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ढाईदीप जिनायतन: पंचकल्याणक महोत्सव में हे स्वामी नमोस्तु, नमोस्तु, नमोस्तु से गूंज उठी अयोध्या नगरी


सारांश

इंदौर के गांधी नगर में चल रहे ढाईदीप जिनायतन के पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के पांचवे दिन मुनिराज ऋषभदेव के प्रथम आहार दान का प्रसंग हुआ जहां राजा श्रेयांस परिवार ने नवधा भक्ति भाव पूर्वक इक्षुरस का आहार देकर अपना नर भव सफल किया। इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम और विचार गोष्ठी आयोजित हुए। पढ़िए राजेश रागी / रत्नेश जैन बकस्वाहा की विस्तृत रिपोर्ट…


इंदौर। हे स्वामी नमोस्तु, हे स्वामी नमोस्तु, हे स्वामी नमोस्तु, नमोस्तु, नमोस्तु से गूंज उठी थी अयोध्या नगरी। मंगलमय प्रसंग था धर्म नगरी इंदौर के गांधी नगर में चल रहे ढाईदीप जिनायतन के पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के पांचवे दिन मुनिराज ऋषभदेव के प्रथम आहार दान का, जहां राजा श्रेयांस परिवार ने नवधा भक्ति भाव पूर्वक इक्षुरस का आहार देकर अपना नर भव सफल किया। मंगल महोत्सव में बड़ी संख्या में बड़ामलहरा, छिन्दवाड़ा, दमोह, जबलपुर, भोपाल से पहुंचे जैन बन्धु धर्म लाभ ले रहे हैं।

महोत्सव के मीडिया प्रभारी प्रद्युम्न फौजदार, दीपकराज जैन एवं महामंत्री एस. पी. भारिल्ल ने बताया कि प्रातःकाल की मंगल बेला पर बड़ी संख्या में श्रावक – श्राविकाओं ने श्री जिनेन्द्र पूजन विधान कर गुरुदेवश्री के मांगलिक के साथ डॉ. हुकमचन्दजी भारिल्ल के श्रीमुख से आहार दान का स्वरूप जाना तो पं. राजेंद्र कुमारजी जैन द्वारा मनुष्य भव की सार्थकता सहित बा. ब्र.श्रेणिक जैन जबलपुर से परम पवित्र जिनशासन का सच्चा स्वरुप जानकर मंगल प्रवचनों का लाभ लिया। सभी वक्ताओं ने दिगम्बर महामुनिराजों का गुणगान कर उनके द्वारा रचित जिनवाणी के स्वाध्याय का महत्व बताया, जिसको सुनकर श्रावकगणों ने भक्त से भगवान बनने की कला सीखी। महोत्सव का सफल मंच संचालन पं. अभय कुमार शास्त्री, संजय शास्त्री जेबर एवं डॉ. विवेक शास्त्री द्वारा किया गया।

प्रवचनों के पश्चात प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्रह्मचारी अभिनन्दन शास्त्री द्वारा ढाईदीप जिनायतन में विराजमान होने वाले 1164 जिनबिम्बों में मंत्रोचारण के साथ अंकन्यास विधि आदि अंतरंग क्रियाएं एवं प्राण प्रतिष्ठा विधि की।

जिनवाणी एवं मंगल कलश शोभायात्रा निकली 

अयोध्या नगरी से मंगल कलशों के साथ जिनवाणी शोभायात्रा निकाली गई, जो नवीन जिन मंदिर ढाईद्वीप जिनायतन पहुंची जहां माता-बहनों द्वारा जिनवाणी एवं श्रावकगणों द्वारा वेदी सहित शिखर पर मंगल कलश की स्थापना की गई।

विद्वत संगोष्ठी का हुआ आयोजन 

पंचकल्याणक महोत्सव के महत्व पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसका संचालन पं. धर्मेंद्र जैन कोटा ने किया एवं अध्यक्षता सहप्रतिष्ठाचार्य पं. रमेशचंद बांझल ने की। जिसमें पं. सुनील जैनापुरे, डॉ. विवेक जैन सहित अन्य वक्ताओं ने विचार रखे।

संध्या के समय श्री जिनेन्द्र भक्ति कर मां जिनवाणी का रसास्वादन किया गया। इसके पश्चात कुंदकुंद कहान शासन प्रभावना ट्रस्ट द्वारा ढाईद्वीप के स्वप्न दृष्टा जिनशासन मुकेश जैन सहित तत्वज्ञान के प्रचार प्रसार में अपना विशिष्ट योगदान देने वाले विशिष्ट विद्वतगण सर्वश्री बाबू जुगलकिशोरजी जैन कोटा, अध्यात्मरत्नाकर पं. रतनचंद भारिल्ल जयपुर, पं. ज्ञानचन्दजी जैन विदिशा, डॉ. उत्तमचन्दजी जैन छिन्दवाड़ा, पं. वीरेंद्र कुमार जैन आगरा, पं. चेतनभाई शाह राजकोट का मरणोपरान्त सम्मान कर उनके उपकार को याद किया गया।

अहमेक्को खलु शुद्धो का सुंदर चित्रण 

सांस्कृतिक कार्यक्रमों के अंतर्गत आध्यात्मिक सतपुरुष गुरुदेवश्री कानजी स्वामी के जीवन पर आधारित नाटक अहमेक्को खलु शुद्धो का सुंदर मंचन किया गया, जिसकी सभी ने सराहना की।

स्टालों पर उमड़ी भीड़ 

महोत्सव स्थल अयोध्या नगरी ढाईद्वीप परिसर में जिनवाणी प्रचार प्रसार सहित अतिथियों के स्वागत सत्कार सहित सुविधा हेतु विविध स्टाल लगाए गए, जहां गर्जतो ज्ञायक परिवार मुम्बई द्वारा बोलता समयसार, टोडरमल स्मारक ट्रस्ट, वर्धमान श्रुत प्रभावना केंद्र अमायन, परमागम होनोर्स, जिनवाणी संवर्धन केंद्र सहित सर्वोदय अहिंसा,तीर्थधाम सिद्धायतन द्रोणगिरि के स्टाल पर स्वाध्याय हेतु साहित्य उपलब्ध कराया गया।सत्पथ फाउंडेशन नागपुर द्वारा तत्वप्रचार हेतु सत्पथ स्टाल लगाया गया जहां ग्रँथराज रत्नकरण्ड श्रावकाचार सत्पथ प्रश्नमंच सीजन 2 का रजिस्ट्रेशन किया गया।

बुधवार को ज्ञानकल्याणक में लगेगा समवशरण 

महोत्सव अध्यक्ष विपिन शास्त्री ने बताया कि माघ शुक्ल चतुर्थी बुधवार 25 जनवरी के शुभ दिन ज्ञान कल्याणक महोत्सव मनाया जाएगा, जिसका शुभारंभ प्रातः 7 बजे श्री जिनेन्द्र पूजन विधान से होगा। इसके पश्चात मंगल प्रवचन, विद्धवत संगोष्ठी, समवशरण रचना, दिव्यध्वनि प्रसारण, सम्मान समारोह सहित आभार प्रदर्शन का आयोजन किया जाएगा।

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