सिद्धक्षेत्र कुण्डलपुर में 26 जुलाई को निर्यापक श्रमण मुनि श्री समतासागर जी महाराज ससंघ की ऐतिहासिक भव्य मंगल अगवानी होगी। चातुर्मास 2026 को लेकर क्षेत्र समिति एवं श्रद्धालु व्यापक तैयारियों में जुटे हैं। पढ़िए श्रीफल साथी राजीव सिंघई की यह रिपोर्ट।
कुण्डलपुर (दमोह)। सुप्रसिद्ध सिद्धक्षेत्र कुण्डलपुर में वर्ष 2026 का चातुर्मास ऐतिहासिक बनने जा रहा है। विश्व वंदनीय समाधि सम्राट संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज एवं आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से परम पूज्य निर्यापक श्रमण मुनि श्री समतासागर जी महाराज ससंघ (4 पिच्छी) तथा परम पूज्य ऐलक श्री चैत्यसागर जी महाराज ससंघ (6 पिच्छी) का पावन चातुर्मास आयोजित होगा।
26 जुलाई को होगी भव्य मंगल अगवानी
प्रचार मंत्री जयकुमार जैन जलज ने बताया कि ऐलक श्री चैत्यसागर जी महाराज ससंघ का मंगल आगमन 19 जुलाई को कुण्डलपुर हो चुका है। अब 26 जुलाई, रविवार को दोपहर में निर्यापक श्रमण मुनि श्री समतासागर जी महाराज ससंघ की भव्य मंगल अगवानी की जाएगी, जिसमें देशभर से श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।
तैयारियों में जुटी चातुर्मास समिति
कुण्डलपुर क्षेत्र कमेटी के अध्यक्ष चंद्रकुमार जैन सराफ के नेतृत्व में चातुर्मास समिति के संयोजक इंजीनियर आर.के. जैन, सहसंयोजक पदमचंद जैन (खली वाले), समिति के सभी प्रभारी, मुनि सेवा समिति, क्षेत्र कमेटी के पदाधिकारी, सदस्य, कुण्डलपुर स्टाफ तथा दमोह जिले के श्रद्धालु तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।
शोभायात्रा के रहेंगे विशेष आकर्षण
अगवानी प्रभारी मनोज जैन मीनू एवं उनकी टीम ने बताया कि शोभायात्रा में ग्राम मुड़िया का विशेष बैंड दल, 8 अश्वों पर धर्मध्वज लिए वीरांगना बहनों की प्रस्तुति, 11 भव्य बग्गियाँ, दमोह की प्रसिद्ध रमतूला टीम, आकर्षक डीजे रथ, 51 धर्मध्वजों की टोली, पुष्पवर्षा रथ, दलदल घोड़ी, अखाड़ा दल, गौरझामर एवं देवरी के दिव्य घोष दल सहित अनेक सांस्कृतिक एवं धार्मिक आकर्षण शामिल रहेंगे।
देशभर से उमड़ेगा श्रद्धालुओं का सैलाब
दमोह जिले के विभिन्न नगरों एवं ग्रामों के महिला मंडल, युवा मंडल, सामाजिक संगठन तथा देश के विभिन्न राज्यों से आने वाले श्रद्धालु इस ऐतिहासिक अगवानी में भाग लेकर धर्म प्रभावना का संदेश देंगे। आयोजन में धार्मिक आस्था, भक्ति और सांस्कृतिक वैभव का अनूठा संगम देखने को मिलेगा।
चातुर्मास बनेगा आत्मजागरण का केंद्र
समिति के अनुसार कुण्डलपुर का यह चातुर्मास संयम, समता, आत्मजागरण और धर्म साधना का केंद्र बनेगा। श्रद्धालुओं को मुनि संघ के सान्निध्य में प्रवचन, स्वाध्याय और आत्मकल्याण का अनुपम अवसर प्राप्त होगा।













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