– बाल ब्रम्हचारीणी दीप्ति दीदी का नाम- आर्यिका पद्मयशा मति माताजी ।
– ब्रम्हचारीणी साधना दीदी का नामकरण हुआ- आर्यिका निर्मोह मति माताजी
सनावद @सन्मति जैन । सिद्धक्षेत्रों के मुहाने एवं तपस्वीयों की पावन भूमि सनावद नगरी की बाल ब्रम्हचारीणी दीप्ति अविनाश जैन (26) और सनावद के ही तिलोकचंद पंचोलिया की पुत्री महेश्वर में शरद कंठाली से ब्याही सात प्रतिमाधारी साधना दीदी (62) वैराग्य पथ पर अग्रेषित हुई। आपकी आर्यिका दीक्षा अतिशय क्षेत्र श्री महावीर जी राजस्थान में 5 अक्टूबर दशहरे के दिन दिगम्बर जैन संत पंचम पट्टाधीस आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के कर कमलों से संपन्न हुई। इस दीक्षा महा महोत्सव कार्यक्रम में पूर्व- पश्चिम निमाड़ सहित मालवा और देश भर के अन्य प्रांतों के धर्मावलंबियों ने भाग लेकर पुण्यार्जक बनने का अमूल्य सौभाग्य प्राप्त किया।

दीक्षा कार्यक्रम में शामिल हुए खंडवा के संजय पंचोलिया ने श्री महावीर जी से इस भव्य जैनेश्वरी दीक्षा के अद्भुत पलों के विषयक बताया कि आचार्य वर्धमान सागर जी चातुर्मास व्यवस्था समिति महावीर जी द्वारा शांतिवीर नगर महावीर जी में यह भव्य आयोजन किया गया। जिसमें 4 आर्यिका दीक्षाएं संपन्न हुई। गृहस्थ जीवन का वैभव छोड़ त्याग, नियम, संयम के मार्ग पर दीक्षार्थी बाल ब्रम्हचारीणी दीप्ति दीदी सनावद, ब्रम्हचारीणी साधना दीदी महेश्वर , बाल ब्रम्हचारीणी नेहा राकेश जैन (36) दिल्ली और बाल ब्रम्हचारीणी पूनम स्व. निर्मल जैन (26) कोटा ने जैन धर्म की जय, अहिंसा परमों धर्म की जय के गगन चुंभी नारों के बीच हजारों लोगों की मौजूदगी व आचार्य संघ की मंगलमय उपस्थिति में रत्न्त्रय के मार्ग पर चलने के लिए खुशी खुशी आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज से जैनेश्वरी आर्यिका दीक्षा ग्रहण कर नया नाम पाया।

दीक्षा के लिए प्रातः काल चोक पाट लगाकर दीक्षार्थीयों का मंगल स्नान कराया गया। उन्हें पहनने के लिए शुद्ध श्वेत वस्त्र दिए गए। अतिशय क्षेत्र पर उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं ने सुबह बैंडबाजों के साथ धूमधाम से दीक्षार्थीयों को जिन मंदिरों के दर्शन कराए। दर्शन के बाद उन्हें शांतवीर नगर दीक्षा मंडप में लाया गया। दीक्षा की प्रारंभिक क्रियाएँ 11.35 बजे से मुनि श्री 108 हितेन्द्र सागर जी महाराज व पंडित महावीर जी जोबनेर ने शुरू की। पाण्डुक शीला पर विराजित त्रिलौकीनाथ भगवान महावीर स्वामी का सभी दीक्षार्थीयों ने रजत कलशों से पंचामृत अभिषेक किया।मंच पर विराजित वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री 108 वर्धमान सागर जी महाराज व संघ का सभी दीक्षार्थीयों ने आशीर्वाद लिया और गुरूचरणों में दीक्षा के लिए निवेदन किया। आचार्य महाराज ने दीक्षार्थीयों से जैनेश्वरी दीक्षा प्राप्त करने के लिए पूछा। हां कि स्वीकृति मिलने के बाद संघ व जन समुदाय की अनुमति के साथ दीक्षार्थीयों के पंचमेष्ठी केश लोचन शुरू कर शांति मंत्रों की ब्रम्ह ध्वनि के साथ मंगल द्रव्यों से शुद्धि की गई।
दीक्षा संस्कार ठीक 12.48 बजे से आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने शुरू किए। 108 बार मंत्रों से संस्कार दिए गए। तत्पश्चात मंत्रोच्चार के साथ अंजलि में श्रीकार लिखकर चावल एवं श्रीफल से वृत दान किया गया। संघ के नियम व परंपराओं के पालन की स्वीकारोक्ति ली गई। इसके बाद मस्तक के ऊपर अंतरंग और बहिरंग लक्ष्मी का प्रतीक श्रीकार बनाकर लौंग रखे गए। 5 महावृतों व 28 मूलगुणों का आरोपण कर 16 प्रकार के मंत्रों द्वारा सोड्स संस्कार संस्थापित किए गए। वर्धमान मंत्र के मंगल मंत्रोच्चार आचार्य श्री ने उच्चारित किए। इसके बाद नामकरण संस्कार में सभी दीक्षार्थीयों को नए नाम दिए गए। नामकरण होते ही दीक्षा मंडप भगवान महावीर और आचार्य वर्धमान सागर महाराज के जयकारों से गूँज उठा।

