श्रीमहावीरजी महामस्तकाभिषेक समाचार

समाज से उठ रही मांग, सबको मिले अभिषेक का अवसर, निमंत्रित किए जाएं अन्य साधु

श्री दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र महावीरजी में 24 वर्ष बाद हो रहे महामस्तकाभिषेक मे भगवान महावीर की प्राचीन प्रतिमा के अभिषेक का अवसर सभी को दिए जाने की मांग अब समाज से उठने लगी है। समाजजनों में वहां की व्यवस्थाओं और अभिषेक के लिए कम 81 हजार रूपए की राशि निर्धारित किए जाने और आसपास विहार कर रहे साधुओं को निमंत्रित नहीं किए जाने को लेकर रोष की स्थिति बनती जा रही है और इसे लेकर समाज के विभिन्न वॉट्सएप ग्रुपों और सोशल मीडिया पर आयोजन कमेटी की आलोचना की जा रही है|

हाल में फिरोजाबाद जैन हेल्प ग्रुप से जुडे सिद्ध स्वरूप जैन ने इसे लेकर यूट्यूब पर एक लम्बा वीडियो जारी किया है। इसमें वे कह रहे हैं कि 24 वर्ष बाद हो रहे इतने बडे आयोजन को वहां की कमेटी ने अपनी मनमानी का साधन बना लिया है। भगवान का अभिषेक वही व्यक्ति कर सकता है, सिके पास 81 हजार रूपए हों जो कोई छोटी राशि नहीं है। ऐसे मे एक बहुत बडा वर्ग भगवान के अभिषेक से वंचित है। वहीं भगवान के दर्शन भी शाम छह बजे बाद ही करने दिए जा रहे हैं। अभिषेक-शांति धारा करते समय दर्शन तक नहीं करने दिए जा रहे हैं।

जैन का कहना है कि यह सही है कि मंदिर मंे जगह कम है, लेकिन व्यवस्था बनाई जाए तो यह काम आसानी से हो सकता है। उन्होंने कहा कि जो अभिषेक नहीं कर सकते हैं उन्हें कम से कम भगवान के चरण छूने की अनुमति तो मिलनी ही चाहिए, लेकिन वह भी नहीं करने दिया जा रहा है।

जैन का कहना है कि महामस्तकाभिषेक में दूर-दूर से लोग आ रहे हैं, लेकिन उन्हें निराश होकर लौटना पड रहा है। इस बारे में जब उन्होंने कमेटी वालों से बात की तो वो सुनने को तैयार नहीं है। उनका कहना है लोगों को भोजन और नाश्ता फ्री कराया जा रहा है। जैन ने कहा कि लोग वहां भोजन और नाश्ता करने नहीं जा रहे है। प्राचाीन प्रतिमा के दर्शन और अभिषेक करने जा रहे हैं।

जैन ने बताया कि वहां धर्मशालाओं में कमरे खाली हैं, लेकिन लोगों को टैंट में रूकने को कहा जा रहा है। यही नहीं कमेटी ने आसपास विहार कर रहे साधुओं को भी निमंत्रित नहीं किया है, जबकि अन्य सारी व्यवस्थाओं पर जम कर पैसा खर्च किया जा रहा है। कमेटी के पास पैसा काफी मात्रा में आ भी रहा है, लेकिन ना जाने कमेटी इस पैसे का क्या करेगी।

जैन का कहना है कि हम कमेटी से कोई हिसाब नहीं चाहते, लेकिन कम से कम इतना तो किया ही जा सकता है कि अभिषेक करने के लिए दान की राशि कम की जाए ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को इसका मौका मिल सके और जो लोग फिर भी अभिषेक नहीं कर पा रहे हैं, उन्हें दर्शन और भगवान के चरण स्पर्श करने का अवसर दिया जाए। इसके साथ ही आसपास विहार कर रहे सभी साधुओं को इस महान अवसर का साक्षी बनाया जाए।
इस तरह की मांग और चर्चाएं देश भर मंे समाज के वॉट्सएप ग्रुपों और सोशल मीडिया पर चल रही है।

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