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अज्ञानी और ईर्ष्यालु ही सही कार्य का निषेध करते हैंः मुनि श्री आदित्य सागर जी

न्यूज़ सौजन्य-राजेश जैन दद्दू

इंदौर। राग- द्वेष के वशीभूत यह जीव संसार में परिभ्रमण कर रहा है। अंतरंग में विवेक का जागरण होने पर ही राग- द्वेष की निवृत्ति होगी, अज्ञान का अभाव होगा एवं विवेक जागृत होगा। यह उद्गार सोमवार को समोसरण मंदिर, कंचन बाग में मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज ने प्रवचन देते हुए व्यक्त किए। आपने कहा कि मेरे लिए क्या उपयोगी और क्या अनुपयोगी है यह जानकर अपने उपयोग को सम्यक क्रिया, स्वाध्याय, दान, पूजा, भक्ति, विधान, जाप आदि शुभोपयोग कार्य में लगाएं ताकि कर्मों की निर्जरा हो। मीडिया प्रभारी राजेश जैन दद्दू ने बताया कि धर्मसभा का संचालन हंसमुख गांधी ने किया।

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