अष्टान्हिका महापर्व के पावन अवसर पर सिद्धक्षेत्र रेशंदीगिरि नैनागिरि में ध्वजारोहण, दीप प्रज्ज्वलन एवं महामस्तकाभिषेक के साथ नौ दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामण्डल विधान महोत्सव का शुभारंभ हुआ। 29 जुलाई तक विभिन्न धार्मिक आयोजन होंगे। पढ़िए श्रीफल साथी रत्नेश जैन रागी की विशेष रिपोर्ट।
बकस्वाहा। अष्टान्हिका महापर्व के पावन अवसर पर सुविख्यात श्री दिगंबर जैन सिद्धक्षेत्र रेशंदीगिरि नैनागिरि में आयोजित श्री सिद्धचक्र महामण्डल विधान महोत्सव का मंगलवार को ध्वजारोहण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ भव्य शुभारंभ हुआ। यह आयोजन ट्रस्ट एवं प्रबंध समिति के तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है, जिसका समापन 29 जुलाई 2026 को विविध धार्मिक कार्यक्रमों के साथ होगा।
विधान महोत्सव का शुभारंभ मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति श्रीमती विमला जैन, सुरेश जैन (आईएएस), भोपाल तथा डॉ. एस.के. जैन, इंदौर ने ब्रह्मचारी विनय भैया जी (भोपाल) की विशेष उपस्थिति में ध्वजारोहण एवं दीप प्रज्ज्वलन कर किया। संपूर्ण धार्मिक विधि पंडित अशोक जैन बम्हौरी ने विधि-विधानपूर्वक सम्पन्न कराई।
प्रातःकाल पर्वतराज स्थित चौबीसी जिनालय में भगवान पार्श्वनाथ का महामस्तकाभिषेक एवं शांतिधारा श्रद्धा और भक्ति के साथ सम्पन्न हुई। प्रथम अभिषेक का सौभाग्य विद्यासागर गुरुकुलम, बैरसिया रोड (भोपाल) के संचालक ब्रह्मचारी विनय भैया जी ने गुरुकुलम के विद्यार्थियों के साथ प्राप्त किया।
इस अवसर पर कमलकुमार–कपिलकुमार देवड़िया (शाहगढ़), आनंद–सुधा चंदेरिया (भोपाल), सुरेश–वर्षा सिंघई (भोपाल), सौरभ–प्राची जैन (नैनागिरि), सौरभ जैन (इंदौर), सुरेशचंद–कपिलकुमार गूगरा (बण्डा), इंजीनियर महेश कुमार जैन (सागर), रजनीश जैन (छिंदवाड़ा) सहित अनेक श्रद्धालु परिवारों ने अभिषेक एवं शांतिधारा का पुण्य लाभ अर्जित किया। महाकलश स्थापना का सौभाग्य उमेशचंद्र जैन (छतरपुर) को प्राप्त हुआ।
सिद्धक्षेत्र रेशंदीगिरि नैनागिरि ट्रस्ट कमेटी के अध्यक्ष सुरेश जैन (आईएएस), मंत्री राजेश जैन रागी, प्रबंध समिति अध्यक्ष डॉ. पूर्णचंद्र तथा मंत्री देवेंद्र लुहारी ने देशभर के श्रद्धालुओं से अष्टान्हिका महापर्व के दौरान नैनागिरि पहुंचकर तीर्थ वंदना, सिद्ध आराधना, महामस्तकाभिषेक, शांतिधारा, प्रवचन एवं महाआरती जैसे धार्मिक आयोजनों में सहभागिता कर धर्मलाभ अर्जित करने का आग्रह किया।
इस अवसर पर तीर्थ परिसर भक्तिमय वातावरण, मंगल ध्वनि एवं जयघोषों से गूंज उठा तथा श्रद्धालुओं ने विश्व शांति, आत्मकल्याण और समस्त जीवों के मंगल की कामना करते हुए सिद्धों की आराधना की।













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