दीप्ति दीदी- आर्यिका पद्मयशा मति माताजी , साधना दीदी- आर्यिका निर्मोह मति माताजी , नेहा दीदी- विश्व यशा मति माताजी , पूनम दीदी- दिव्य यशा मति माताजी के नाम से अब पहचानी जावेगी।
सभी नवदीक्षितों को पिच्छी एवं शास्त्र भेंट कर कमंडल उपकरण देने का सौभाग्य परिजनों को प्राप्त हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ दिल्ली के हर्षित जैन के मंगलाचरण से हुआ। पूर्वाचार्य आचार्य शांतिसागर जी के चित्र का अनावरण विमल कुमार, महेन्द्र कुमार, समर्थ पाटनी उरसेवा राज. ने किया। दीप प्रज्वलन का सौभाग्य संजय कुमार- पुनीत कुमार पापड़ीवाल किशनगढ़ को मिला। जबलपुर के संगीतकार प्रशांत जैन एवं टीम ने भक्ति संगीत में सुमधुर भजनों की प्रस्तुतियां देकर मंच संचालन किया। दीक्षा के दौरान इंद्र देव ने भी अनुमोदना करते हुए खूब अमृत बरसाया।
आयोजन समिति के अध्यक्ष राजकुमार सेठी, संयोजक राजेश सेठी, ट्रस्ट अध्यक्ष हजारी लाल पंड्या मंचासीन रहे ।
कार्यक्रम में ललित सुधीर जैन, देवेंद्र बडूद, नरेन्द्र जटाले, विवेक कंठाली, वीरेन्द्र जैन, वीरेंद्र मुंशी, संतोष मामा, प्रदीप पंचोलिया, पूनाजी मंडलोई, रिंकेश जैन, प्रशांत जैन, निखलेश जैन, कुसुम काका, देवेंद्र सराफ, कांतिलाल जैन, अतुल जैन, देवेंद्र शाह, अजय पंचोलिया, बावन पाटनी, कमल कल्याण जैन, भला जी खोदरिया मोंगावां, हरिकरण सिंगोनिया, जीवन लाल मुकाती, पुष्पा जटाले, शिशुबाला जैन, सुनील जंबूदीप, पवन मास्टर , अनुभव जैन सहित निमाड़- मालवा व देशभर के चार हजार से ज्यादा धर्मावलंबियों ने धर्म सभा में भाग लेकर पुण्यार्जक बनने का सौभाग्य प्राप्त किया।।

{ आज से 53 वर्ष पूर्व सनावद (मप्र.) के गृहस्थ 19 वर्षीय युवा यशवंत कमलचंद पंचोलिया ने इसी शांतिवीर नगर महावीर जी में 24 फरवरी सन् 1969 में आचार्य श्री धर्म सागर जी महाराज से मुनि दीक्षा लेकर वर्धमान सागर नाम पाया था। सौभाग्य ही है कि दशकों के लम्बे अंतराल के बाद इसी स्थान पर यशवंत से वर्धमान बने आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज ने 4 जैनेश्वरी आर्यिका दीक्षाएं प्रदान की हैं। }

समाचार एवं फोटो- दीक्षा स्थल श्री महावीर जी राजस्थान से हमें संजय पंचोलिया ने प्रेषित किया है।












