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भक्ति और ज्ञान का अनूठा संगम: डडूका में बच्चों ने मनाया भगवान शांतिनाथ का जन्म, तप और मोक्ष कल्याणक पर्व


अध्यात्म और संस्कारों की पावन भूमि बांसवाड़ा के डडूका क्षेत्र में जैन धर्म के 16वें तीर्थंकर देव, देवाधिदेव भगवान शांतिनाथ स्वामी का जन्म, तप और मोक्ष कल्याणक पर्व अपूर्व श्रद्धा, उल्लास और भक्तिभाव के साथ मनाया गया। बांसवाड़ा से पढ़िए, अजीत कोठिया की यह रिपोर्ट…


बांसवाड़ा (राजस्थान)। अध्यात्म और संस्कारों की पावन भूमि बांसवाड़ा के डडूका क्षेत्र में जैन धर्म के 16वें तीर्थंकर देव, देवाधिदेव भगवान शांतिनाथ स्वामी का जन्म, तप और मोक्ष कल्याणक पर्व अपूर्व श्रद्धा, उल्लास और भक्तिभाव के साथ मनाया गया। दिगंबर जैन पाठशाला डडूका के तत्वावधान में आयोजित इस पावन प्रसंग पर संपूर्ण वातावरण जिनेंद्र प्रभु की भक्ति के रंग में सराबोर नजर आया। उत्सव का शुभारंभ प्रातः काल की पावन बेला में हुआ। पाठशाला के नन्हे-मुन्ने बच्चों ने परम विशुद्धि के साथ जिनालय (जैन मंदिर) में प्रवेश किया। बालकों ने पूरी विधि-विधान और पावन मंत्रोच्चार के बीच श्री जी (भगवान शांतिनाथ) का मंगल जलाभिषेक किया। छोटे-छोटे हाथों से भगवान का अभिषेक होते देख उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं का हृदय भी अहोभाव और भक्ति से भर उठा। बच्चों की इस क्रिया ने सभी को संस्कारों की महत्ता का अहसास कराया।

सायं काल ज्ञानवर्धन और रोचक प्रश्नमंच

दिनभर के भक्तिमय माहौल के बाद, शाम को पाठशाला परिसर में एक विशेष ज्ञानवर्धक सत्र का आयोजन किया गया। पाठशाला के प्रेरकों के मार्गदर्शन में भगवान शांतिनाथ के तीनों कल्याणकों (जन्म, तप और मोक्ष) पर आधारित एक अत्यंत रोचक प्रश्नमंच (क्विज) प्रतियोगिता हुई। इस प्रतियोगिता में बच्चों ने बड़े ही उत्साह के साथ भाग लिया और अपनी धार्मिक बुद्धिमत्ता का परिचय दिया।

पांच कल्याणकों की मंगलमय देशना

कार्यक्रम के दौरान पाठशाला प्रेरकों ने बच्चों को जैन दर्शन के अनुसार तीर्थंकर भगवंतों के जीवन से जुड़े सभी पांचों कल्याणकों गर्भ, जन्म, तप, ज्ञान और मोक्ष के बारे में विस्तार से मंगलमय जानकारियां साझा कीं। बच्चों को बताया गया कि किस तरह तीर्थंकर प्रभु का जीवन हमें त्याग, संयम और आत्म-कल्याण का मार्ग दिखाता है। इस पूरे आयोजन में 22 नौनिहालों ने पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लेकर धर्म लाभ लिया।

वार्षिक परीक्षा की घोषणा

कार्यक्रम के समापन पर बच्चों के ज्ञान के मूल्यांकन के लिए आगामी धार्मिक गतिविधियों की घोषणा भी की गई। प्रेरकों ने सभी विद्यार्थियों को सूचित किया कि पाठशाला की ग्रीष्मकालीन वार्षिक परीक्षाओं का आयोजन आगामी 1 से 5 जून के मध्य किया जाएगा। सभी बच्चों को इसके लिए अभी से लगन पूर्वक तैयारी करने की प्रेरणा दी गई।

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