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पंच कल्याणक में महामुनि आदिनाथ की प्रथम आहारचर्या: समवशरण की रचना कर जिज्ञासाओं का किया आचार्यश्री ने समाधान 

भिंड। पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के ज्ञान कल्याणक के दिन महा मुनिराज आदिकुमार को इच्छुक रस (गन्ने का रस) की विधि मिलने पर आहारचर्या विधि विधान से हुई। दोपहर को समवशरण की रचना की गई। जिसमें जिज्ञासुओं द्वारा प्रश्न करने पर समवशरण में विराजमान पट्टाचार्य श्री ने उनके प्रश्नों का समाधान किया। पट्टाचार्य श्री विशुद्धसागर जी ने कहा कि महापुरुषों की महिमा निराली है। आत्मज्ञानी व्यक्ति के सामने क्रूर से क्रूर प्राणी शांत हो जाते हैं। जातिगत बैर भाव भी छोड़ देते हैं। देखो तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव से लेकर भगवान महावीर स्वामी पर्यंत का इतिहास सर्व जगत को ज्ञात है। जहां-जहां भगवान का विहार होता था। वहां-वहां सुभिक्ष हो जाता था। गाय एवं सिंह मैत्री भाव से सरिता के एक ही घाट पर पानी पीते थे। उनके समवशरण में धर्मसभा में तीन गति के जीव अपने-अपने कोटे में बैठकर दिव्य वाणी, श्री जिन देशना का श्रवण करते थे। महापुरुषों की यही महिमा है, बिना अस्त्र-शस्त्र उठाए सर्व लोक को अपना बना लेना। उपसर्गकर्ता भी चरणों में आकर सम्यकत्व निधि को प्राप्त कर लेते हैं। घर-घर में आत्म विद्या उदघोषित हो, ऐसा पवित्र भाव रखो। अपने कसाए वासना पूर्ण विचारों के कारण किसी भी न प्रियांशु का विघात मत करो तथा भावों से देव एवं नारकियों की भी हत्या मत करो, स्वयं के परिणाम को संभालो।

मरना तुम्हारा धर्म नहीं समाधि मरण करना ही धर्म 

पट्टचार्य ने आगे कहा कि देश राष्ट्र समाज धर्म एवं स्वयं पर के प्राणों की रक्षा करने के भाव हैं तो प्रत्येक सूत्र को अनेक श्रेणियां में देखना चाहिए। सर्व जगत पूर्ण शुद्ध नहीं जी रहा है। यह धु्रव सत्य है पर जी रहा है, जीते-जीते शुद्ध अवस्था होते-होते एक क्षण परम शुद्ध में प्रवेश कोई बिरला साधु-पुरुष ही करता है तब वह कर्मशून्य कृतकृत्य परमात्मा पद को प्राप्त कर लेता है। उन्होंने कहा कि आपको लग सकता है कि इन सब जीवों की रक्षा से मुझे क्या लाभ आपको इनकी रक्षा से लाभ ही लाभ है। विवेक पूर्वक विचार करो बुद्धि खुल जाएगी। संसार का सर्व सुख तथा परमार्थ सब की रक्षा से ही संभव है। पंच स्थावर एवं त्रस जीवों की रक्षा के बिना मानव जीवन सुरक्षित नहीं है। सामान्य नागरिक जी रहे हैं। सभी के होने से पर उन्हें अपनी अल्प प्रक्रिया से समझ ही नहीं आ रहा है कि उनका जीवन किसके माध्यम से सुरक्षित है। पट्टाचार्य ने कहा कि आजकल लोग छोटी-छोटी बातों को लेकर आत्महत्या कर रहे हैं। मरना तुम्हारा धर्म नहीं समाधि मरण करना ही धर्म है। आज इस सभा में सभी को संकल्प लेना है कि हम आत्महत्या नहीं करेंगे, सभी लोगों ने हाथ उठाकर संकल्प लिया।

यह समाजजन मौजूद रहे 

इस अवसर पर विधायक नरेंद्रसिंह कुशवाहा, पूर्व विधायक संजीवसिंह कुशवाह, भारत चतुर्वेदी, विश्वप्रताप सिंह विष्णु, पूर्व जिला अध्यक्ष रविसेन जैन, धर्मेंद्र जैन पोस्ट ऑफिस, प्रमोद जैन डब्बू, पार्षद मनोज जैन, यश जैन, बिट्टू जैन, देवेंद्र जैन, नरेश जैन, चक्रेश जैन, विनोद जैन, रविंद्र जैन, राकेश जैन, मनीष जैन, मोहन जैन, राजेंद्र जैन, रमेश जैन, सचिन जैन, पिंकू जैन उपस्थित थे।

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