सारांश
विरागोदय महामहोत्सव में आयोजित पंचकल्याणक प्रतिष्ठा व गजरथ महोत्सव में भगवान आदिनाथ का मोक्ष कल्याणक विधि विधान के साथ संपन्न हुआ। प्रतिष्ठाचार्य पं. हंसमुख, धरियावाद ने पंचकल्याणक की सारी क्रियाएं सम्पन्न कराईं। पढ़िये राजेश रागी / रत्नेश जैन बकस्वाहा की रिपोर्ट..
पथरिया। विरागोदय महामहोत्सव में आयोजित पंचकल्याणक प्रतिष्ठा व गजरथ महोत्सव के अंतिम दिन शुक्रवार की सुबह भगवान आदिनाथ का मोक्ष कल्याणक विधि विधान के साथ संपन्न हुआ। प्रतिष्ठाचार्य पं. हंसमुख, धरियावाद ने पंचकल्याणक की सारी क्रियाएं सम्पन्न कराईं। इस अवसर पर गणाचार्य श्री विराग सागर जी महाराज ने अपने मंगल प्रवचन में भगवान के मोक्ष कल्याण पर प्रकाश डाला एवं भक्तों के द्वारा पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य प्राप्त किया। गणाचार्य श्री विराग सागर जी ने सौधर्म इंद्र विनय मलैया समेत सभी 81- 81 पात्रों को मंगल आशीर्वाद दिया एवं सभी कार्यकर्ता व पदाधिकारियों को मंगल आशीर्वाद देते हुए कहा कि यह सब आपके मेहनत समर्पण के कारण पंचकल्याणक सानंद सम्पन्न हुआ।
मंत्री गोपाल भार्गव को किया सम्मानित
आचार्य श्री ने अपनी मंगल वाणी में मप्र के लोक निर्माण विभाग मंत्री गोपाल भार्गव के लिए मंगल आशीर्वाद दिया और कहा कि आपने धर्म के लिए जो समर्पित भावना से गजरथ परिक्रमा एवं पथरिया के सभी पहुँच मार्गो के सड़क निर्माण एवं सुधार के कार्यो को तत्परता से कराया, वह स्मरणीय एवं सराहनीय रहेगा। समिति के पदाधिकारियों ने भार्गव को सम्मानित किया।इसके अलावा जिला पंचायत अध्यक्ष रंजीता गौरव पटेल, दमोह विधायक अजय टंडन, पथरिया विधायक रामबाई सिंह परिहार को उनकी समर्पित भावना सहयोग के लिए सम्मानित किया। इस अवसर पर अनेक जगह के अतिथियों को सम्मानित किया गया।

गजरथ सहित अनेक रथों की हुई सात परिक्रमा
पंचकल्याणक की पूजा व विश्वशांति महायज्ञ में सभी पात्रों इंद्र- इंद्राणियों सहित हजारों श्रद्धालुओं ने आहुति दी। दोपहर मे विरागोदय के विशाल कमल आकार के मंदिर की सात फेरियां अपार जनसमूह व श्रद्धालुओं के साथ लगाई गई। गजरथ की सातों परिक्रमा में पूज्य गणाचार्य श्री विराग सागर जी महाराज एवं उनके संघस्थ 350 साधु, संत, साधवियां चल रहे थे, जिनकी जयकारों से आकाश गुंजायमान था। प्रथम गजरथ में सौधर्म इंद्र विनय मलैया, कुबेर इंद्र अनिल कुबेर , प्रकाश चंद्र सराफ, राजेन्द्र सिंघई श्रीजी चंवर ढुलाते सबार थे, इसके अलावा पांच स्वर्ण व रजत तथा अन्य रथों में सैकड़ों इंद्र- इंद्रणियां श्रीजी को विराजमान किये सप्त परिक्रमा लगा रहे थे, जिसमे अनेक श्रद्धालुओं को सारथी बनने सौभाग्य प्राप्त हुआ। गजरथ परिक्रमा में हाथी, घोड़े, बग्घी में धर्मध्वज लिये दिव्यघोष व बैण्ड संगीत की स्वर लहरियों के साथ नाचते-झूमते अपार जनसमूह चल रहा था। कार्यक्रम के उपरांत सत्यपाल जैन ने प्रशासनिक अधिकारी कर्मचारियों एवं सभी कार्यकर्ताओं का आभार प्रकट किया।













Add Comment