जैन धर्म में स्वाध्याय को सर्वोच्च तप कहा गया है। इसी भावना के साथ आषाढ़ माह की पवित्र अष्टान्हिका पर्व पर इंदौर के श्रद्धालुओं को आत्मकल्याण का दुर्लभ अवसर प्राप्त होने जा रहा है। श्री दिगंबर जैन कुन्दकुन्द कहान स्वाध्याय भवन, साऊथ तुकोगंज, पलासिया में मंगलवार 21 से आरंभ हुआ। आज पढ़िए, इंदौर डेस्क की यह खबर..
इंदौर। जैन धर्म में स्वाध्याय को सर्वोच्च तप कहा गया है। इसी भावना के साथ आषाढ़ माह की पवित्र अष्टान्हिका पर्व पर इंदौर के श्रद्धालुओं को आत्मकल्याण का दुर्लभ अवसर प्राप्त होने जा रहा है। श्री दिगंबर जैन कुन्दकुन्द कहान स्वाध्याय भवन, साऊथ तुकोगंज, पलासिया में मंगलवार 21 से आरंभ हुआ। यह धार्मिक आयोजन रविवार 26 जुलाई तक 6 दिवसीय दिव्यता के साथ चलेगा। इस आयोजन में मुरादाबाद से पधार रहे विद्वान वक्ता डॉ. पुनीत मंगलवर्धनी अपने ओजस्वी प्रवचनों से धर्म प्रभावना करेंगे।
दोनों समय श्रद्धालु जिनवाणी का लाभ ले सकेंगे
आयोजन समिति के अनुसार प्रतिदिन दो समय प्रवचन होंगे। प्रातः 9:00 बजे से 10:00 बजे तक और रात्रि 8:00 बजे से 9:00 बजे तक। दोनों समय श्रद्धालु जिनवाणी का लाभ ले सकेंगे। “स्वाध्याय: परमं तप:” के सूत्र को आधार बनाकर डॉ. पुनीत मंगलवर्धनी कुन्दकुन्दाचार्य के समयसार, नियमसार और आध्यात्मिक ग्रंथों के गूढ़ रहस्यों को सरल भाषा में समझाएंगे। उनके प्रवचनों का मुख्य उद्देश्य युवाओं और गृहस्थों में स्वाध्याय, स्वानुशासन और वीतरागता के संस्कार जगाना है।
श्रद्धालुओं के लिए सौभाग्य की बात
आषाढ़ माह की अष्टान्हिका जैन समाज में ज्ञान, भक्ति और तप का पर्व मानी जाती है। इन 8 दिनों में उपवास, स्वाध्याय, जप और सामूहिक आराधना से आत्मशुद्धि की जाती है। ऐसे पावन अवसर पर विद्वान संतों के सान्निध्य में प्रवचन होना श्रद्धालुओं के लिए सौभाग्य की बात है।
धर्मप्रेमी बंधुओं से अपील
इस धर्मसभा के आयोजक विजय बड़जात्या, चेयरमेन और पदम पहाड़िया सेक्रेटरी ने बताया कि स्वाध्याय भवन में सभी व्यवस्थाएं पूर्ण कर ली गई हैं। इंदौर के आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। समिति ने सभी धर्मप्रेमी बंधुओं से अपील की है कि वे परिवार सहित पधारकर इस अष्टान्हिका पर्व का लाभ लें और अपने जीवन में ज्ञान, शांति और संयम को बढ़ाएं। यह आयोजन निश्चित ही इंदौर में धर्म प्रभावना का नया अध्याय लिखेगा।













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