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शून्य से शिखर की ओर से अग्रसर: त्रिमूर्ति धाम दिव्य तीर्थ क्षेत्र के भूमि पूजन व शिलान्यास पर होंगे कई कार्यक्रम 


श्री दिगंबर जैन त्रिमूर्ति धाम दिव्य तीर्थ क्षेत्र के निर्माण का संकल्प शहर के एक ऐसे समाज श्री दिगंबर जैन खरौआ समाज इंदौर एवं ट्रस्ट द्वारा लिया गया है, जो अभी तक छोटे-छोटे स्तर पर सामाजिक सहयोग करती रही है जिसमें शिखरजी की यात्रा, निशुल्क नेत्र शिविर, शिखरजी बचाओ आंदोलन, जैन धार्मिक शिविर, अनाथालय और वृद्धाश्रम आदि में बहुमूल्य योगदान शामिल है। पढ़िए अंकित पांड्या की रिपोर्ट…


इंदौर। श्री दिगंबर जैन त्रिमूर्ति धाम दिव्य तीर्थ क्षेत्र के निर्माण का संकल्प शहर के एक ऐसे समाज श्री दिगंबर जैन खरौआ समाज इंदौर एवं ट्रस्ट द्वारा लिया गया है, जो अभी तक छोटे-छोटे स्तर पर सामाजिक सहयोग करती रही है जिसमें शिखरजी की यात्रा, निशुल्क नेत्र शिविर, शिखरजी बचाओ आंदोलन, जैन धार्मिक शिविर, अनाथालय और वृद्धाश्रम आदि में बहुमूल्य योगदान शामिल है।

इंदौर में इस समाज के लगभग 180 परिवारों का इतिहास ज्यादा पुराना नहीं है। यहां इस समाज को 60-70 साल हुए हैं। आज भी इंदौर जैन समाज के लोग, इसी समाज के द्वारा महावीर जयंती में वितरित किया जाने वाला झोलीआ (केरी का पना ) का स्वाद भूले नहीं भूलते।

दिव्य क्षेत्र बनाने का लिया संकल्प 

पिछले 2-3 साल से महावीर जयंती पर समाज के द्वारा निकाली गई शोभायात्रा में प्रथम आने का भी सौभाग्य प्राप्त है। इस वर्ष महावीर जयंती में भी इसी समाज ने अपना प्रथम स्थान प्राप्त किया है। देश के सबसे स्वच्छ शहर और मध्य प्रदेश की आर्थिक-सांस्कृतिक राजधानी इंदौर में इसी समाज के परिवारों ने एक बहुत ही विशाल भव्य, दिव्य क्षेत्र “श्री दिगंबर जैन दिव्य तीर्थ क्षेत्र ‘त्रिमुर्ति धाम” के रूप में बनाने का संकल्प लिया है। यह अपने आप में समाज की एकता के साथ, इन्ही समाज के सदस्यों का नए व पुराने विचारों का अद्भुत संयोग है।

हमारे आचार्य पूज्यपाददेव द्वारा रचित इष्टोपदेश गाथा नंबर 2 के अनुसार

*योग्योपादानयोगेन दृषदः स्वर्णता मता।

*द्रव्यादिस्वादिसम्पत्तावात्मनोऽप्यात्मता मता।।२।।

अर्थात किसी कार्य के सिद्ध होने के लिए दो कारण उपादान और निमित्त होना ज़रूरी है। इस समाज के पास उनका खुद का उपादान कारण तो था लेकिन उनके पास निमित्त कारण नहीं था। इसके लिए उनकी दीर्घकालीन प्रतीक्षा की खोज आचार्यश्री 108 विशुद्ध सागर महाराज के शिष्य श्रुत संवेगी मुनि श्री 108 आदित्य सागर जी एवम मुनिसंघ के आशीर्वाद पर पूर्ण हुई। परम पूज्य आचार्य श्री 108 विद्यासागर महाराज का भी आशीर्वाद इस समाज को प्राप्त है।

त्रिमूर्ति धाम में होंगी इनकी प्रतिमाएं 

श्री दिगम्बर जैन त्रिमूर्ति-धाम तीर्थ क्षेत्र में तीन पद (कामदेव चक्रवर्ती तीर्थंकर) के धारी भगवान 1008 श्री शांतिनाध भगवान, 1008 श्री अरनाथ भगवान और 1008 श्री कुंधुनाथ भगवान की विशाल खड्गासन प्रतिमा स्थापित की जाएगी। इसी के साथ जिनालय जिसमें श्री 1008 आदिनाथ भगवान, श्री 1008 पार्श्वनाथ भगवान और श्री 1008 महावीर भगवान की पद्मासन प्रतिमा स्थापित होंगी। चतुर्मुखी जैसे हमारे तीर्थंकर भगवान समवशरण में भव्यों को प्रतीत होते है, वर्तमान चौबीसी, संत निवास, स्वाध्याय भवन, धर्मशाला, आधुनिक कम्युनिटी हॉल और औषधालय का भी निर्माण किया जाएगा। श्री दिगंबर जैन खरौआ समाज इंदौर एवम ट्रस्ट के अनुसार ये विशाल तीर्थ क्षेत्र का निर्माण, संपूर्ण सकल दिगम्बर जैन समाज के सहयोग के बिना कल्पना भी नहीं की जा सकती है। आइए आप भी हमारे साथ जुड़ कर इस भव्य तीर्थ क्षेत्र के साक्षी बनें।

24 व 25 मई को भूमि पूजन व शिलान्यास 

इंदौर में इस दिव्य क्षेत्र त्रिमूर्ति धाम का भूमि पूजन, शिलान्यास और मुनि श्री 108 आदित्य सागर महाराज का जन्मोत्सव 24 व 25 मई को मनाया जाएगा। इसमें 24 मई को शाम पांच बजे महाराज श्री ससंघ का त्रिमूर्ति धाम में आगमन होगा। साढ़े पांच बजे मुनि श्री 108 आदित्य सागर जी महाराज जी का जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में महाआरती व भजन संध्या आयोजित की जाएगी। 25 मई को प्रात:  साढ़े सात बजे भूमि पूजन व शिलान्यास का कार्यक्रम रखा गया है।

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