सोनागिर पहाड़ी पर स्थित चंद्रप्रभु मंदिर में हुई करीब 23 लाख रुपए की चोरी का पुलिस ने 23 दिन बाद खुलासा कर दिया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार करते हुए चोरी गया पूरा सामान बरामद कर लिया है। आरोपियों में दो दतिया जिले के स्थानीय बदमाश और एक अंतरराज्यीय चोर शामिल है। दतिया से पढ़िए, यह खबर…
दतिया। सोनागिर पहाड़ी पर स्थित चंद्रप्रभु मंदिर में हुई करीब 23 लाख रुपए की चोरी का पुलिस ने 23 दिन बाद खुलासा कर दिया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार करते हुए चोरी गया पूरा सामान बरामद कर लिया है। आरोपियों में दो दतिया जिले के स्थानीय बदमाश और एक अंतरराज्यीय चोर शामिल है। इस सनसनीखेज वारदात में चोर भगवान चंद्रप्रभु की 7.50 किलो वजनी चांदी की मूर्ति, 2.50 किलो का चांदी का सिंहासन, चार सातिये और फ्रेम सहित अन्य कीमती सामान ले गए थे। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, मामले की आधिकारिक घोषणा बुधवार को की जा सकती है। इस केस में फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट और साइबर सेल की अहम भूमिका रही। पुलिस ने 500 से अधिक संदिग्धों के फिंगरप्रिंट खंगाले, तब जाकर आरोपियों तक पहुंच सकी। तकनीकी और मैदानी जांच के आधार पर टीम ने छापेमार कार्रवाई कर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया।
स्थानीय बदमाशों की संलिप्तता का शक था
जांच में सामने आया कि घटना एसएएफ जवानों की गंभीर लापरवाही का नतीजा थी। एक जवान बिना सूचना के घर चला गया, दूसरा बीमार होकर अस्पताल पहुंच गया, जबकि तीसरा मंदिर में ड्यूटी के बजाय चौकी में सो गया। इसी का फायदा उठाकर चोरों ने वारदात को अंजाम दिया। सुबह मंदिर के माली ने टूटे ताले देखे, तब घटना का पता चला। पुलिस को शुरुआत से ही स्थानीय बदमाशों की संलिप्तता का शक था। चोरों को सीसीटीवी बंद होने और पहाड़ी के रास्तों की पूरी जानकारी थी। वारदात के बाद आरोपी अलग-अलग रास्तों से फरार हुए, जिससे डॉग स्क्वॉड भी एक सीमा के बाद आगे नहीं बढ़ सका।
सीसीटीवी चालू, पर रिकॉर्डिंग गायब
जांच में सामने आया कि मंदिर परिसर में कैमरे चालू थे, लेकिन 25 मार्च के बाद की रिकॉर्डिंग डीवीआर में नहीं मिली। यह सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। सितंबर 2022 में भी इसी मंदिर में हथियारबंद बदमाशों ने डकैती डाली थी। इसके बाद यहां पुलिस चौकी बनाई गई थी, लेकिन समय के साथ सुरक्षा व्यवस्था कमजोर पड़ गई। चोरी गई चांदी की मूर्ति नवंबर 2025 में ग्वालियर में हुए पंचकल्याण महोत्सव के दौरान दान में मिली थी, जबकि सिंहासन दिल्ली के एक दानदाता ने भेंट किया था। दिसंबर 2025 में इनकी स्थापना मंदिर में की गई थी।
इनाम भी किया गया था घोषित
आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए जैन समाज की ओर से 1.10 लाख रुपए का इनाम घोषित किया गया था। पुलिस अधिकारियों ने भी अलग से इनाम रखा था। यह घटना सिर्फ चोरी नहीं, बल्कि धार्मिक स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल है। जहां लाखों श्रद्धालु आस्था के साथ पहुंचते हैं, वहां सुरक्षा में लापरवाही, तकनीकी खामियां और जिम्मेदारी की कमी ने चोरों को मौका दे दिया।













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