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लुधियाना में मनाया आचार्य पद चादर समारोह दिवस : आचार्य शिवमुनि जी के नेतृत्व में श्रमण संघ धर्म प्रभावना में अग्रसर-दिनेश मुनि


श्रमण संघ के चतुर्थ पट्टधर आचार्य सम्राट डॉ. श्री शिवमुनि जी म.सा. के 26 वें आचार्य पद चादर समारोह दिवस पर हुई धर्मसभा में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना का वातावरण देखने को मिला। लुधियाना शहर के न्यू किचलूनगर स्थित जैन स्थानक में हुए समारोह में संतों एवं श्रद्धालुओं ने आचार्य भगवंत के आध्यात्मिक नेतृत्व और समाजोत्थान में उनके योगदान का स्मरण किया। लुधियाना से पढ़िए, यह खबर….


लुधियाना। श्रमण संघ के चतुर्थ पट्टधर आचार्य सम्राट डॉ. श्री शिवमुनि जी म.सा. के 26 वें आचार्य पद चादर समारोह दिवस पर हुई धर्मसभा में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना का वातावरण देखने को मिला। लुधियाना शहर के न्यू किचलूनगर स्थित जैन स्थानक में हुए समारोह में संतों एवं श्रद्धालुओं ने आचार्य भगवंत के आध्यात्मिक नेतृत्व और समाजोत्थान में उनके योगदान का स्मरण किया। इस अवसर पर श्रमण संघीय सलाहकार दिनेश मुनि ने कहा कि आचार्य संघ का नायक और अनुशासन का केंद्र होता है। साधु-साध्वी आचार्य की आज्ञा में विचरण करते हुए धर्म प्रभावना, साधना और लोक कल्याण के कार्य करते हैं। आचार्य की मर्यादा एवं निर्देश ही संघ को एक सूत्र में बांधकर आगे बढ़ाते हैं। उन्होंने बताया कि आचार्य देवेंद्र मुनि जी के स्वर्गवास के बाद श्रमण संघ के चतुर्थ पद पर आचार्य शिवमुनि जी महाराज विराजमान हुए। उनके नेतृत्व में संघ ने आध्यात्मिक साधना, अनुशासन और धर्म प्रचार के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को प्राप्त किया। सलाहकार दिनेश मुनि ने कहा कि आचार्य शिवमुनि जी महाराज का जन्म पंजाब में हुआ और उन्होंने ध्यान साधना को पुनर्जीवित कर समाज को नई दिशा प्रदान की। आज उनकी प्रेरणा से लाखों लोग ध्यान साधना के माध्यम से मानसिक शांति और आत्मिक ऊर्जा प्राप्त कर रहे हैं।

समाज में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिला
मुनिश्री ने कहा कि वर्तमान में आचार्य श्री की आज्ञा में लगभग 1300 साधु-साध्वी कश्मीर से कन्याकुमारी तथा अटक से कटक तक पद विहार करते हुए भगवान महावीर स्वामी के सिद्धांतों और श्रमण संघ के नियमों का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। संत समाज गांव-गांव और शहर-शहर पहुंचकर लोगों को व्यसनमुक्ति, शाकाहार, सात्विक जीवन शैली, नैतिकता और सदाचारयुक्त जीवन जीने का संदेश दे रहा है। वर्तमान समय में मनुष्य मानसिक तनाव, अशांति और भौतिकता के दबाव से घिरा हुआ है। ऐसे दौर में आचार्य शिवमुनि जी द्वारा प्रेरित ध्यान साधना लाखों लोगों के लिए आत्मिक शांति और मानसिक संतुलन का माध्यम बनी है। उनके मार्गदर्शन में संचालित ध्यान शिविरों एवं आध्यात्मिक अभियानों से समाज में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिला है।नवकार मंत्र के तीसरे पद पर आचार्य को नमस्कार किया जाता है

उन्होंने आगे कहा कि आचार्य का जीवन केवल व्यक्तिगत साधना तक सीमित नहीं होता, बल्कि वह संपूर्ण मानवता के कल्याण का पथ प्रदर्शित करता है। आचार्य भगवंत अपने संयम, ज्ञान, तप और त्याग से समाज को नैतिकता, अहिंसा और आत्मअनुशासन की प्रेरणा देते हैं। संघ के साधु-साध्वी उनके निर्देशों का पालन करते हुए धर्म प्रभावना और लोककल्याण के कार्यों में निरंतर संलग्न रहते हैं। वक्ताओं ने कहा कि आज जब समाज भौतिकता और तनाव से प्रभावित है, ऐसे समय में श्रमण संघ द्वारा दिया जा रहा संयम, अहिंसा और आत्मशुद्धि का संदेश मानवता के लिए अत्यंत आवश्यक है। आचार्य शिवमुनि जी के मार्गदर्शन में संघ केवल धार्मिक चेतना ही नहीं, बल्कि सामाजिक जागृति और नैतिक मूल्यों के संरक्षण का भी कार्य कर रहा है। नवकार मंत्र के मंत्रोच्चार से शुभारंभ समारोह में डॉ दीपेंद्र मुनि ने का कि नवकार मंत्र के तीसरे पद पर आचार्य को नमस्कार किया जाता है क्यूँकि आचार्य संघ के संचालन करने वाले होते हैं। समारोह में न्यू किचलूनगर संघ अध्यक्ष दिनेश जैन, मंत्री राजेन्द्र जैन, विजय जैन (जैन पैकवेल) लालचंद जैन, महावीर युवक मंडल के अध्यक्ष वरूण जैन (दीपसंस) सहित शहर के गणमान्य श्रद्धालुओं ने मंगलकामना व्यक्त करते हुए कहा कि आचार्य भगवंत का दिव्य मार्गदर्शन, तप और ज्ञान सदैव मानवता का पथ आलोकित करता रहे तथा उनके सान्निध्य से समाज में धर्म और संस्कारों की ज्योति निरंतर प्रज्वलित होती रहे।

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