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संयम के पथ पर आगे बढ़ीं नेहा दीदी

मुरैना. मनोज नायक। संयम के पथ पर अग्रसर दीक्षार्थी बहिन नेहा दीदी की भव्य बिंदौरी यात्रा एवं गोद भराई महोत्सव हर्षाेल्लास पूर्वक मनाया गया। दीक्षार्थी बहिन नेहा दीदी ने परम पूज्य गुरुदेव सिंहरथ प्रवर्तक, पंचम पट्टाचार्य विद्याभूषण सन्मतिसागर जी महाराज से आजीवन व्रह्मचर्य व्रत धारणकर संयम के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया था। बहिन नेहा दीदी काफी समय से परम पूज्य आर्यिका सृष्टिभूषणमति माताजी के संघ में रहकर साधना कर रहीं हैं। नेहा दीदी का सपना अब पूरा होने जा रहा है। विजयादशमी 5 अक्टूबर को अतिशय क्षेत्र महावीर जी में परम पूज्य आचार्य श्री वर्धमानसागर जी महाराज से जैनेश्वरी दीक्षा ग्रहणकर वे मोक्षमार्ग की ओर अग्रसर होंगीं।

बिंदौरी यात्रा के अंतर्गत सर्वप्रथम नेहा दीदी ने ज्ञानतीर्थ पहुँचकर परम पूज्य गुरुदेव सराकोद्धारक समाधिस्थ षष्टपट्टाचार्य श्री ज्ञानसागर जी महामुनिराज के श्रीचरणों में श्रीफल अर्पित किया। ज्ञानतीर्थ पर क्षुल्लिका अक्षतमति माताजी के सान्निध्य में गोद भराई के समय भक्ति गीतों पर महिलाओं ने नृत्य प्रस्तुत किए। दीक्षा से पूर्व संस्कारों में बिंदौरी यात्रा एवं गोद भराई का विशेष महत्व है। इसी संस्कार के तहत संस्कारधानी, धर्मनगरी मुरेना में श्री चन्द्रप्रभु पल्लीवाल जैन मंदिर से विशाल एवं भव्य बिंदौरी यात्रा निकाली गई। शोभायात्रा प्रारम्भ होने से पूर्व नेहा दीदी ने श्री 1008 चन्द्रप्रभु भगवान की वन्दना की ।


बिंदौरी शोभायात्रा में दीक्षार्थी बहिन नेहा दीदी मुकुटहार से सुसज्जित होकर बग्घी में सवार थीं। शोभायात्रा में सैकड़ों की संख्या में महिलाएं एवं पुरुष मंगलगान करते हुई चल रहे थे। यात्रा नगर भ्रमण करते हुए श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन पंचायती बड़ा मन्दिर पहुँची ।
बड़े जैन मंदिर में मंगलाचरण एवं भजनों के साथ गोद भराई का कार्यक्रम प्रारंभ हुआ। मंचासीन दीक्षार्थी बहिन के साथ ब्रह्मचारिणी बहिन सर्वश्री अनिता दीदी, मंजुला दीदी, आदि दीदी-बड़ौत, चन्दोबाई, शकुंतला, रामकली, कुसुम मोदी-बबीना विराजमान थीं।

सर्वप्रथम ब्रह्मचारिणी बहिन अनीता दीदी ने दीक्षार्थी बहिन का परिचय देते हुए बिंदौरी, गोद भराई एवं दीक्षा के महत्व को समझाते हुए सारगर्भित विचार व्यक्त किए। पारस जैन एवं मनीष जैन ने जिन भक्ति से ओतप्रोत भजनों से सभी को मंत्रमुग्ध किया। कार्यक्रम में उपस्थित सभी साधर्मी बन्धुओं, माता-बहिनों ने पंच मेवा से गोद भराई करते हुए उनके सफल, निर्विघन संयम मार्ग की अनुमोदना की।

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