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तीर्थ समान होती है दीक्षा गुरु की दीक्षा भूमि: आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने फुलेरा नगर में दी धर्म देशना, 26 वर्षों के बाद आचार्य श्री का पदार्पण


प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की परंपरा के तृतीय पट्टाधीश आचार्य श्री धर्मसागर जी महाराज हमारे दीक्षा गुरु हैं। उनकी ऐलक और मुनि दीक्षा स्थली पर आकर हमें बहुत प्रसन्नता हुई, संघ भी आह्लादित है। फुलेरा नगर में इसके पूर्व भी प्रथम पट्टधीश आचार्य श्री वीरसागर जी, श्री शिवसागर जी श्री धर्मसागर जी ने वर्षायोग किया है। फुलेरा नगर से डॉ. राजेश पंचोलिया की यह खबर…


फुलेरा नगर। प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की परंपरा के तृतीय पट्टाधीश आचार्य श्री धर्मसागर जी महाराज हमारे दीक्षा गुरु हैं। उनकी ऐलक और मुनि दीक्षा स्थली पर आकर हमें बहुत प्रसन्नता हुई, संघ भी आह्लादित है। फुलेरा नगर में इसके पूर्व भी प्रथम पट्टधीश आचार्य श्री वीरसागर जी, श्री शिवसागर जी श्री धर्मसागर जी ने वर्षायोग किया है। पूर्वाचार्याे की चरण रज की इस प्रसिद्ध भूमि हम साधुओं के लिए तीर्थ समान है। यह देशना पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने फुलेरा नगर में आचार्य श्री धर्म सागर जी की मुनि दीक्षा और पंच कल्याणक की हीरक जयंती तथा आचार्य श्री धर्म सागर जी की छतरी निर्माण के दो दिवसीय कार्यक्रम के अवसर पर प्रकट की।

श्रद्धालु आचार्य दर्शन कर हैं अभिभूत

आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व मुनि श्री हितेंद्र सागर जी के प्रवचन हुए। इसके पूर्व ‘सजा दो गुलशन से, मेरे गुरुदेव पधारे है’ बैंड की सुमधुर स्वर लहरियों पर हर उम्र के श्रद्धालु थिरककर श्रद्धा भक्ति से नृत्य कर रहे थे। श्रद्धालुगण राजकीय अतिथि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के 26 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद भगवान श्री आदिनाथ, भगवान श्री पार्श्वनाथ, आचार्य श्री धर्म सागर जी की मुनि दीक्षा स्थली फुलेरा में आचार्य दर्शन कर अभिभूत हो रहे हैं।

 छतरी का शिलान्यास हुआ 

प्रसंग हैं कि 36 मूलगुण धारी पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी 36 साधुओं सहित फुलेरा पधारे। निलेश, कमोद के अनुसार नगर आगमन पर आचार्य श्री का चरण प्रक्षालन आरती कर अभिनंदन किया गया। आचार्यसंघ ने श्री पार्श्वनाथ मंदिर नसिया के दर्शन ,अभिषेक देखकर मुनि श्री निर्वाण सागर जी की समाधि की वंदना की। दीक्षा गुरु श्री धर्मसागर जी की छतरी का शिलान्यास आचार्य संघ के सान्निध्य में विधि विधान मंत्रोच्चार पूर्वक हुआ।

आचार्य श्री संघ की शोभायात्रा नगर के प्रमुख मार्गाें से निकली

आचार्य श्री द्वारा केशर से अभिमंत्रित शिलाओं को पुण्यार्जक विमलकुमार छाबड़ा परिवार फुलेरा द्वारा प्रतिष्ठाचार्य मनोज के निर्देशन में स्थापित किया। निर्माण पश्चात आचार्य श्री धर्म सागर जी की प्रतिमा विराजित होगी। छतरी शिलान्यास कार्यक्रम के बाद आचार्य श्री संघ की शोभायात्रा नगर के प्रमुख मार्गाें से होते हुए श्री आदिनाथ मंदिर पहुंची। जहां पर आचार्य संघ ने श्री जी का दर्शन कर अभिषेक देखा। इसके बाद आचार्य श्री ससंघ मंचासीन हुए।

आचार्य श्री धर्म सागर जी का गुणानवाद किया

चित्र अनावरण एवं दीप प्रज्वलन बाल ब्रह्मचारी गजु भैय्या, बाहर से पधारे अतिथियों एवं समाज के पदाधिकारियों ने किया। मंगलाचरण के बाद आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन का सौभाग्य पूनमचंद, कैलाशचंद, संजयकुमार बेनाड़ा परिवार को मिला। जिनवाणी भेंट की गई। दोपहर को आमंत्रित अतिथियों, विद्वानों आर्यिका श्री शुभमति माताजी, मुनि श्री हितेंद्र सागर जी, आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने पूर्वाचार्यों को स्मरण कर आचार्य श्री धर्म सागर जी का गुणानवाद किया।

अतिथियों का किया स्वागत-सम्मान 

संघ के ब्रह्मचारी ,बाहर से पधारे अतिथि विद्वानों का नगर परंपरा अनुसार समाज के पदाधिकारियों ने तिलक, माला श्रीफल पगड़ी से स्वागत किया गया। इस अवसर पर निकट के जयपुर, सीकर, निवाई, धोद, जोबनेर, मारोठ, किशनगढ़, भीनमाल, दूदू सहित अनेक नगरों से भक्त पधारे। भक्तों ने अपने नगर आने के लिए आचार्यश्री को श्रीफल अर्पित किया।

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