वैज्ञानिक धर्माचार्य कनकनंदी जी गुरुदेव ने अंतरराष्ट्रीय वेबीनार में स्वाध्याय, आत्मज्ञान और सम्यक् दर्शन की महत्ता बताते हुए कहा कि सच्चा ज्ञानी वाद-विवाद में नहीं उलझता, बल्कि अपने आचरण से समाज का मार्गदर्शन करता है। पढ़िए श्रीफल साथी अजीत कोठिया डडूका (बांसवाड़ा, राजस्थान) की यह रिपोर्ट।
सागवाड़ा। विश्व धर्म प्रभाकर वैज्ञानिक धर्माचार्य कनकनंदी जी गुरुदेव ने गलियाकोट पुनर्वास कॉलोनी से आयोजित अंतरराष्ट्रीय वेबीनार में कहा कि “ज्ञान से भरे हुए गुरु कभी उलझते नहीं, वाद-विवाद नहीं करते।” उन्होंने कहा कि वास्तविक ज्ञान व्यक्ति के आचरण में झलकता है और वही समाज को सही दिशा प्रदान करता है।
स्वाध्याय को बताया परम तप
गुरुदेव ने कहा कि सर्वज्ञ भगवान द्वारा प्रतिपादित बारह प्रकार के तपों में स्वाध्याय को परम तप बताया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विशेष परिस्थितियों में वाचिक उच्चारण संभव न होने पर भी मानसिक मनन एवं चिंतन के रूप में स्वाध्याय जारी रह सकता है। उनके अनुसार स्वाध्याय से शारीरिक एवं मानसिक लाभ के साथ आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग भी प्रशस्त होता है।
आत्मज्ञान के बिना तप अधूरा
वेबीनार के दौरान एक जिज्ञासा का समाधान करते हुए आचार्यश्री ने कहा कि केवल बाह्य तप, त्याग या उपवास पर्याप्त नहीं हैं। उन्होंने कहा कि आत्मज्ञान और भावों की विशुद्धि के बिना उपवास का वास्तविक आध्यात्मिक फल प्राप्त नहीं होता। सम्यक् ज्ञान से युक्त साधक अल्प समय में भी कर्म निर्जरा की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति कर सकता है।
आध्यात्मिक दृष्टि अपनाने का आह्वान
गुरुदेव ने कहा कि ज्ञानी पुरुष आत्मा और शरीर के भेद को समझते हैं तथा सांसारिक वस्तुओं के प्रति मोह से मुक्त रहते हैं। उन्होंने आत्मचिंतन, राग-द्वेष का त्याग तथा आत्मस्वरूप की अनुभूति को जीवन का वास्तविक उद्देश्य बताया। साथ ही बच्चों को मातृभाषा में शिक्षा देने के महत्व पर भी प्रकाश डाला।
मुनि श्री सुविज्ञ सागर जी ने किया मंगलाचरण
कार्यक्रम में मुनि श्री सुविज्ञ सागर जी गुरुदेव ने आचार्यश्री द्वारा रचित कविता “चलो अब शीघ्र चलो गुरु के पास चलो, आत्मा का ज्ञान करो, राग-द्वेष-मोह तजो” का मंगलाचरण प्रस्तुत किया। वेबीनार में उपस्थित श्रद्धालुओं ने धर्मोपदेश का श्रवण कर आत्मकल्याण का संदेश ग्रहण किया।
विजयलक्ष्मी गोदावत ने दी जानकारी
कार्यक्रम की जानकारी विजयलक्ष्मी गोदावत (सागवाड़ा) द्वारा दी गई। वेबीनार में देश-विदेश से जुड़े श्रद्धालुओं ने सहभागिता करते हुए गुरुदेव के आध्यात्मिक संदेशों का लाभ प्राप्त किया।













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