उपरांत नूतन नाम 105 आर्यिका श्री स्वर्ण मति किया गया। वहीं 80 वर्षीय 7 प्रतिमा धारी तारा देवी ऊकावत घाटोल को क्षुल्लिका दीक्षा प्रदान की गई। आपका नूतन नाम सुवर्ण मति माताजी किया गया। पढ़िए राजेश पंचोलिया की रिपोर्ट…


सोनागिर। प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांति सागर जी की मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के चतुर्थ पट्टाधीश आचार्य श्री अजित सागर जी के परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री पुण्य सागर जी ने सिद्ध क्षेत्र सोनागिर में एक आर्यिका एवं एक क्षुल्लिका दीक्षा दी। 72 वर्षीय 7 प्रतिमा धारी सुनीता दीदी छाबड़ा गुवाहाटी का दीक्षा उपरांत नूतन नाम 105 आर्यिका श्री स्वर्ण मति किया गया। वहीं 80 वर्षीय 7 प्रतिमा धारी तारा देवी ऊकावत घाटोल को क्षुल्लिका दीक्षा प्रदान की गई। आपका नूतन नाम सुवर्ण मति माताजी किया गया।

सर्वोपरि लक्ष्य संयम साधना

आचार्य श्री अजित सागर जी के शिष्य मुनि श्री पुण्य सागर जी ने इस अवसर पर प्रवचन में बताया कि नंग-अनंग तथा 5:30 करोड़ मुनिराज की सिद्ध भूमि पर दो भव्य जीव दीक्षा ले रहे हैं। मानव जीवन का सर्वोपरि लक्ष्य संयम साधना है। वर्तमान में श्रावकों का सीजन समाप्त हुआ। चातुर्मास में साधुओं का सीजन धर्म प्रभावना का प्रारंभ होता है। संयम से चरित्र मोहनीय कर्म के विनाश से दीक्षा के भाव होते हैं। इसके पूर्व पांडाल के बाहर ध्वजारोहण के बाद आमंत्रित अतिथियों द्वारा आचार्य श्री शांति सागर जी के चित्र का अनावरण कर दीप प्रज्वलन किया गया।

किए दीक्षा संस्कार

नृत्य मंगलाचरण किया गया। पूज्य मुनि श्री पुण्य सागर जी के चरण प्रक्षालन का सौभाग्य किशनगढ़, राजस्थान के प्रसिद्ध भामाशाह अशोक पाटनी, आर के मार्बल एवं सुशीला पाटनी किशनगढ़ तथा सुनीता भागचंद चूड़ीवाल परिवार को प्राप्त हुआ। पुण्यार्जक परिवार द्वारा मुनि श्री पुण्य सागर जी, तपस्वी मुनि श्री महोत्सव सागर जी एवं मुनि श्री उदित सागर जी को शास्त्र भेंट किए गए। इस अवसर पर धर्म सभा को संहिता सूरी पंडित हंसमुख शास्त्री धरियावद, ब्रह्मचारिणी वीणा दीदी, आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी ने संबोधित किया। सुनीता दीदी गुवाहाटी के केशलोच पांडाल में प्रारंभ हुए। परिजनों के एक नेत्र में खुशी के दूसरे नेत्र में दुख के अश्रु सभी को द्रवित कर रहे थे। मुनि श्री पुण्य सागर जी ने उपदेश के बाद समाज, परिजनों,संघ के भैया ,दीदी, साधुओं से दीक्षा की अनुमोदना चाही। इसके बाद सौभाग्यशाली महिलाओ द्वारा चौक पूरण की क्रिया की गई। दीक्षागुरु द्वारा पंच मुष्ठि केश लोचन कर मस्तक और हाथो की शुद्धि के बाद मस्तक, कर हस्तों पर दीक्षा संस्कार किए गए। पुण्यार्जक परिवार द्वारा नूतन आर्यिका माताजी और क्षुल्लिका माताजी को पिच्छी, कमंडल, शास्त्र, कपड़े भेंट किया।

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