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जैन समुदाय में आक्रोश : उपनेता प्रतिपक्ष ने विधानसभा में दिगम्बरत्व का किया अपमान

जयपुर | जैन धर्म क्या आज इतना हल्का और कमजोर हो गया है कि उनके भगवानों, तीर्थंकर, तीर्थों, संतों, मुनिराजों के बारे में कोई भी कैसा भी कहीं भी जो मर्जी अपशब्द बोल दे, मजाक बना दे, तिरस्कार कर दे, यह बहुत ही चिंतनीय है। समय की बिडंबना है कि आज कल अल्पसंख्यक वर्ग के जैन समुदाय के साथ ऐसा हो रहा है कभी कोई कर्नाटक के बाहुबली भगवान की मूर्ति को चड्डी पहनाने की बात करता है तो कोई कहता है क्या हम दिगम्बर के रूप में स्कूल और महाविद्यालय आएं तो क्या हमें रोका जाएगा और तो और प्रेस वार्ता कर दिगम्बर संतों को अपशब्द बोलकर उन्हें कपड़े पहनाने की बात होती है। कभी पूर्व सांसद शाश्वत क्षेत्र श्री सम्मेद शिखर जी की टोकों को ध्वस्त करने की धमकी देते हैं। जैन समुदाय को भारत के राजपत्र 27 जनवरी, 2014 के द्वारा अल्पसंख्यक समुदाय में अधिसूचित किया गया लेकिन केन्द्र सरकार और राज्य सरकारें उनके सामाजिक, आर्थिक स्थलों, शैक्षिक एवं धार्मिक अधिकारों की सुरक्षा संरक्षण देने में विफल रही हैं l बीते दो मार्च को राजस्थान विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र सिंह राठौड़ ने दिगम्बरत्व पर ऐसी टिप्पणी की जिससे भारतीय संस्कृति की अति प्राचीनतम व पौराणिक दो धाराओं वैदिक संस्कृति एवं श्रवण संस्कृति, दोनों का बहुत अपमान हुआ, जिससे कारण वैदिक संस्कृति और श्रवण संस्कृति को मानने वाले आमजन की भावनाएं बहुत आहत हुई हैं। अगर उपनेता प्रतिपक्ष इसके लिए विधानसभा में और सार्वजनिक रूप से वैदिक संस्कृति और श्रवण संस्कृति के उपासकों से माफी भी मांगें और राजस्थान के विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सी.पी.जोशी इस असंसदीय व्यक्तव्य को विधानसभा की कार्यवाही से हटा भी दें तो भी आमजन की पीड़ा कम नहीं हो पाएगीl

दिगम्बरत्व का महत्त्व

पौराणिक साहित्यविद तो शिव को दिगम्बरत्व के ही प्रतीक निरूपित करते हैं और श्रवण संस्कृति दिगम्बरत्व एवं वीतराग मार्ग का परिचायक है। अहिंसा, अपरिग्रह, तप, त्याग व संयम इसकी शिखर यात्रा के घोतक है। भगवान ऋषभदेव ने असि-मसि-कृषि के मूल्यवान सिद्धांतों प्रतिपादन कर व्यक्ति के अंतरंग और बहिरंग दोनों ही तलों पर उन्नयन की शिक्षा प्रदान की थी। इन्हें दिगम्बरत्व संस्कृति का जनक कहा जाता हैl जैन धर्म एक विज्ञान है और वह दिगम्बरत्व के सिद्धान्त का प्रचारक अनादि काल से रहा हैl उसके साधु इस प्राकृत वेश में शीलधर्म के उत्कृष्ट पालक और प्रचारक तथा इन्द्रियजयी योगी रहे हैं, जिनके सम्मुख सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य और सिकन्दर महान जैसे शासक नतमस्तक हुए थे और जिन्होंने सदा ही लोक कल्याण किया है। ऐसे ही दिगम्बर मुनियों के संसर्ग में आये हुए अथवा मुनिधर्म से परिचित विद्वान भी आज इन तपोधन दिगम्बर मुनियों के चरित्र से प्रभावित हुए हैंl वे उन्हें राष्ट्र का बहुमूल्य हीरा समझते हैंl

संगठनों की प्रतिक्रिया

राजस्थान समग्र जैन युवा परिषद् के संरक्षक अशोक बांठिया ने बताया कि सबसे उच्च पद जो कि मनुष्य धारण कर सकता है, वह दिगम्बर मुनि का पद हैl इस अवस्था में मुनष्य साधारण मनुष्य ना रहकर अपने ध्यान के बल से परमात्मा का मानो अंश हो जाता हैl जब मनुष्य निर्माणी (दिगम्बर) साधु हो जाता है तब उसको इस संसार से कुछ प्रयोजन नहीं रहता और वह पुण्य-पाप, नेकी -बदी को एक ही दृष्टी से देखता हैl ऐसे संतों अमर्यादित टिप्पणी कर उनका उपहास करना आप जैसे वरिष्ठ राजनेता शोभा नहीं देता।
राजस्थान समग्र जैन युवा परिषद् के अध्यक्ष जिनेन्द्र जैन ने बताया कि नेता प्रतिपक्ष द्वारा दिगम्बरत्व पर दिए गए बयान के कारण जैन समुदाय की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्हें नैतिकता के आधार पर नेता प्रतिपक्ष पद से त्याग पत्र दे देना चाहिए। वह अब इस पद के योग्य नहीं रहे हैं और विधानसभा के अध्यक्ष को विधानसभा के अध्यक्ष के पैनल सदस्य जे.पी. चंदेलिया और मंत्रियों एवं विधायकों पर भी अनुशासनात्मक कार्यवाही करनी चाहिए, जो पीछे से राजेन्द्र राठौड़ के व्यक्तव्य पर हंसी के ठहाके लगा रहे थेl

भविष्य में किसी भी धर्म की भावनाएं विधानसभा और लोकसभा में आहत ना हों व जैन समुदाय तीर्थंकर, संतों /आचार्यों पर टिप्पणी करने वाले राजनेताओं पर उचित कार्यवाही के लिए विधानसभा अध्यक्ष, लोकसभा अध्यक्ष, अल्पसंख्यक मंत्रालय, अल्पसंख्यक मामलात विभाग, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग और राजस्थान राज्य अल्पसंख्यक आयोग को पत्र लिखा हैI वरिष्ठ समाज सेवी लोकेश बापना ने बताया कि उपनेता प्रतिपक्ष की घटिया सोच उनके विचारों का नंगापन है। उन्हें अपने नग्न आचरण की तुलना किसी के आदर्श, श्रद्धा और आस्था के प्रतीक से नहीं करनी चाहिए। इन्हें सांसारिक और आध्यात्मिकता का अंतर मालूम नहीं है।

क्या है आक्रोशित होने की वजह
राजस्थान विधानसभा बालोतरा को जिला बनाने की मांग को लेकर पिछले लंबे समय से नंगे पैर घूम रहे कांग्रेस विधायक मदन प्रजापत पर टिप्पणी करते हुए उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने विधानसभा में पूजनीय संतों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वह मदन प्रजापत की मांग का समर्थन करते हैं। मुझे इनके साथियों ने बताया कि यह दिगम्बर जैन की तरह वस्त्र भी उतरेंगे l उस दृश्य को देखकर मेरी आत्मा भी कांप जाएगी, जिस दिन मेरा यह छोटा भाई दिगम्बर जैन की तरह यहां आयेगा l इसलिए मैं मांग करता हूं कि मदन जी को दिगम्बर जैन मत बनने देनाl

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