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सीकर में आचार्यश्री वर्धमानसागर जी संघ की हुई भावभीनी अगवानी: आचार्य श्री धर्म सागर जी की समाधि स्थली एवं शिष्या श्री शांति मति की जन्मभूमि पर आचार्य संघ का मंगल पदार्पण 


आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का 58 वां वर्षायोग सीकर में करने के लिए मंगल पर्दापण 23 जुलाई को 36 साधुओं सहित (37पिच्छी ) हुआ। यहां आचार्यश्री वर्धमानसागर जी संघ की भावभीनी अगवानी हुई। सीकर से पढ़िए, डॉ. राजेश पंचोलिया की यह खबर…


सीकर। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का 58 वां वर्षायोग सीकर में करने के लिए मंगल पर्दापण 23 जुलाई को 36 साधुओं सहित (37पिच्छी ) हुआ। यहां आचार्यश्री वर्धमानसागर जी संघ की भावभीनी अगवानी हुई। श्री आदिनाथ(3), श्री पदमप्रभ, (1) श्री चंद्रप्रभ(2), श्री शांतिनाथ (2), श्री पार्श्वनाथ(2), श्री महावीर भगवान(1) के जिनालयों से सज्जित आचार्य श्री धर्म सागर जी सहित अन्य की समाधि स्थली, आचार्य श्री वर्धमान सागर से दीक्षित समाधिस्थ आर्यिका श्री शांतिमति जी सहित अन्य की जन्म कर्मभूमि, आचार्य श्री अजित सागर जी सहित अनेकों की दीक्षा स्थली, पूर्वाचार्यों की श्री शिव सागर जी से वर्तमान आचार्य की चरण रज से पवित्र धर्म नगरी सीकर में परंपरा के आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का 58 वां वर्षायोग सीकर में करने के लिए मंगल पर्दापण 23 जुलाई को 36 साधुओं सहित (37पिच्छी ) हुआ।

संघ में यह साधुवृंद शामिल 

आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के साथ मुनि श्री हितेंद्रसागरजी श्री प्रभवसागरजी ,श्री चिंतनसागरजी श्री दर्शितसागरजी, श्री प्रबुद्ध सागरजी, श्री मुमुक्षुसागरजी, श्री प्रणीतसागरजी, श्री ध्येयसागरजी श्री भुवन सागरजी, श्री गुणोदय सागरजी, आर्यिका श्री शुभमति, श्री चैत्यमति, श्री विलोकमति, श्री दिव्यांशुमति, श्री पूर्णिमामति, श्री मुदितमति, श्री विचक्षणमति, श्री समर्पितमति, श्री निर्मुक्त मति, श्री विनम्रमति, श्री दर्शनामति, श्री देशनामति, श्री महायशमति, श्री देवर्धिमति, श्री प्रणतमति, श्री निर्माेहमति, श्री पद्मयशमति, श्री दिव्ययशमति, श्री प्रेक्षामति, श्री जिनेशमति, ऐलक श्री हर्षसागरजी क्षुल्लक श्री प्राप्तिसागरजी ,क्षु श्री सुभग सागरजी, क्षु श्री सुगुप्त सागर जी क्षु श्री प्रतिज्ञा सागर जी, 37 क्षुल्लिका श्री प्रदीप्त मति जी, आचार्य श्री, 10 मुनिराज, 20 आर्यिका, 1 ऐलक, 4 क्षुल्लक 1 क्षुल्लिका 36 साधु सहित 37 पिच्छी हैं।

राग द्वेष मोह आत्मा पर लगे सबसे बड़े रोग

आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने कहा कि राग, द्वेष, मोह आत्मा पर लगे सबसे बड़े रोग हैं। इस कारण आप दुखी है। समता और साम्य भाव सबसे बड़ा धन है। उन्होंने कहा कि सीकर समाज ने काफी वर्षों तक प्रतीक्षा की। नगर प्रवेश में अनेक चिकित्सालय और विद्यालय देखे। चिकित्सालय में रोगों का इलाज और विद्यालय में लौकिक शिक्षा विद्या का अध्ययन कराया जाता है। सर्व समाज रोगी है। इलाज सभी चाहते हैं। सबसे बड़ा रोग जन्म मरण का है। यह रोग दूर करने के लिए सबसे बड़ा चिकित्सालय आचार्य संघ आपके नगर में आया है। आपकी आत्मा पर कर्म बंध कारणभूत रोग है। आचार्यश्री वर्धमानसागर जी ने कहा कि सबसे बड़े 3 रोग, राग, द्वेष और मोह है। इन्हें दूर करने के लिए ही आचार्य संघ आया है। यह मंगल धाम देशना सीकर नगर में प्रवेश के अवसर पर श्री धर्मसागर सभागृह में आयोजित धर्म सभा में प्रथम दिवस आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने प्रकट की।

