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अशोकनगर में मुनि श्री सुधासागर जी संसघ का भव्य मंगल प्रवेश : पांच माह बाद आया है स्वर्णिम अवसर, भक्तों ने की भावपूर्ण अगवानी


अशोकनगर का इसे भाग्य कहे या फिर पुण्य की तीव्रता की यहां मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज संसघ का पांच माह बाद पुनः एक बार मंगल सौभाग्य मिला। मुनिश्री की अगवानी में पूरा अशोकनगर जैन समाज उमड़ पड़ा। अशोकनगर से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर…


अशोकनगर। अशोकनगर का इसे भाग्य कहे या फिर पुण्य की तीव्रता की यहां मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज संसघ का पांच माह बाद पुनः एक बार मंगल सौभाग्य मिला। मुनिश्री की अगवानी में पूरा अशोकनगर जैन समाज उमड़ पड़ा। मुनि श्री का मंगल विहार मुंगावली से हुआ। बहादुरपुर, बंगला चौराहे, अथाईखेड़ा और भादोंन होते हुए शुक्रवार की सुबह विदिशा रोड से मुनिश्री की मंगल आगवानी की समाजजनों ने भव्यतम अगवानी की। इस अवसर पर शोभायात्रा त्रिदेव मंदिर, विदिशा रोड से प्रारंभ होकर एचडीएफसी चौराहा, पुराना बस स्टैंड, मिलन चौराहा, गांधी पार्क, स्टेशन रोड होते हुए सुभाष गंज मंदिर प्रांगण में पहुंची। इस शोभायात्रा में मुनिसंघ की आगवानी के लिए विशाल जन समूह साथ रहा। इस अवसर पर सिरोंज, गुना, मुंगावली, आरोन, शाढ़ौरा के सेवादलों के दिव्य घोष के साथ उज्जैन से विशेष रूप से अगवानी के लिए भक्त मंडली ने भव्य प्रस्तुति दी। महिला संगठनों की विशेष प्रस्तुति भी आगवानी की शोभा रही। मुनि श्री संघ की आहार चर्चा भादोंन में हुई थी।

108 थालियों से हुआ मुनि श्री का पाद प्रक्षालन 

मुनि श्री अगवानी के लिए नगर के जैन सहित जैनेतर लोग भी पलके पावड़े बिछाए रहे। मध्य प्रदेश महासभा के संयोजक विजय धुरा ने बताया कि मुनि श्री का पांच माह बाद पुनः नगरागमन हुआ। जिसमें गांधी पार्क से आचार्य श्री विद्यासागर द्वार ( गंज गेट) तक मुनिश्री के पाद प्रक्षालन के लिए रेम्प तैयार किया गया। इस पर 108 परिवार द्वारा पूज्य श्री का पाद प्रक्षालन किया गया। विशाल संघ ने श्री आदिनाथ धाम गंज मंदिर जी में प्रवेश किया।

धन का महत्व जीवन पर हावी नहीं हो

इस दौरान मुनि श्री सुधासागरजी महाराज ने कहा कि धन जीवन पर हावी नहीं होना चाहिए। धन का महत्व दैनिक जीवन की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए है। जीवन में सुख पाने के लिए धन नहीं ध्यान की जरूरत है। सरलता के साथ सुख से रहा जा सकता है। आज लोग का जीवन भौतिकता से भर गया है। धन साधन को पैदा करता है। साधन साधना में वादा बन जाती है। जब तक अपने जीवन को सादगी की ओर ले जाते हैं तो एक आत्मिक शांति आप अपने चारों ओर महसूस करेंगे। कितने ही साधन आपको मिल जाए वह शांति नहीं दे सकते हैं, जो सादगी और प्राकृतिक चीजें आपको देती हैं। आज हम प्राकृतिक चीजें से दूर होते जा रहे हैं और आज की दुनिया में खुलते जा रहे हैं। जिससे हमारे जीवन में सुख दूर होता जा रहा है और परेशानी बढ़ रही है।

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