आचार्य प्रवर श्री सुनील सागर जी महाराज अपने 36 मुनिराजों और माताजी के विशाल संघ के साथ गुजरात से मध्य प्रदेश की सीमा में प्रवेश कर चुके हैं। रानापुर विकास खंड के ग्राम लांबई और कुंदनपुर के रास्ते मध्य प्रदेश में प्रवेश करते ही जैन समाज के श्रद्धालुओं ने पलक-पावड़े बिछाकर उनकी भव्य अगवानी की। झाबुआ/रानापुर से पढ़िए, यह खबर…
झाबुआ/रानापुर। आदिसागर जी महाराज की परंपरा के चतुर्थ पट्टाधीश आचार्य प्रवर श्री सुनील सागर जी महाराज अपने 36 मुनिराजों और माताजी के विशाल संघ के साथ गुजरात से मध्य प्रदेश की सीमा में प्रवेश कर चुके हैं। रानापुर विकास खंड के ग्राम लांबई और कुंदनपुर के रास्ते मध्य प्रदेश में प्रवेश करते ही जैन समाज के श्रद्धालुओं ने पलक-पावड़े बिछाकर उनकी भव्य अगवानी की इस दौरान पूरा क्षेत्र जयकारों के घोष से गूंज उठा। इस अवसर पर झाबुआ, दाहोद, कुशलगढ़ और इंदौर सहित कई क्षेत्रों से सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित थे। आचार्य श्री के मध्य प्रदेश आगमन पर रानापुर दिगंबर जैन समाज के पदाधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने उनकी अगवानी की और रानापुर पधारने की विनती की।
अपने प्रेरक उद्बोधन में आचार्य श्री ने कहा कि सही मायने में आदिवासी ही प्रकृति प्रेमी होते हैं। उन्होंने जीवन में संयम के महत्व को समझाते हुए कहा, “एक रेखा हमारे जीवन को बदल देती है। गुजरात में विहार करते हुए जब हम एक रेखा पार करके मध्य प्रदेश में प्रवेश कर गए, तो उसी प्रकार जीवन में भी संयम की रेखा को पार करते ही व्यक्ति की किस्मत बदल जाती है।”













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