आचार्यश्री आनंद सागरजी महाराज के कर कमलों से बुधवार को होने जाने वाली संयम मेहता के दीक्षा समारोह के तहत निकाली गई वर्षीदान यात्रा ऐतिहासिक रही। जिसमें जैन समाज का ही नहीं अपितु संपूर्ण रामगंज मंडी का सहयोग प्राप्त हुआ। पूरी नगरी वैराग्य की ओर अग्रसर संयम मेहता को नमन कर रही थी। रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर…
रामगंजमंडी। आचार्यश्री आनंद सागरजी महाराज के कर कमलों से बुधवार को होने जाने वाली संयम मेहता के दीक्षा समारोह के तहत निकाली गई वर्षीदान यात्रा ऐतिहासिक रही। जिसमें जैन समाज का ही नहीं अपितु संपूर्ण रामगंज मंडी का सहयोग प्राप्त हुआ। पूरी नगरी वैराग्य की ओर अग्रसर संयम मेहता को नमन कर रही थी। जगह-जगह उनका स्वागत किया जा रहा था। इस अलौकिक यात्रा में आचार्यश्री आनंद सागरजी महाराज एवं समस्त साधु संघ सम्मिलित रहा। युवा शक्ति महिला शक्ति भक्तिमय भजनों पर झूमते हुए चल रहे थे। ऐसी दिव्य यात्रा रामगंज मंडी के इतिहास में कभी नहीं देखी गई। मानो लग रहा था संपूर्ण रामगंज मंडी वैराग्य की मूर्ति को नमन कर रही हो। इस दिव्य शोभायात्रा का आकर्षण का केंद्र बिंदु वह रहा जब दीक्षार्थी संयम मेहता स्वयं अपने हाथों से धन वैभव संपदा लुटाते हुए चल रहे थे। वे संपूर्ण सांसारिक वैभव का त्याग करते हुए नजर आ रहे थे। सभी के लिए यही आकर्षण था कि 15 वर्ष का यह बालक संपूर्ण संसार से विरक्ति ले रहा है। आदिनाथ जैन श्वेतांबर मंदिर से प्रारंभ हुई है यात्रा नगर के प्रमुख मार्गाे से होते हुए खैराबाद रोड स्थित कंचन सिटी पहुंची। जहां भव्य समारोह आयोजित हुआ। जिसमें लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला एवं वरिष्ठ नेता श्री पंकज मेहता मौजूद रहे।
रामगंजमंडी की धरा पर नया इतिहास बनाः आचार्यश्री आनंद सागरजी
दीक्षा स्थल कंचन सिटी पर सर्वप्रथम बोलते हुए आचार्यश्री आनंद सागरजी महाराज ने रामगंजमंडी की भक्ति श्रद्धा आस्था की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि रामगंजमंडी की धरा पर एक नया इतिहास रचा गया। इसमें जैन समाज ही नहीं अपितु संपूर्ण मंडी मौजूद रही। इस शोभायात्रा में मंदसौर का बैंड भक्तिमय भजनों से ओत कर रहा था। वहीं नलखेड़ा से आया महिला समूह गरबा नृत्य कर रहा था। इन अलौकिक पलांे में नागेश्वर तीर्थ से आया दिव्य घोष वातावरण में नई ऊर्जा को प्रस्फुटित कर रहा था। पंजाब से आया बैंड अपनी प्रस्तुति दे रहा था। आचार्य श्री ने कहा कि मानो लग रहा था कि स्वर्ग लोक के मेघकुमार और वायु कुमार रामगंजमंडी पधारकर इस कार्यक्रम की अनुमति दे रहे हों। महाराज श्री ने कहा कि रामगंज में मंडी की धरती मानव आनंदित हो रही हो और कह रही हो कि गुरुदेव रामगंज मंडी की यात्रा एक बार और हो…।
रामगंज मंडी की धार महान…
आचार्यश्री ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला एवं संयम मेहता की ओर ध्यान इंगित करते हुए कहा कि एक और सांसद बनकर बिरला देश की सेवा कर रहे हैं। वहीं संयम मुमुक्षु बनकर आत्म कल्याण की और बढ़ रहा है। उन्होंने कहा संसद मंे वह पहुंचता है, जिसे पब्लिक चुनती है दीक्षा वह लेता है, जिसे भगवान पूछते हैं। उन्होंने कहा संयम के दीक्षा के भाव हो रहे हैं और बिरला के देश सेवा के भाव हो रहे हैं। उन्होंने बंगाल चुनाव की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि बंगाल चुनाव के परिणाम यह बताते हैं कि अब देश हिंदू राष्ट्र की ओर आगे बढ़ रहा है। आज सभी मन में यही सोचा कि संयम 15 साल में दीक्षा ले सकता है तो हम क्यों नहीं। उन्होंने बिरला को अपना मंगल आशीर्वाद दिया।
संयम मेहता संयम की ओर अपने जीवन को समर्पित कर रहा
वर्षीदान समारोह की बेला में धर्मसभा में बिरला का स्वागत किया गया। इस अवसर पर बिरला ने आचार्य श्री का आशीर्वाद लिया एवं अपनी ओर से दीक्षार्थी संयम मेहता का भी माला पहनकर स्वागत किया। अपने उद्बोधन में बिरला ने कहा कि आज हम सब दिव्य अलौकिक समारोह के अंतर्गत सम्मिलित हैं। संयम के विषय में बोलते हुए उन्होंने कहा कि संयम मेहता संयम की ओर अपने जीवन को समर्पित कर रहा है, जो सांसारिक जीवन में रहने वाले लोगों के अंदर दीपक की रोशनी का काम करेगा। नगर की धरती धन्य है यहां पहले बहन ने दीक्षा ली और अब भाई भी दीक्षा लेकर अपने जीवन को भगवान की ओर समर्पित कर रहा है। कम उम्र में आध्यात्मिक का दीपक जलना बहुत बड़ी बात है। परिवार के माता-पिता धनी हैं जिनकी संतान तपस्या के मार्ग पर चलती है माता-पिता के संस्कारों से ही हो पता है। बिरला ने कहा मैं अपना सौभाग्य मानता हूं कि मुझे गुरुदेव के दर्शन मिले और ऐसे माता-पिता और दादा दादी के दर्शन मिले और गुरुदेव का आशीर्वाद मिला। गुरुदेव भी हजारों किमी चलकर रामगंजमंडी आए।
आचार्य श्री आनंदचंद्र सागर सूरी जी महाराज, मुनिवरगण एवं साध्वी श्रीजी के दर्शन और सानिध्य प्राप्त करने का सौभाग्य मिला। जिन शासन हमें यह दिव्य प्रेरणा देता है कि प्रत्येक आत्मा में परमात्मा बनने की क्षमता निहित है। आवश्यकता केवल संयम, साधना और पुरुषार्थ के मार्ग पर अग्रसर होने की है। दीक्षार्थी संयम मेहता ने अल्प आयु में ही इस सत्य को आत्मसात करते हुए संयम मार्ग को अपनाने का जो अद्भुत साहस और संकल्प दिखाया है, वह अत्यंत प्रेरणादायी है। मेहता परिवार, जिन्होंने अपनी संतानों को जिन शासन के चरणों में समर्पित कर समाज के समक्ष त्याग, आस्था और संस्कार का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया है, वे भी अभिनंदन के पात्र हैं। ईश्वर से प्रार्थना है कि संयम मेहता इस पावन मार्ग पर दृढ़तापूर्वक अग्रसर रहें और अपने आध्यात्मिक लक्ष्य को प्राप्त करें।













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