‘रागादि भावों की उत्पत्ति को हिंसा कहते हैं” जैसे गूढ़ सिद्धांतों को सहज भाषा में आत्मसात करते 2186 बच्चों और युवाओं के साथ सन्मति स्कूल छावनी में जैन युवा एवं बाल संस्कार शिक्षण शिविर के 11वें वार्षिक आयोजन शुभारंभ ध्वजारोहण से हुआ। इंदौर से पढ़िए, यह खबर…
इंदौर। ‘रागादि भावों की उत्पत्ति को हिंसा कहते हैं” जैसे गूढ़ सिद्धांतों को सहज भाषा में आत्मसात करते 2186 बच्चों और युवाओं के साथ सन्मति स्कूल छावनी में जैन युवा एवं बाल संस्कार शिक्षण शिविर के 11वें वार्षिक आयोजन शुभारंभ ध्वजारोहण से हुआ। 3 से 10 मई तक चलने वाले इस शिविर में इंदौर एवं आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में प्रतिभागी ऑनलाइन पंजीयन के माध्यम से जुड़े हैं। यंग जैन स्टडी ग्रुप द्वारा विगत 11 वर्षों से निरंतर आयोजित इस शिविर का संचालन माइक्रोसॉफ्ट अमेरिका में पूर्व डिज़ाइनर इंजीनियर रहे युवा विद्वान प्रकाश छाबड़ा के मार्गदर्शन में किया जा रहा है, जो परंपरा और तकनीक का अनूठा संगम प्रस्तुत कर रहा है। शिविर में प्रतिभागियों को जैन दर्शन के मूल तत्वों को आठ स्तरों में व्यवस्थित कर आधुनिक स्मार्ट कक्षाओं के माध्यम से समझाया जा रहा है। णमोकार मंत्र, पंच परमेष्ठि, चार कषाय क्रोध-मान-माया-लोभ, पंच पाप, देव शास्त्र गुरु, जीव-अजीव का भेद, कर्म सिद्धांत, विभिन्न गतियां तथा चार अनुयोग जैसे जटिल विषयों को अत्यंत सरल, रोचक और व्यावहारिक शैली में प्रस्तुत किया जा रहा है। यह शिविर केवल शिक्षा नहीं, बल्कि आत्मबोध की एक यात्रा बनता जा रहा है, जहां बच्चे ‘हम कौन हैं, कहां से आए हैं और जीवन का उद्देश्य क्या है’ जैसे प्रश्नों के उत्तर खोज रहे हैं।

सामूहिक पूजन, अनुशासन और समर्पण का संगम
शिविर प्रमुख प्रकाश छाबड़ा ने बताया कि प्रतिदिन प्रातः 6 बजे विभिन्न कॉलोनियों से बच्चों और युवाओं को बसों के माध्यम से लाया जाता है। सुबह 7 बजे सभी प्रतिभागी अष्ट द्रव्य के साथ सामूहिक पूजन करते हैं, जो श्रद्धा, अनुशासन और एकता का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करता है।
ध्वजारोहण का मिला सौभाग्य
इस आयोजन के ध्वजारोहण का सौभाग्य अशोक किरण जैन, सुनील मीना जैन, श्वेता संजय बंडी, नेहा पलाश बक्षी, अविनाश सेठी, विजित रामावत, निर्मला पहाड़िया, बिंदु निखिलेश पांड्या, सरोज सुरेश बड़जात्या, सुनील शाह, दिलीप दोषी, डॉ. हर्षल दीप्ति शाह आदि को प्राप्त हुआ। उल्लेखनीय है कि प्रातः 5 बजे से कार्यकर्ताओं की समर्पित टीम प्रीतेश जैन, अजय नीतू जैन, अजय मिंटा जैन, आमोद पहाड़िया, अमन जैन, रोहित जैन, तरुण जैन, खुशबू जैन,अंशुल जैन, अरिहंत जैन, अखिलेश रिंकल जैन, नरेश जैन, रितेश जैन, प्रमोद पहाड़िया, महेश जैन, आशीष जैन, सृष्टि जैन, किरण जैनसंपूर्ण व्यवस्थाओं में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। यह शिविर केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि संस्कार, संस्कृति और आत्मजागरण का सशक्त अभियान है, जो नई पीढ़ी को जड़ों से जोड़ते हुए उज्ज्वल भविष्य की ओर अग्रसर कर रहा है।













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