आगरा में आचार्यश्री निर्भयसागर जी महाराज के सान्निध्य में आयोजित भव्य पाठशाला सत्र में 250 बच्चों ने भाग लिया। अष्ट द्रव्य पूजन, सम्मान समारोह, प्रेरक प्रवचन और वृक्षारोपण अभियान के माध्यम से धर्म, संस्कार और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया। आगरा से पढ़िए, शुभम जैन की यह खबर
आगरा। वैज्ञानिक संत आचार्यश्री निर्भयसागर जी महाराज ससंघ के मंगल सान्निध्य में रविवार को श्री महावीर दिगम्बर जैन मंदिर स्थित आचार्य विद्यासागर संत निलय, डी-ब्लॉक कमला नगर में भव्य नैतिक एवं धार्मिक मोटिवेशनल पाठशाला सत्र का आयोजन हुआ। कार्यक्रम श्रद्धा, उत्साह और आध्यात्मिक वातावरण के बीच सम्पन्न हुआ, जिसमें नगर की विभिन्न जैन पाठशालाओं के विद्यार्थी, शिक्षक, व्यवस्थापक और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
250 बच्चों ने दिखाई धर्म के प्रति आस्था
सेक्टर-7 कमला नगर, शालीमार एन्क्लेव, कर्मयोगी एन्क्लेव, छीपीटोला, ताजगंज, कालिंदी विहार, ट्रांसयमुना कॉलोनी, बेलनगंज और मोती कटरा सहित विभिन्न क्षेत्रों की पाठशालाओं के लगभग 250 बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। बच्चों की उपस्थिति और सहभागिता ने कार्यक्रम को भव्य स्वरूप प्रदान किया।
अष्ट द्रव्य पूजन से किया आचार्यश्री का सम्मान
कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण के साथ हुआ। इस अवसर पर बच्चों ने अष्ट द्रव्यों की आकर्षक थाल सजाकर आचार्यश्री निर्भयसागर जी महाराज का विधि-विधानपूर्वक पूजन किया। बच्चों की अनुशासित और संस्कारयुक्त प्रस्तुतियों ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। सौभाग्यशाली श्रद्धालुओं ने आचार्यश्री के चरणों का प्रक्षालन कर शास्त्र भेंट किए और उनका मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया।
प्रतिभाओं का हुआ सम्मान
सत्र के दौरान बच्चों ने धार्मिक, सांस्कृतिक और ज्ञानवर्धक गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लिया। विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को विशेष पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। साथ ही सभी पाठशालाओं के विद्यार्थियों, शिक्षकों और सहयोगियों को भी सम्मान स्वरूप उपहार प्रदान किए गए।
रावण के चरित्र से दी जीवन की सीख
अपने प्रेरणादायी प्रवचन में आचार्यश्री निर्भयसागर जी महाराज ने रावण के चरित्र का उल्लेख करते हुए कहा कि ज्ञान, शक्ति और वैभव होने के बावजूद यदि व्यक्ति में विनम्रता और संयम नहीं है तो उसका पतन निश्चित है। उन्होंने कहा कि रावण अत्यंत विद्वान और शक्तिशाली था, लेकिन अहंकार और कषायों ने उसके व्यक्तित्व को नष्ट कर दिया।
आचार्यश्री ने बच्चों को धर्म, संस्कार, सदाचार, संयम और विनम्रता को जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी। साथ ही माता-पिता और गुरुओं के प्रति सम्मान का भाव रखने का संदेश भी दिया।
पाठशालाएं बनाती हैं आदर्श नागरिक
आचार्यश्री ने कहा कि पाठशालाएं केवल धार्मिक शिक्षा का केंद्र नहीं हैं, बल्कि बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण की आधारशिला हैं। यहां प्राप्त संस्कार जीवनभर मार्गदर्शन करते हैं और व्यक्ति को आदर्श नागरिक बनने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों को नियमित रूप से धार्मिक और नैतिक शिक्षा से जोड़ने का आह्वान किया।
वृक्षारोपण अभियान से दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
कार्यक्रम के उपरांत भारतीय जैन संगठन जिला आगरा द्वारा विशेष वृक्षारोपण एवं पर्यावरण संरक्षण अभियान चलाया गया। बच्चों के साथ पौधारोपण किया गया तथा सहभागी पाठशालाओं को पौधे भेंट किए गए। बच्चों ने पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण और स्वच्छता के प्रति जागरूक रहने का संकल्प लिया।
वक्ताओं ने कहा कि वृक्षारोपण केवल एक अभियान नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का संकल्प है। पूरे आयोजन में धर्म, संस्कार, सेवा और पर्यावरण संरक्षण का सुंदर समन्वय देखने को मिला।
बड़ी संख्या में समाजजन रहे उपस्थित
कार्यक्रम का सफल संचालन मनोज बाकलीवाल ने किया। इस अवसर पर प्रदीप जैन पीएनसी, अभिनंदन जैन, मनोज जैन बाकलीवाल, जगदीश प्रसाद जैन, नरेश जैन, यशपाल जैन, सुभाष जैन, अनिल जैन, शैलेंद्र जैन, अंकेश जैन, अमित जैन चांदी, मंशु जैन, अंकित जैन, शुभम जैन, रेनू जैन, रश्मि गोयल, ईशु जैन सहित ग्रेटर कमला नगर जैन समाज के अनेक गणमान्य सदस्य एवं श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।यह समाचार बोलचाल की भाषा, छोटे-छोटे हेडिंग और वेब-पोर्टल प्रकाशन शैली में तैयार किया गया है।













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