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संस्कारों की पाठशाला में गूँज रही श्रमण संस्कृति की गूंज : जबरी बाग नसिया में खेल-खेल में गढ़े जा रहे कल के ‘आदर्श’ नागरिक


गर्मी की छुट्टियों में जहां अधिकांश बच्चे मोबाइल और टीवी की दुनिया में खोए हैं, वहीं श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर ‘जबरी बाग नसिया’ में भक्ति, ज्ञान और संस्कारों की एक नई गंगा बह रही है। इंदौर से हरिहरसिंह चौहान की यह खबर पढ़िए…


इंदौर। गर्मी की छुट्टियों में जहां अधिकांश बच्चे मोबाइल और टीवी की दुनिया में खोए हैं, वहीं श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर ‘जबरी बाग नसिया’ में भक्ति, ज्ञान और संस्कारों की एक नई गंगा बह रही है। यहां आयोजित श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविर न केवल बच्चों के लिए, बल्कि युवाओं और बड़ों के लिए भी आत्मिक शांति और धर्म के वास्तविक बोध का केंद्र बन गया है। इस ग्रीष्मकालीन शिविर की सबसे बड़ी विशेषता इसका अनूठा स्वरूप है। यहां पाठशाला के नन्हे-मुन्ने बच्चों को बोझिल उपदेशों के बजाय मनोरंजन और खेलकूद के माध्यम से धर्म, संस्कृति और संस्कारों का पाठ पढ़ाया जा रहा है। बच्चों को यह सिखाया जा रहा है कि कैसे हमारे पर्व, परंपराएं और जीवन मूल्य आधुनिक जीवन में भी प्रासंगिक हैं।

सांगानेर के विद्वानों का मिला सानिध्य

शिविर में सांगानेर से पधारे विद्वान संकेत शास्त्री और सक्षम शास्त्री अपनी ओजस्वी वाणी और सरल मार्गदर्शन से बच्चों का भविष्य संवार रहे हैं। उनके सानिध्य में बच्चे न केवल धार्मिक क्रियाओं को सीख रहे हैं, बल्कि व्यक्तित्व विकास के गुर भी सीख रहे हैं। शिविर का मुख्य उद्देश्य ‘भारतीय संस्कृति का संरक्षण एवं संवर्धन’ है, ताकि आने वाली पीढ़ी अपनी जड़ों से मजबूती से जुड़ी रहे।

समाज में उत्साह की लहर

दर्शनी जैन, सारिका जैन और सपना जैन ने बताया कि इस शिविर को लेकर समाज में भारी उत्साह है। बच्चों के साथ-साथ बड़े और युवा भी उतनी ही श्रद्धा के साथ भाग ले रहे हैं। सुबह के सत्रों में जहाँ अनुशासन और ध्यान की प्रधानता होती है, वहीं शाम तक विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से बच्चों के भीतर छुपी प्रतिभा को निखारा जा रहा है। यह शिविर मात्र एक आयोजन नहीं, बल्कि एक ‘संस्कार क्रांति’ है, जो बच्चों को केवल सूचना नहीं बल्कि ‘दृष्टि’ प्रदान कर रहा है। यहाँ से निकले बच्चे निश्चित ही समाज और राष्ट्र के लिए एक बेहतर उदाहरण पेश करेंगे।

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