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मुनि दर्पण के ‘हर मास एक उपवास’ विशेषांक का कुशलगढ़ में भव्य लोकार्पण: आचार्य प्रसन्न सागर महाराज के सान्निध्य में हुआ विमोचन, धार्मिक जागरण का दिया संदेश


   मुनि दर्पण निःशुल्क मासिक पत्रिका के ‘हर मास एक उपवास’ विशेषांक का कुशलगढ़ में भव्य लोकार्पण किया गया। आचार्य प्रसन्न सागर महाराज के सान्निध्य में आयोजित कार्यक्रम में समाज के अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे। कुशलगढ़ से पढ़िए यह खबर 


कुशलगढ़। मुनि दर्पण प्रकाशन समिति डडूका द्वारा प्रकाशित मुनि दर्पण निःशुल्क मासिक पत्रिका के ‘हर मास एक उपवास’ विशेषांक का भव्य लोकार्पण कुशलगढ़ स्थित नवकार गार्डन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में साधना महोदधि आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज के पावन सान्निध्य में विशेषांक का विमोचन किया गया।

गणमान्य अतिथियों की रही गरिमामयी उपस्थिति

लोकार्पण समारोह में क्षेत्रीय विधायक रमीला खड़िया, पूर्व राज्य मंत्री भीमा भाई डामोर, जयंतीलाल सेठ, विजयलाल कोठारी तथा हंसमुख सेठ सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने धार्मिक साहित्य के माध्यम से समाज में जागरूकता बढ़ाने के प्रयासों की सराहना की।

पत्रिका का दिया गया परिचय

कार्यक्रम के प्रारंभ में मुनि दर्पण के प्रधान संपादक अजीत कोठिया ने पत्रिका की उद्देश्यपूर्ण यात्रा और विशेषांक की विषय-वस्तु से उपस्थित जनों को अवगत कराया। उन्होंने बताया कि पत्रिका का उद्देश्य जैन धर्म के सिद्धांतों एवं साधना के महत्व को जन-जन तक पहुंचाना है।

संतों और श्रावकों को भेंट की गई प्रतियां

संपादक मंडल सदस्य कमलेश धीरावत ने सभी मुनिराजों, आर्यिका माताजी तथा संघस्थ ब्रह्मचारी भैया-बहनों को मुनि दर्पण की प्रतियां भेंट कीं। साथ ही उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं को भी पत्रिका का निःशुल्क वितरण किया गया।

प्रेरणा और सहयोग के प्रति जताया आभार

इस अवसर पर अजीत कोठिया ने मुनि दर्पण के प्रकाशन हेतु प्रेरणा देने वाले मुनि श्री सामायिक सागरजी महाराज के प्रति आभार व्यक्त किया। वहीं विशेषांक के प्रायोजक विजयलाल कोठारी एवं सुलोचना कोठारी के प्रति साधुवाद ज्ञापित किया गया।

आचार्यश्री ने दिया मंगल आशीर्वाद

आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज ने मुनि दर्पण निःशुल्क मासिक पत्रिका के प्रकाशन कार्य की सराहना करते हुए संपादक मंडल को मंगल आशीर्वाद प्रदान किया। उन्होंने कहा कि धार्मिक साहित्य समाज को संस्कार, संयम और साधना की दिशा में आगे बढ़ाने का प्रभावी माध्यम है।

संचालन और आभार

कार्यक्रम का संचालन उपाध्याय मुनि श्री पीयूष सागरजी महाराज ने किया। अंत में जयंतीलाल सेठ ने सभी अतिथियों, सहयोगियों एवं उपस्थित श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया।

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