गिरनार जी को दत्तात्रेय पर्वत बताने का विरोध
जयपुर । भगवान नेमीनाथ की मोक्ष स्थली गुजरात स्थित गिरनार पर्वत को गुजरात के पर्यटन आयुक्त ने दत्तात्रेय पर्वत बता दिया है। इससे सम्पूर्ण जैन समाज मंे रोष व्याप्त है। इसी सम्बन्ध में जयपुर के डॉ निर्मल जैन ने गुजरात के पर्यटन आयुक्त को विरोध पत्र लिखा है।
डॉ निर्मल जैन नेशनल रोड सेफ्टी काउंसिल के सदस्य हैं उन्होंने गुजरात के पर्यटन आयुक्त आलोक पाण्डे को लिखे पत्र में कहा है कि जैन समाज अंहिसक, सहिष्णु और प्रतिष्ठित समाज है। पूरे देश मंे इसका महर्ती आािर्थक योगदान है और यह समाज देश की सभी जातियांे के लिए काम करता है, इसलिए इसकी भावनाओं को ठेस पहुंचाने का काम ना करें।
निर्मल जैन ने लिखा है कि नेमीनाथ भगवान और अनेक संतों की मोक्ष स्थली गिरनार पर्वत को दत्तात्रेय पर्वत बता देना ना केवल पौराणिक मान्यताओं, एतिहासिक और धार्मिक तथ्यों अपितु विभिन्न न्यायालयों द्वारा दिए गए निर्णयों के भी विपरीत है। आदि अनादि काल से गिरनार पर्वत जैन अनुयायियों के लिए सम्मेद शिखर पर्वत के समान ही बेहद पवित्र व पूजनीय है।
निर्मल जैन ने कहा है कि भगवान दत्तात्रेय के अनुयायियों द्वारा कुछ ही दशक पूर्व वहां पर कब्जा किया गया है और वहां कब्जा किए बैठे पुजारी पंडे जैन तीर्थयात्रियों के साथ दुर्व्प्यवहार और मारपीट करते हैं। पर्वत पर जैन साधुओं के साथ तक मारपीट होती है।
निर्मल जैन का कहना है कि पर्यटन आयुक्त द्वारा गिरनार पर्वत को दत्तात्रेय पर्वत बताने से जैन समाज सहमत नहीं है और इसका विरोध करता है।












