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मुनि श्री पदम सागर जी महाराज ससंघ को चातुर्मास हेतु श्रीफल अर्पित : नेहानगर सागर में धर्म प्रभावना के लिए समाज ने किया विनम्र निवेदन


श्री दिगंबर जैन महावीर मंदिर, नेहानगर सागर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पटेरिया जी पहुंचकर मुनि श्री पदम सागर जी महाराज ससंघ को चातुर्मास हेतु श्रीफल अर्पित कर नेहानगर सागर में वर्षायोग का विनम्र निवेदन किया। पढ़िए श्रीफल साथी मनीष विद्यार्थी की यह रिपोर्ट।


सागर। परम पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री पदम सागर जी महाराज ससंघ को चातुर्मास हेतु श्रीफल अर्पित करने के लिए श्री दिगंबर जैन महावीर मंदिर, नेहानगर मकरोनिया (सागर) से तीन बसों में श्रद्धालु श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र पटेरिया जी (गढ़ाकोटा) पहुंचे। श्रद्धालुओं ने अत्यंत श्रद्धा एवं भक्ति के साथ नेहानगर सागर में चातुर्मास के लिए विनम्र निवेदन किया।

चातुर्मास के लिए किया भावपूर्ण निवेदन

मंदिर समिति के महामंत्री संजय पटवारी, पाठशाला के नन्हे-मुन्ने बच्चों एवं समाज के अनेक श्रद्धालुओं ने मुनि श्री को श्रीफल अर्पित करते हुए कहा कि चातुर्मास के दौरान धर्म प्रभावना के विविध कार्यक्रमों से समाज को आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है। उन्होंने नेहानगर सागर में चातुर्मास का सौभाग्य प्रदान करने का आग्रह किया।

‘हम जैन हैं, बस इतनी हमारी पहचान’

मंगल प्रवचन में मुनि श्री पदम सागर जी महाराज ने कहा कि वर्तमान समय में पंथवाद और संतवाद ने समाज को अनेक भागों में विभाजित कर दिया है। समाज की वास्तविक पहचान केवल “हम जैन हैं” यही होनी चाहिए। सभी को एकता, समरसता और जिनशासन की प्रभावना के लिए कार्य करना चाहिए।

जन्मदिन पर पुण्यार्जन का अवसर

मंदिर समिति के अध्यक्ष निलेश जैन भूसा, अमित जैन मेरठ, मनीष जैन निर्माण जंक्शन तथा महामंत्री संजय पटवारी एवं प्रवक्ता मनीष सेठ ने अपने जन्मदिवस के अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए नाश्ता एवं अन्य व्यवस्थाओं का पुण्यार्जन किया तथा मुनि श्री से मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया।

श्रद्धालुओं ने किए तीर्थ दर्शन

मुनि श्री के मंगल आशीर्वाद प्राप्त करने के उपरांत सभी श्रद्धालुओं ने श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र पटेरिया जी के दर्शन कर धर्मलाभ लिया और प्रसन्नतापूर्वक वापस प्रस्थान किया।

धर्म प्रभावना का संदेश

कार्यक्रम ने समाज में एकता, श्रद्धा एवं धर्म प्रभावना की भावना को सुदृढ़ किया। श्रद्धालुओं ने चातुर्मास के माध्यम से अधिकाधिक धार्मिक गतिविधियों एवं आत्मकल्याण की भावना को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

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