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सन्त निवास का शिलान्यास एवं मुनिसुव्रतनाथ विधान सम्पन्न : सच्चे भक्तों की ईश्वर भी मदद करता है- स्वस्तिभूषण माताजी


श्री महावीर दिगम्बर जैन नसियां जी मन्दिर में श्री 1008 मुनिसुव्रतनाथ विधान का आयोजन किया गया। इस अवसर पर स्वस्तिभूषण माताजी के प्रवचन भी हुए। पढ़िए मनोज नायक की विस्तृत रिपोर्ट…


मुरैना। होली का पर्व रंगों का पर्व है। रंगों का मनुष्य के जीवन बहुत महत्व है। पर्व कहते हैं त्योहार को, पर्व कहते हैं गन्ने की गांठ को, उसी से गन्ना पैदा होता है । त्योहार हमें हमारे ऐतिहासिक पुरुषों का स्मरण कराके हमें शिक्षा देते हैं। होली के पर्व का वर्णन जैन शास्त्रों में बसन्तोत्सव के रूप में मिलता है। यह बात जैन साध्वी गणिनी आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी ने श्री महावीर दिगम्बर जैन नसियां जी मन्दिर में श्री 1008 मुनिसुव्रतनाथ विधान के अवसर पर धर्म सभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किये।

उन्होंने कहा कि पुराने समय में राजा अपने परिवार और प्रजा के साथ बाग-बगीचों में जाकर रंग-बिरंगे फूल -पत्तियों से एक दूसरे को प्रसन्न करते थे। अन्य कथानक के अनुसार होलिका को वरदान प्राप्त था कि अग्नि उसे जला नहीं सकती। प्रहलाद भगवान का भक्त था, जो कि उसके राजा पिता को पसंद नहीं था। सारा परिवार एक तरफ और ईश्वर भक्त प्रहलाद एक तरफ।

राजा की आज्ञानुसार होलिका प्रहलाद को लेकर अग्नि में बैठ गई कि अग्नि उसे तो जलायेगी नहीं, लेकिन प्रहलाद जलकर भस्म हो जाएगा। लेकिन बुरे विचार वालों का वरदान भी अभिशाप बन जाता है और सच्चे विचार वालों का अभिशाप भी वरदान बन जाता है। अग्नि में होलिका तो जलकर भस्म हो गई और ईश्वर भक्त प्रहलाद सुरक्षित बच गया।

तब से आज तक होलिका जलाकर एवं रंग गुलाल लगाकर होली का त्योहार मनाया जाता है। भगवान के सच्चे भक्तों को पग पग पर सहारा मिलता है। जो लोग अपना मन साफ रखते हैं, किसी का बुरा नहीं सोचते, छल कपट नहीं करते, ईश्वर ऐसे लोगों की सदैव मदद करते हैं।

हुए अनेक कार्यक्रम

श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन बड़ा मन्दिर कमेटी के उपाध्यक्ष अभिषेक जैन टीटू ने बताया कि श्री नसियां जी जैन मंदिर में श्री मुनिसुव्रतनाथ विधान का आयोजन किया गया। इस विधान की रचना स्वस्तिधाम प्रणेत्री गुरुमां गणिनी आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी द्वारा की गई है। आगरा से पधारे विधानाचार्य राकेश जैन (भूरा पंडित जी) ने सभी धार्मिक क्रियाओं को सम्पन्न कराया। भजन गायक एवं संगीतकार मनीष जैन एंड पार्टी ने अपनी संगीतमय स्वर लहरी से सभी को झूमने पर मजबूर कर दिया। विधान से पूर्व श्री जिनेन्द्र प्रभु का अभिषेक, शांतिधारा एवं अष्टद्रव्य से पूजन किया गया।

विधान के पश्चात नसियां जी प्रांगण में पूज्य गणिनी आर्यिका श्री लक्ष्मीभूषण माताजी, श्री स्वस्तिभूषण माताजी, श्री अंतसमती माताजी के पावन सान्निध्य एवं इंडियन वुमन फैशन प्रा.लि. सूरत के डायरेक्टर, उद्योगपति सुनील जैन के मुख्यातिथित्य में सन्त निवास की आधार शिला रखी गई। विशिष्ट अतिथि के रूप में महेशचंद जैन आदिनाथ साड़ी सूरत एवं सुनील जैन (जैन बन्धु) आगरा विशेष रूप से सम्मिलित हुए। विधानाचार्य राकेश जैन भूरा पंडित जी आगरा द्वारा मंत्रोच्चारण एवं ध्वजारोहण के साथ भूमि पूजन कराया गया।

मुरैना के श्रावक श्रेष्ठि, उद्योगपति महेशचंद जैन बंगाली (अझेड़ा वाले) एवं पवन जैन (ऋषभ इंटर प्राइजेज) ने अपने परिवार के साथ भूमि पूजन कर सन्त निवास की आधार शिला रखी।

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