समाचार

अशोक नगर के भक्तों ने किए मुनिश्री सुधासागर जी को श्रीफल भेंट : महापूजन कर नगर पधारने का किया निवेदन 


मेरा काम बने दुनिया से मुझे कोई मतलब नहीं है ये खतरनाक विचार हैं। हम अपने, पड़ोसी समाज और नगर के हित के लिए क्या सोच रहे हैं ये विचार करना है। यह उद्गार रामलीला मैदान बहादुरपुर में धर्मसभा में मुनि पुगंव श्री सुधासागरजी ने व्यक्त किए। अशोकनगर से पढ़िए, यह खबर…


अशोक नगर। मेरा काम बने दुनिया से मुझे कोई मतलब नहीं है ये खतरनाक विचार हैं। हम अपने, पड़ोसी समाज और नगर के हित के लिए क्या सोच रहे हैं ये विचार करना है। यह उद्गार रामलीला मैदान बहादुरपुर में धर्मसभा में मुनि पुगंव श्री सुधासागरजी ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि आज मुझे आप मंदिर से उठाकर रामलीला मंच पर लाए हैं। सभी लाभ लेना चाहते हैं। सौभाग्य से आप महापुरुषांे की कर्मभूमि भारत में जन्मे हैं। जहां आप भगवान से अपने सुख की कामना करते हैं। तीन लोक के नाथ से भी आप अपने लिए सुख चाह रहे हैं। थोड़ा दुःख आया तो रोना शुरू कर देते हैं। हमारी संस्कृति भूखे उठाती है लेकिन, पेटभर कर ही सुलाती है। मुझे सुखी होना चाहिए, इसमें कोई दिक्कत नहीं है होना ही चाहिए। इसके साथ एक भावना और जोड़ दो दूसरे भी सुखी रहें।

तुम अपने साथ कितने लोगों के लिए जोड़ सकते हैं

इस दौरान मुनिश्री ने कहा कि तुम अपनों के साथ कितनों को और जोड सकते हो। तुम कितनों को सुखी कर सकते हो। मैंने पहले कहा कि तुम कितने लोगों के लिए सुख के लिए प्रार्थना कर सकते हैं। सुखी हो आप लोग को महाराज से लाभ है और कितनों लोगों को महाराज जी का आशीर्वाद मिले। परिवार को सुख मिले ऐसी प्रार्थना करने वाले ही मनुष्य जन्म को प्राप्त करते हैं।

जो दुसरों को दुख देकर अपने सुख की कामना ठीक नहीं

जो दुसरो को दुखी करके अपनो को और अपने परिवार को सुख चाहते हैं। वे सुखी नहीं हो सकते। कड़वा सच तो ये है कि ऐसे लोग तिर्यच अर्थात पशु पर्याय में चले जाते हैं। अपनों से प्यार करना पशुओं के लक्षण है। यदि तुम्हारे मन ये लक्षण दिखे तो मानकर चलना कि आप मरकर पशु योनि में जाएंगे, ये कड़वा सच है। तीसरा व्यक्ति वह है जो अपनो से बाहर हटकर पड़ोसी को सुखी करने का भाव करें जो मेरे नगर के लोग को मेरा देश के लोग के सुख की कामना करे, मेरा जिला मेरा मोहल्ला सुखी रहे आज मैं उनकी बात कर रहा हूं। जिनसे मेरे खून का संबंध नहीं है फिर भी मैं उनके सुख की कामना करता हूं। अपने पड़ोसी को भी आशीर्वाद मिले। इस मोहल्ले में किसी की आंख में आंसू ना आए। अपने नगर की तरफ से फरियाद करना नगर और पड़ोसी को सुखी करने की प्रार्थना करने वाले जीते जी देवता कहलाते हैं और और ये मरकर देव पर्याय को प्राप्त करते हैं।

हम सब की भावना गुरु चरण अशोक नगर में पड़ें

इसके पहले धर्मसभा में मध्यप्रदेश महासभा के संयोजक विजय धुर्रा ने कहा कि आज अशोक नगर जिला जैन समाज अध्यक्ष राकेश कांसल, महामंत्री राकेश अमरोद, कोषाध्यक्ष सुनील अखाई के नेतृत्व में सैकड़ों भक्तों को लेकर इस भावना से महा पूजन करने आए हैं कि मुनिश्री सुधा सागर जी के चरण अशोक नगर की ओर बढ़ चलें। इसके बाद जैन समाज के मंत्री शैलेंद्र श्रागर के मधुर भजनों के साथ महापूजन हुआ। इसमें स्थापना अध्यक्ष राकेश कांसल, महामंत्री राकेश अमरोद, कोषाध्यक्ष सुनील अखाई, थूवोनजी अध्यक्ष अशोक जैन, टींगू मिल सहित अन्य भक्तों ने की। इसके साथ ही सभी भक्तों ने पूजन कर महा अर्घ्य समर्पित करते हुए अशोक नगर आगमन की भावना रखते हुए श्रीफल भेंट किए।

अशोक नगर जैन समाज ने श्रीफल भेंट किया 

आहार चर्या के बाद अशोक नगर जैन समाज ने नगर आगमन की भावना करते हुए मुनिश्री सुधासागरजी ससंघ को श्री फल भेंट किए जैन समाज अध्यक्ष राकेश कांसल ने कहा कि हम सब की इच्छा है कि अशोक नगर में श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर के तत्वावधान में राष्ट्रीय स्तर के शिविर का भव्य आयोजन हो, ये सौभाग्य अशोक नगर को मिले। इस दौरान जैन समाज के मंत्री शैलेन्द्र श्रागर ने भजनों की प्रस्तुति देते हुए कहा कि हम सब को पुनः सौभाग्य मिले। इस दौरान उपाध्यक्ष अजित बरोदिया, प्रदीप तारई, महामंत्री राकेश अमरोद, कोषाध्यक्ष सुनील अखाई, मीडिया प्रभारी अरविंद कचनार, ऑडिटर संजय केटी, संयोजक उमेश सिंघई, संयोजक मनोज रन्नौद, मनीष सिंघई, श्रेयांस घैला, थूवोनजी अध्यक्ष अशोक जैन टींगू, महामंत्री मनोज भैसरवास, कोषाध्यक्ष प्रमोद मंगलदीप, मंत्री शैलेंद्र दददा, मंत्री राजेंद्र हलवाई, पूर्व महामंत्री विपिन सिंघई, हेमंत टडैया, जैन सोशल ग्रुप ( सास्वत), जैन युवा वर्ग समन्वय ग्रुप, अरिहंत गुप, जैन मिलन, भक्तामर मंडल गांव मंदिर, पार्श्वनाथ जैन मिलन, विद्या सुघामय सेवा संगठन सहित सभी महिला मंडल ने श्रीफल भेंट किए।

आप को यह कंटेंट कैसा लगा अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।
+1
0
+1
0
+1
0
Shree Phal News

You cannot copy content of this page