समाचार

युवा पीढ़ी के पथप्रदर्शक बने श्रमण मुनि श्री विनंदसागर जी मुनिराज : संयम, संस्कार और जिनशासन प्रभावना से युवाओं को दे रहे नई दिशा


श्रमण मुनि श्री विनंदसागर जी मुनिराज अपने संयम, स्वाध्याय, आध्यात्मिक साधना और युवा संस्कार निर्माण के कार्यों से देशभर में प्रेरणा का केंद्र बने हुए हैं। जिनशासन प्रभावना, शिविरों एवं साहित्य सृजन के माध्यम से वे नई पीढ़ी को धर्म और जीवन मूल्यों से जोड़ रहे हैं। पढ़िए श्रीफल साथी मनोज जैन नायक की यह विशेष रिपोर्ट।


मुरैना। जैन श्रमण परंपरा में ऐसे संत विरले होते हैं, जो अल्पायु में ही अपने ज्ञान, संयम और समाजहित के कार्यों से विशिष्ट पहचान बना लेते हैं। श्रमण मुनि श्री विनंदसागर जी मुनिराज ऐसे ही प्रेरणादायी संत हैं, जो अपने प्रवचनों, अध्ययन और संगठनात्मक कार्यों के माध्यम से विशेष रूप से युवा पीढ़ी का मार्गदर्शन कर रहे हैं।

गृहस्थ जीवन से संयम पथ तक

पूज्य गुरुदेव के परम भक्त एवं विद्वान प्रिंस जैन “देवांश” (फिरोजाबाद) के अनुसार मुनिश्री का गृहस्थ नाम संवेग जैन था। उनका जन्म 29 सितंबर 1994 को उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जनपद स्थित चंद्रनगर में श्री महेश जैन एवं श्रीमती उर्मिला जैन के धार्मिक परिवार में हुआ। बी.एससी. तक शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने सांसारिक जीवन के स्थान पर आत्मकल्याण का मार्ग चुना।

अल्पायु में ग्रहण किया संयम

11 जुलाई 2015 को मात्र 20 वर्ष की आयु में उन्होंने परम पूज्य आचार्य श्री विनम्रसागर जी महामुनिराज से आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत धारण किया। इसके पश्चात 1 अक्टूबर 2017 को ग्वालियर में आचार्य श्री के करकमलों से मुनि दीक्षा ग्रहण कर श्रमण जीवन को अपनाया। दीक्षा के बाद उनका नाम मुनि श्री विनंदसागर जी मुनिराज रखा गया।

युवाओं में संस्कार जागरण का अभियान

मुनि श्री विनंदसागर जी अपने प्रेरक प्रवचनों और मार्गदर्शन के माध्यम से युवाओं में धर्म, संस्कृति, चरित्र निर्माण और आत्मानुशासन के संस्कार विकसित कर रहे हैं। उनके निर्देशन में आयोजित जिनशासन शिविरों में बालक, युवा एवं समाज के विभिन्न वर्ग जैन दर्शन, आगम अध्ययन और व्यक्तित्व विकास का प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं।

अध्ययन, साहित्य और संगठन में उल्लेखनीय योगदान

मुनिश्री स्वर विज्ञान के गहन अध्येता हैं तथा अनेक जैन और दार्शनिक ग्रंथों का गंभीर अध्ययन कर चुके हैं। उनके द्वारा रचित पुस्तक “हमारे आराध्य उच्चारणाचार्य” आचार्य श्री विनम्रसागर जी महामुनिराज के प्रेरणादायी जीवन पर आधारित महत्वपूर्ण कृति है। उनके मार्गदर्शन में स्थापित अखिल भारतवर्षीय वीतराग जिनशासन प्रभावना संगठन धार्मिक शिविरों, विद्वत संगोष्ठियों, प्रतियोगिताओं तथा जरूरतमंद विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति प्रदान करने जैसे सेवा कार्यों का संचालन कर रहा है।

प्रेरणादायी व्यक्तित्व

संयम, साधना, अध्ययन, संगठन और समाजोत्थान के विविध आयामों से युक्त मुनि श्री विनंदसागर जी मुनिराज का व्यक्तित्व आज हजारों श्रद्धालुओं और विशेष रूप से युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है। उनका जीवन यह संदेश देता है कि दृढ़ संकल्प, आध्यात्मिक निष्ठा और समाज सेवा के माध्यम से अल्पायु में भी उत्कृष्ट उपलब्धियां प्राप्त की जा सकती हैं।

आप को यह कंटेंट कैसा लगा अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।
+1
0
+1
0
+1
0
Shree Phal News

About the author

Shree Phal News

Add Comment

Click here to post a comment

You cannot copy content of this page