आचार्यश्री विनम्र सागर महाराज की शिष्या आर्यिका सिद्धमति माताजी नगर में विराजमान है। रविवार को प्रातः माता जी सानिध्य में वागड़ के बड़े बाबा आदिनाथ भगवान की शांतिधारा और अभिषेक किया गया। नौगामा से पढ़िए, सुरेशचंद्र गांधी की यह खबर…
नौगामा। आचार्यश्री विनम्र सागर महाराज की शिष्या आर्यिका सिद्धमति माताजी नगर में विराजमान है। रविवार को प्रातः माता जी सानिध्य में वागड़ के बड़े बाबा आदिनाथ भगवान की शांतिधारा और अभिषेक किया गया। अभिषेक के बाद माताजी के मंगल प्रवचन हुए। ईस्टोउपदेश ग्रंथ के माध्यम से माताजी ने कहा कि अपनी दृष्टि बदलो सृष्टि बदल जाएगी। हमारी सोच को सकारात्मक रखें, नकारात्मक नहीं। यह विचार बहुत ही गहरा और प्रेरणादायक है। जब हम अपनी दृष्टि (नजरिया) बदलते हैं तो हमारे लिए पूरी सृष्टि (दुनिया) का अनुभव बदल जाता है।
हमारी सोच सकारात्मकता का प्रभाव
अगर हम सकारात्मक नजरिया रखते हैं, तो हमें चुनौतियों में भी अवसर और लोगों में अच्छाइयां नजर आने लगती हैं। स्वयं से शुरुआत करें। दुनिया वैसी नहीं है जैसी वह है, बल्कि वैसी है जैसे हम उसे देखते हैं। हमारे विचार ही हमारे संसार का निर्माण करते हैं।
सेवा और करुणा
जब हमारी दृष्टि में दया और सेवा का भाव होता है, तो हमें हर जीव में ईश्वर का रूप दिखने लगता है। जैसे प्यासे पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था करना या बेसहारा पशुओं की सेवा करना यह सब एक उदार दृष्टि का ही परिणाम है।
एक छोटा सा उदाहरण
यदि हम केवल कांटों को देखेंगे, तो हमें गुलाब की खूबसूरती कभी महसूस नहीं होगी। लेकिन अगर हम फूलों पर ध्यान देंगे तो कांटों की उपस्थिति के बावजूद हमारा जीवन खुशबू से भर जाएगा। इस विचार से स्पष्ट है कि सच्ची प्रगति बाहरी दुनिया को बदलने से ज्यादा, अपने आंतरिक दृष्टिकोण को परिष्कृत करने में है। हमें कैसा भी निमित्त मिले हमें उसमें अनुकूलता बनानी चाहिए। इस अवसर पर रविवार को जैन पाठशाला के छात्रों द्वारा भक्ति भाव से पूजन किया गया। पूजन के बाद सभी को समाज की ओर से पुरस्कार वितरण किए। दोपहर में माता जी की सानिध्य में जिनवाणी का संरक्षण किया गया।













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