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प्राण प्रतिष्ठा महामहोत्सव : संचित पुण्यों से मिलता तीर्थंकररूपी कर्म का फलः आचार्यश्री


सारांश

आचार्यश्री वर्धमान सागर महाराज ने कहा कि वर्तमान में मनुष्य अर्थ पुरुषार्थ को प्राप्त करने में लगे हुए हैं लेकिन अर्थ पुरुषार्थ के बजाय धर्म पुरुषार्थ से ही मोक्ष संभव है। पढ़िए विस्तृत रिपोर्ट…


मदनगंज-किशनगढ़ में वात्सल्य वारिधि व राष्ट्र गौरव आचार्यश्री वर्धमान सागर महाराज ने कहा कि संसार का सुख नश्वर है। वर्तमान में मनुष्य जन्म की खुशी मनाते हैं लेकिन यह भी अस्थाई है। वहीं संसार में मरण का दुख भी कुछ दिनों तक ही मनाया जाता है। वर्तमान में मनुष्य अर्थ पुरुषार्थ को प्राप्त करने में लगे हुए हैं लेकिन अर्थ पुरुषार्थ के बजाय धर्म पुरुषार्थ से ही मोक्ष संभव है।

मनुष्य को धर्म को धारण करना चाहिए। शाश्वत सुख के लिए धर्म का साथ जरूरी है, तभी आपका मानव जन्म सफल व सार्थक होगा। धर्म से मोक्ष प्राप्त होगा और कर्मों को नष्ट कर केवलज्ञान प्राप्त किया जा सकता है। इसलिए तीर्थंकर बनने के लिए धर्म पुरुषार्थ आवश्यक है। इंदिरा नगर स्थित शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर और सिटी रोड स्थित चन्द्रप्रभु मंदिर के श्रीमद् जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा प्राण महामहोत्सव के तहत वर्धमान सभागार में आयोजित प्रवचन सभा में आचार्यश्री ने कहा कि जन्म कल्याणक इसलिए मनाया जाता है कि यह अंतिम जन्म तीर्थंकर बालक का था। उसके बाद दोबारा उनका जन्म नहीं होगा।

वह दीक्षा लेंगे, ज्ञान कल्याणक होगा और फिर उनका मोक्ष कल्याणक होगा। जन्म मरण के परिभ्रमण से मुक्त हो जाएंगे। तीर्थंकर बालक का जन्म जगत का उद्धार करने वाला होता है।। *आचार्य जी ने अशोक पाटनी जी के संस्कारों को सराहा* आचार्य जी ने वर्तमान के चलन पर चिंतन जताते हुए कहा कि जन्मदिन पर केक काटते हैं और उस पर मोमबत्ती बुझाते हैं, यह पश्चिमी संस्कृति है। वर्तमान में लोग भारतीय संस्कृति को भूल रहे हैं जबकि वास्तविक जन्मदिवस मनाने का उदाहरण तो श्रावक श्रेष्ठि अशोक पाटनी ने पेश किया। उन्होंने कहा कि अशोक जी ने जन्मदिवस मनाने की प्रक्रिया सबसे पहले उठकर देवपूजा और बाद में अपने निवास पर साधुओं का चौका लगाकर और आहार कराकर जन्मदिन को सार्थक बनाया।

वात्सल्य वारिधि भक्त परिवार के राजेश पंचोलिया इंदौर ने बताया कि 27 जनवरी तक आचार्यश्री के प्रवचन प्रतिदिन सुबह हो रहे हैं। वहीं आहारचर्चा के बाद सामयिक व अन्य कार्यक्रम आरके कम्यूनिटी सेंटर में हो रहे हैं। वात्सल्यमय जीवन दर्शन प्रदर्शनी 27 जनवरी तक आमजन के लिए भी सुबह 8 से रात्रि 9 बजे तक खुली रहेगी।

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Shreephal Jain News

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