दिगंबर जैन उदासीन आश्रम ट्रस्ट और कुंद-कुंद ज्ञानपीठ की ओर से आयोजित कालजयी विरासत, समकालीन विमर्श और स्वर्णिम भविष्य की रूपरेखा विषय पर त्रिदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आगाज रविवार को दोपहर ढाई बजे हुआ। इंदौर से पढ़िए, यह विशेष रिपोर्ट…
इंदौर। आचार्य श्री सुनील सागर महाराज के सानिध्य में श्री दिगंबर जैन उदासीन आश्रम ट्रस्ट और कुंद-कुंद ज्ञानपीठ की ओर से आयोजित कालजयी विरासत, समकालीन विमर्श और स्वर्णिम भविष्य की रूपरेखा विषय पर त्रिदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आगाज रविवार को दोपहर ढाई बजे हुआ। इसमें विद्वान अतिथि नीरज जैन इंदौर, सत्येंद्र कुमार जैन जयपुर, अभय वर्णी, वीरेंद्र जैन, तारा डागा ने प्राकृत भाषा, भू-वलय, पर्यावरण, प्राकृत, नवांक के महत्व को प्रतिपादित कर इस संगोष्ठी को वैश्विक स्तर की संगोष्ठी के रूप में स्थापित कर दिया। इसमें जहां प्राकृत भाषा के उद्भव से लेकर उसके कन्नड़, मलयालम, बंगाली सहित हमारी क्षेत्रीय भाषा गुजराती मराठी और संस्कृत आदि का प्रादुर्भाव को पूरी शिद्दत से बताया गया। जयपुर से पधारे जयकुमार उपाध्ये ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में अपने शोध पत्रों का वाचन करने वाले विद्वानों के विचारों की सटीक सारगर्भित मीमांसा कर संगोष्ठी को उच्च स्तर पर पहुंचा दिया।

आचार्य श्री ने प्रदर्शनी और लाइब्रेरी का किया अवलोकन
उदासीन आश्रम और कुंदकुंद ज्ञानपीठ द्वारा संचालित लाइब्रेरी का आचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज और उनके संघर्ष मुनि राज्यों ने अवलोकन किया। यहां पर लगाई गई प्रदर्शनी का भी उन्होंने गहन निरीक्षण किया और उसके बारे में जानकारी प्राप्त की। इस अवसर पर उनके साथ आश्रम के डॉ. अरविंद जैन, अमित कासलीवाल सहित अनिल पदाधिकारी मौजूद रहे।

पर्यावरण बचाना हम सब की जिम्मेदारी
आचार्य श्री सुनील सागर जी ने कहा कि जैन धर्म एक वैज्ञानिक धर्म है। यदि वैज्ञानिक इसे समझें तो वे भी इसे वैज्ञानिक मानेंगे, क्योंकि इसमें प्रकृति का संरक्षण प्रमुख है। उन्होंने कहा कि गाड़ियों से निकलने वाला कार्बन और पटाखों से निकलने वाले रसायन पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं। विहार के दौरान संतों का आतिथ्य सरलता से होता है। लोग छोटा घर भी खाली कर देते हैं। हमें भी सादगी अपनानी चाहिए। भीड़ कम हो तो कुर्सियां समेटकर बैठें, एसी कम चलाएं। मोबाइल टावरों के रेडिएशन से पक्षियों को हानि होती है। आचार्य श्री ने कहा कि पर्यावरण को बचाना हम सब की जिम्मेदारी है इससे जीवो की रक्षा होगी।
प्रकृति और संस्कृति दोनों बचाना जरूरी
आचार्य श्री ने मंगल देशना में कहा कि प्राकृत भाषा पर उद्बोधन देते हुए कहा कि इसका उपयोग और सीखने की प्रवत्ति रखनी चाहिए। यही बात मुनि पूज्य सागर जी ने भी आपको बताई। उन्होंने कहा कि शरीर पंचभूतों— पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, वनस्पति से बना है। यदि ये दूषित होंगे तो मनुष्य भी संकट में होगा। उन्होंने कहा कि यमुना का पानी आज पीने लायक नहीं रहा
पेड़-पौधों में जीवन है
आचार्य श्री ने कहा कि जगदीश चंद्र बसु ने भी सिद्ध किया कि पेड़-पौधों में जीवन है। मेट्रो के लिए पेड़ काटना खतरनाक है। आधुनिक शैंपू-साबुन से त्वचा रोग बढ़ रहे हैं। इसलिए प्रकृति और संस्कृति दोनों बचाना जरूरी है। “अतिथि देवो भव” की भावना ही सच्चा धर्म है।
प्राकृत को अपनाएंगे तो शास्त्र ग्रंथों का सार समझ आएगा
अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर जी महाराज ने अपने प्रबोधन में कहा कि आज की संगोष्ठी में प्राकृत भाषा के बारे में विस्तार से चर्चा हुई है। अगर हर व्यक्ति इसे अपनाए और जीवन चर्या में शामिल करें तो शास्त्रों और ग्रंथो का सार आसानी से समझा जा सकता है। उन्होंने उपस्थित जन समुदाय को प्राकृत अपनाने और सीखने की प्रेरणा दी।
संगोष्ठी में इन संस्थाओं का सहयोग रहा
श्री दिगंबर जैन उदासीन आश्रम, ट्रस्ट, कुंद-कुंद ज्ञानपीठ, दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद, दिगंबर जैन सोशल ग्रुप फेडरेशन इंदौर रीजन, दिगंबर जैन श्राविका आश्रम समवशरण मंदिर ट्रस्ट आदि संस्थाओं का संयोजन और सहयोग रहा। इस संगोष्ठी में प्राकृताचार्य श्री सुनील सागर जी,अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्यसागर जी महाराज संघ एवं आर्यिका माताजी संघ का परम सानिध्य मिला। यह इंदौर की धरती का परम सौभाग्य रहा। संचालन विदुषी संगीता मेहता और डॉ. अरविंद जैन ने किया।
यह मौजूद रहे
इस अवसर पर ट्रस्ट के अमित कासलीवाल, हंसमुख, गांधी, सुशील कासलीवाल, आदित्य कासलीवाल, लोकेश कासलीवाल, ब्र. अनिल जैन , आनंद गोधा, नवीन गोधा,महामंत्री हर्ष जैन , मनोहर झांझरी, प्रदीप चौधरी,संदीप मोयरा,शरद सेठी, सुमत लुहाड़िया ,हसमुख गांधी ,
, पिन्सपाल टेंग्या, राजेन्द्र सोनी, मुकेश बावलीवाल, अजीत जैन, इंजी. अनिल कुमार जैन, प्रो. संगीता मेहता, रेखा संजय जैन, बाबूलाल पाण्ड्या, कीर्ति पाण्ड्या, दिलीप पाटनी, संजय पापड़ीवाल, ऋषभ जैन सहित बड़ी संख्या में दिगंबर जैन समाज की महिला पुरुष मौजूद रहे।













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