इंदौर के समाजसेवी एवं धर्मनिष्ठ श्रावक हसमुख जैन गांधी को भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी ने “तीर्थ चक्रवर्ती” सम्मान से सम्मानित किया। जैन तीर्थों के संरक्षण, धर्म प्रभावना और सेवा कार्यों में उनके योगदान को देखते हुए यह सम्मान प्रदान किया गया
इंदौर। जैन समाज के लिए गौरव और खुशी की बात है कि इंदौर के समाजसेवी एवं धर्मनिष्ठ श्रावक हसमुख जैन गांधी को भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी द्वारा प्रतिष्ठित “तीर्थ चक्रवर्ती” सम्मान से अलंकृत किया गया है। यह सम्मान उन्हें जैन तीर्थों के संरक्षण, धर्म प्रभावना और समाज सेवा में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया गया।
तीर्थ संरक्षण के प्रति समर्पण को मिला सम्मान
कमेटी द्वारा जारी प्रशस्ति पत्र में उल्लेख किया गया है कि हसमुख जैन गांधी ने वर्षों से जैन तीर्थ क्षेत्रों की गरिमा बनाए रखने, जिनशासन की प्रभावना बढ़ाने और धार्मिक गतिविधियों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनकी धर्म के प्रति आस्था और समर्पण समाज के लिए प्रेरणा का विषय है।
एक लाख रुपये का दिया पावन अंशदान
हसमुख जैन गांधी द्वारा कमेटी को एक लाख रुपये का अंशदान प्रदान किया गया। इसे केवल आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि श्रमण संस्कृति के संरक्षण और जैन तीर्थों के विकास के प्रति उनकी गहरी निष्ठा का प्रतीक माना जा रहा है। उनके इस सहयोग की समाज में व्यापक सराहना हो रही है।
राष्ट्रीय पदाधिकारियों ने की सराहना
इस अवसर पर कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जम्बू प्रसाद जैन, राष्ट्रीय महामंत्री संतोष पेंढारी एवं शतकोत्तर रजत स्थापना वर्ष महोत्सव के चेयरमैन जवाहरलाल जैन ने हसमुख जैन गांधी के योगदान की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि ऐसे समर्पित श्रावक समाज और धर्म की सच्ची पूंजी होते हैं, जिनसे नई पीढ़ी को प्रेरणा मिलती है।
125वें वर्ष की ओर बढ़ रही कमेटी
भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी अपने गौरवशाली 125वें वर्ष की ओर बढ़ रही है। इसी अवसर पर शतकोत्तर रजत स्थापना वर्ष महोत्सव 22 अक्टूबर 2026 से 22 अक्टूबर 2027 तक देशभर में मनाया जाएगा। इस दौरान विभिन्न धार्मिक, सांस्कृतिक और समाज जागरण के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
सेवा और समर्पण की पहचान बना सम्मान
हसमुख जैन गांधी को मिला “तीर्थ चक्रवर्ती” सम्मान केवल एक सम्मान नहीं, बल्कि जैन तीर्थों के प्रति उनकी निष्ठा, सेवा भावना और धर्म के प्रति समर्पण का प्रतीक है। समाजजनों ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनका यह सम्मान आने वाली पीढ़ियों को भी धर्म और तीर्थ संरक्षण के लिए प्रेरित करेगा।













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