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अहंकार हीं मनुष्य का सबसे बड़ा दुश्मन : आर्यिका विज्ञमति माताजी ने धर्मसभा को संबोधित किया


दिगंबर जैन परिषद के तत्वावधान में आचार्य श्री शांति सागर सभागार एमडी जैन, हरिपर्वत में आचार्य श्री इंद्रनंदी जी संघ एवं आर्यिका श्री विशुद्धमति माताजी, विज्ञमति माताजी ससंघ की धर्मसभा जारी है। इसका शुभारंभ आगरा दिगम्बर जैन परिषद के पदाधिकारियों द्वारा भगवान महावीर स्वामी के चित्र अनावरण कर किया गया।आगरा से पढ़िए, राहुल जैन की यह रिपोर्ट…


आगरा। दिगंबर जैन परिषद के तत्वावधान में आचार्य श्री शांति सागर सभागार एमडी जैन, हरिपर्वत में आचार्य श्री इंद्रनंदी जी संघ एवं आर्यिका श्री विशुद्धमति माताजी, विज्ञमति माताजी ससंघ की धर्मसभा जारी है। इसका शुभारंभ आगरा दिगम्बर जैन परिषद के पदाधिकारियों द्वारा भगवान महावीर स्वामी के चित्र अनावरण कर किया गया। आर्यिका विज्ञमति माताजी ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि अहंकार हीं मनुष्य का सबसे बड़ा दुश्मन है। अहंकार रूपी पुरुष अपने साथ-साथ पूरे कुल का नाश कर देता है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण रावण है, रावण महान विद्वान, महान पराक्रमी, प्रभु भक्ति में हमेशा लीन रहने वाला उत्कृष्ट व्यक्ति था लेकिन, उसके अहंकार ने पूरे कुल का नाश कर दिया।

रावण को मैं ने मारा

भगवान राम ने रावण को मारने के बाद लक्ष्मण से कहा कि रावण से नीति वाक्य सुनकर आओ और उनका आशीर्वाद लेकर आओ। तब लक्ष्मण ने रावण को प्रणाम किया आग्रह किया कि लंकेश मुझे नीति का ज्ञान दो तब रावण ने लक्ष्मण जी को शक्ति नीतियां बताई। पहले नीति कोई भी शुभ कार्य करो तो उसमें देरी मत करना। दूसरी नीति क्रोध में आकर कोई भी कार्य मत करना और तीसरी नीति कार्य करने से पहले गुरुओं का ज्ञान और बड़ों की सलाह जरूर लेना। अयोध्या पहुंचने पर माता कौशल्या ने राम से पूछा तो राम जी ने कहा कि माता रावण को मैंने नहीं मारा। रावण को मैं ने मारा। संगठन और नेतृत्व करना सीखना है तो मर्यादा पुरुषोत्तम राम से सीखो। उन्होंने सीता जी का हरण होने पर वन में वानरों को संगठित कर वानर सेना तैयार की और उसका कुशल नेतृत्व कर विजय प्राप्त की।

अपनी आत्मा को निर्मल करो

मुनि श्री नाभिनंदी जी महाराज ने कहा कि हम अपने शरीर की कितनी फ़िक्र करते हैं। इसके लिए जाने क्या-क्या करते हैं। एक एसी, कूलर, अच्छा श्रृंगार, अच्छा खान यह भूल जाते हैं। हमारे साथ यह शरीर नहीं जाने वाला। अपनी आत्मा को निर्मल करो, अपनी आत्मा को शुद्ध करो। यही आत्मा सिद्ध परमेष्ठी बनती है। आचार्य इंद्रनंदी जी महाराज ने भी धर्मसभा को संबोधित किया धर्मसभा का संचालन अनुज जैन क्रांति द्वारा किया गया। इस अवसर पर हीरालाल बैनाड़ा, पवन जैन चांदी वाले, मुनि त्यागी मंत्री प्रचार मंत्री आशीष जैन मोनू,ऑडिटर अनुज जैन क्रांति, रवि जैन, पंकज जैन,आदित्य जैन, सुरेश जैन,मानवेन्द्र जैन,उषा जैन, अनीता जैन, संगीता जैन, मीडिया प्रभारी राहुल जैन सकल जैन समाज मौजूद था। 9 जून को प्रातः 8:15 बजे से मुनि संघ एवं आर्यिका के मंगल प्रवचन आचार्य शांतिसागर सभागार, हरिपर्वत में होंगे।

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