समाधि का अर्थ समता रूपी परिणाम होना

डॉ. राजेश पंचोलिया और विवेक पाटोदी के अनुसार आचार्य श्री ने आगे बताया कि रोग दूर होने पर आत्मा सूखी होती है। सभी का शरीर पर्याय बदलता है। जिस प्रकार आप आत्मा के भाव परिणाम कर्म करते हैं उसके अनुसार आयु का बंध होता है। अनेक की अल्पायु होती है। बालक, युवा वृद्धावस्था,जन्म मरण का चक्र चलता रहता है। सीकर हमारे दीक्षागुरु आचार्य श्री धर्म सागर जी की समाधि भूमि है। समाधि का अर्थ समता रूपी परिणाम होना। सीकरवासी साक्षी है कि आचार्य श्री धर्म सागर जी के जीवन में कितनी, किस प्रकार की समता थी। समता ही सबसे बड़ा धन है। साम्य भाव रूपी धन है आचार्य धर्म सागर जी में समता साम्यभाव रहा है।

इन्होंने लिया सौभाग्य

संघ में अनेक साधु है सभी ज्ञानवान है ,सभी के उपदेश से ज्ञान का प्रसाद मिलेगा समाज में उत्साह, साहस और भक्ति होना चाहिए साधुओं के उपदेश मार्गदर्शन से अपने मनुष्य जीवन को सार्थक करने का प्रयास करें। समाज के पदाधिकारियों ने बताया कि आचार्य संघ के मंचासीन होने पर चित्र अनावरण, दीप प्रवज्जलन, मंगलाचरण पश्चात आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन का सौभाग्य राजकुमार चंदा देवी भरतिया परिवार सीकर, जिनवाणी भेंट करने का सौभाग्य ऋषभ, बबीता सेठी तथा महाआरती का सौभाग्य पूरणमल, अजीत, आशीष जयपुरिया परिवार सीकर ने प्राप्त किया।

 अनेक समाधि स्थली

सीकर में आचार्य श्री धर्मसागर जी,आचार्य श्री विवेकसागर जी ,आर्यिका श्री विद्यामति सहित अनेक साधुओं की पूर्व वर्षों में समाधि हुई है।

  साधुओं जन्म नगरी 

सीकर से पूर्व में अनेक भव्य आत्माओं ने संयम वैराग्य दीक्षा धारण कर अपने जीवन को कृतार्थ किया है। जिसमें प्रमुख है आचार्य श्री से दीक्षित शिष्या नगर की भगवानी देवी जिनेंद्र जयपुरिया ने 2 नवंबर 2022 को महावीर जी में आर्यिका दीक्षा ली। इसके पूर्व उन्होंने 4 अगस्त 2022 को महावीर जी में ही क्षुल्लिका दीक्षा भी आचार्य श्री से ली थी। संलेखना समाधि लेकर महावीर जी में 25 दिनों में मात्र तीन बार जल लेकर 25 नवंबर 2022 का ेउनकी उत्कृष्ट समाधि आचार्य श्री के सानिध्य में हुई। नगर की दाखा देवी की पुत्री वरग देवी ने आचार्य श्री धर्म सागर जी से सन 1976 मुजफ्फरनगर में आर्यिका दीक्षा लेकर आर्यिका श्री चेतन मति बनी। इनके अतिरिक्त अनेको ने दीक्षा ली।

आचार्य श्री अजित सागर जी सहित अनेकों की दीक्षा स्थली

आचार्य श्री शिव सागर जी ने संवत 2018 सन 1961 में चातुर्मास कर श्री अजीत सागर जी को मुनि, श्री सुपार्श्व सागर जी को क्षुल्लक श्री बुद्धिमती, श्री जिनमती, श्री राजुल मति,श्री संभव मति ,श्री आदिमती को आर्यिका तथा श्री श्रेयांश मति को क्षुल्लिका का दीक्षा सीकर में दी।

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