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सिंहोनिया जी में 15 मई को भगवान शांतिनाथ का होगा महामस्तिकाभिषेक: महोत्सव, विश्व शांति के लिए प्रतिदिन हो रही शांतिधारा, चढ़ाया जाएगा निर्वाण लाडू 


ऐतिहासिक श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र सिंहोनिया जी इन दिनों धर्म, भक्ति और आध्यात्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। यहां प्रतिदिन विश्व शांति, जनकल्याण, आत्मिक सुख-समृद्धि और मानव कल्याण की मंगल कामनाओं के साथ भगवान शांतिनाथ का अभिषेक एवं शांतिधारा श्रद्धापूर्वक की जा रही है। अंबाह से पढ़िए, अजय जैन की यह रिपोर्ट…


अंबाह। ऐतिहासिक श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र सिंहोनिया जी इन दिनों धर्म, भक्ति और आध्यात्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। यहां प्रतिदिन विश्व शांति, जनकल्याण, आत्मिक सुख-समृद्धि और मानव कल्याण की मंगल कामनाओं के साथ भगवान शांतिनाथ का अभिषेक एवं शांतिधारा श्रद्धापूर्वक की जा रही है। देश के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंच रहे जैन श्रद्धालु भगवान की आराधना कर आत्मिक शांति एवं आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव कर रहे हैं। मंदिर परिसर में सुबह से ही पूजा, अभिषेक, आरती और शांतिधारा का धार्मिक वातावरण श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर देता है। सोमवार को भी मौजूद भक्तों ने शांतिधारा कर जगत कल्याण की कामना की। 15 मई को भव्य धार्मिक कार्यक्रम किया जाएगा, जिसकी तैयारियां जारी है। ज्ञात रहे कि जैन तीर्थ सिंहोनिया जी का इतिहास अत्यंत गौरवशाली माना जाता है। यह क्षेत्र प्राचीन काल से जैन धर्म की आस्था और साधना का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। यहां विराजमान भगवान श्री शांतिनाथ की अतिशयकारी प्रतिमा श्रद्धालुओं की विशेष आस्था का केंद्र है। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से की गई प्रार्थना और शांतिधारा से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा मानसिक शांति प्राप्त होती है। वर्षों से यह क्षेत्र जैन संस्कृति, अहिंसा, तप और धर्म साधना का संदेश देता आ रहा है।

भगवान शांतिनाथ की शांतिधारा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं

कमेटी के संरक्षक एवं पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष जिनेश जैन ने बताया कि वर्तमान समय में मनुष्य भौतिक सुख-सुविधाओं के बावजूद मानसिक तनाव, चिंता, अशांति और प्रतिस्पर्धा से घिरा हुआ है। ऐसे समय में धर्म और प्रभु भक्ति ही मनुष्य को वास्तविक शांति प्रदान कर सकती है। उन्होंने कहा कि भगवान शांतिनाथ की शांतिधारा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मा को भीतर से शुद्ध करने का माध्यम है। जब श्रद्धालु शांत मन से प्रभु के चरणों में प्रार्थना करते हैं, तो उनके भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और जीवन में संयम, धैर्य तथा संतोष की भावना विकसित होती है। जिनेश जैन ने कहा कि आज समाज में तनाव, आपसी मतभेद और मानसिक अशांति लगातार बढ़ रही है। परिवारों में संवाद कम हो रहा है और व्यक्ति अकेलेपन की ओर बढ़ता जा रहा है। ऐसे समय में धार्मिक आयोजन लोगों को एकजुट करने और सकारात्मक दिशा देने का कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि शांतिधारा के दौरान विश्व शांति, राष्ट्र कल्याण, परिवार की सुख-समृद्धि और मानवता के मंगल की कामना की जाती है। यह भावना केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं रहती, बल्कि पूरे समाज और विश्व के लिए कल्याणकारी बनती है।

शांतिधारा आत्मशुद्धि और लोककल्याण का अद्भुत माध्यम

मंदिर से जुड़े आशीष जैन सोनू एवं रविंद्र जैन टिल्लू ने बताया कि शांतिधारा आत्मशुद्धि और लोककल्याण का अद्भुत माध्यम है। इससे मन में शांति, प्रेम और सद्भाव की भावना उत्पन्न होती है। उन्होंने कहा कि जब श्रद्धालु प्रभु के समक्ष बैठकर भक्ति करते हैं, तो उनके भीतर का तनाव स्वतः समाप्त होने लगता है और जीवन में सकारात्मकता आती है। वहीं संजय जैन एवं विवेक जैन बंटी ने कहा कि प्रभु भक्ति व्यक्ति को संस्कारवान बनाती है। धार्मिक आयोजनों से नई पीढ़ी को संस्कृति और धर्म से जुड़ने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि शांतिधारा एवं अभिषेक से भय, अशांति और नकारात्मकता दूर होती है तथा जीवन आनंदमय बनता है।

मंदिर परिसर में व्यापक तैयारियां चल रही 

नीलेश जैन ने बताया कि आगामी 15 मई 2026, शुक्रवार को जेठ वदी चौदस के पावन अवसर पर भगवान श्री 1008 शांतिनाथ का निर्वाण लाडू एवं महामस्तिकाभिषेक महोत्सव भव्य रूप से आयोजित किया जाएगा। आयोजन को लेकर मंदिर परिसर में व्यापक तैयारियां चल रही हैं। सजावट, पूजन व्यवस्था, भोजनशाला, जल व्यवस्था और श्रद्धालुओं के स्वागत की व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। कार्यक्रम के अनुसार प्रातः 7 बजे से सामूहिक अभिषेक पूजन होगा। इसके पश्चात प्रातः 8 बजे से श्री शांतिनाथ महामंडल विधान प्रारंभ होगा तथा प्रातः 10 बजे से निर्वाण लाडू एवं महामस्तिकाभिषेक किया जाएगा। आयोजन समिति द्वारा पधारने वाले सभी श्रद्धालुओं के लिए निःशुल्क भोजन व्यवस्था भी की गई है।

आयोजन को लेकर विशेष उत्साह 

सकल दिगंबर जैन समाज अंबाह एवं मुरैना सहित आसपास के क्षेत्रों के श्रद्धालुओं में आयोजन को लेकर विशेष उत्साह दिखाई दे रहा है। समिति ने सभी धर्मप्रेमी बंधुओं से सपरिवार उपस्थित होकर धर्म लाभ एवं पुण्यार्जन करने की अपील की है आयोजकों का कहना है कि ऐसे धार्मिक आयोजनों से समाज में आध्यात्मिक चेतना, संस्कार, एकता और मानव कल्याण की भावना को बल मिलता है।

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