तीर्थ चक्रवर्ती राष्ट्रसंत मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज ससंघ का सारंगपुर में पहली बार भव्य मंगल प्रवेश हुआ। धर्मसभा में गुरुदेव ने मानवीय मूल्यों, अहिंसा और समाजहित के कार्यों को जीवन का वास्तविक धर्म बताते हुए प्रेरणादायी संदेश दिया। पढ़िए श्रीफल साथी राजीव सिंघाई की यह रिपोर्ट।
सारंगपुर (मध्यप्रदेश)। शाजापुर होते हुए इंदौर की ओर विहाररत तीर्थ चक्रवर्ती राष्ट्रसंत मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज ससंघ (18 पिच्छिका) का सारंगपुर में प्रथम बार भव्य मंगल प्रवेश श्रद्धा, भक्ति और जयघोष के बीच सम्पन्न हुआ। नगरवासियों ने शोभायात्रा, गुरु वंदना एवं श्रीफल समर्पण के साथ संघ का आत्मीय स्वागत किया।
मानवीय मूल्यों की रक्षा ही सच्चा धर्म
धर्मसभा में मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज ने कहा कि मानवीय मूल्यों की चिंता करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य ही नहीं, बल्कि उसका धर्म भी है। आज का समय धर्म साधना के लिए अत्यंत अनुकूल है। समाज, शासन और व्यवस्था सभी धर्म पालन के लिए अवसर प्रदान कर रहे हैं। ऐसे में प्रत्येक व्यक्ति को मानवता, अहिंसा, जीवदया और संस्कारों की रक्षा के लिए आगे आना चाहिए।
सारंगपुर को पहली बार मिला पावन सान्निध्य
कार्यक्रम का संचालन करते हुए मध्यप्रदेश महासभा संयोजक विजय धुर्रा ने कहा कि सारंगपुरवासियों को पहली बार राष्ट्रसंत मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज ससंघ का सान्निध्य प्राप्त हुआ है। उन्होंने समाज से गौरक्षा, जीवदया, संस्कारित शिक्षा एवं समाज सुधार के कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर इंदौर जैन समाज अध्यक्ष आनंद गोधा, कार्याध्यक्ष नवीन गोधा, महामंत्री हर्ष जैन, कोषाध्यक्ष विजय पाटौदी, भारतवर्षीय कमेटी के उपाध्यक्ष हुकुम काका, उज्जैन जैन समाज अध्यक्ष धर्मेंद्र सेठी, कवि सौरव भयंकर, विकास पटवारी, सुनील बिजोलिया, पी.एम. सूरत, आनंद रामगंज मंडी सहित अनेक श्रद्धालुओं ने श्रीफल अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
नगर पालिका अध्यक्ष ने किया भावपूर्ण स्वागत
नगर पालिका अध्यक्ष पंकज पालीवाल ने कहा कि इतने विशाल साधु संघ का सारंगपुर आगमन नगरवासियों के लिए सौभाग्य का विषय है। उन्होंने कहा कि तपती धूप में नंगे पैर विहार करने वाले ऐसे महान संतों का दर्शन जीवन का दुर्लभ अवसर है। उन्होंने पूरे नगर की ओर से निवेदन किया कि गुरुदेव कुछ दिनों तक सारंगपुर में प्रवास कर धर्म की गंगा प्रवाहित करें। इस अवसर पर जैन समाज ने पंकज पालीवाल का तिलक, पीतवस्त्र एवं माल्यार्पण कर सम्मान किया।
महाशांतिधारा एवं भव्य शोभायात्रा
बस स्टैंड से प्रारंभ हुई भव्य शोभायात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से होती हुई बड़े जैन मंदिर पहुंची, जहां धर्मसभा आयोजित हुई। मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज के सान्निध्य में जगत कल्याण, रोग-शोक एवं भय निवारण की भावना से भगवान श्री पार्श्वनाथ स्वामी की महाशांतिधारा संपन्न हुई। इसके उपरांत मुनि संघ ने नगर जिनालयों की वंदना कर शाजापुर की ओर मंगल विहार किया।
समापन
सारंगपुर में मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज के प्रथम मंगल प्रवेश ने पूरे नगर को धर्ममय वातावरण से सराबोर कर दिया। श्रद्धालुओं ने इसे अपने जीवन का अविस्मरणीय आध्यात्मिक अवसर बताया।













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