ऋषिकेश से अष्टापद तक 328 किमी पदयात्रा कर गुरु मां पुर्णमति संसघ के संग पहुंचा श्वान ‘बिल्लू’, गुरु भक्ति देख श्रद्धालु भाव-विभोर हुए। इंदौर से पढ़िए, यह खबर…
इंदौर। ऋषिकेश से अष्टापद तक 328 किमी पदयात्रा कर गुरु मां पुर्णमति संसघ के संग पहुंचा श्वान ‘बिल्लू’, गुरु भक्ति देख श्रद्धालु भाव-विभोर हुए। राजेश जैन दद्दू ने बताया कि बद्रीनाथ गुरु चरणों में समर्पण की अद्भुत मिसाल पेश करते हुए एक श्वान ‘बिल्लू’ माता जी के संघ के साथ ऋषिकेश से अष्टापद बद्रीनाथ तक 328 किलोमीटर की कठिन पदयात्रा पूर्ण कर अष्टापद पहुंचा है। बद्रीनाथ ट्रस्ट के महामंत्री कीर्ति पांड्या एवं जिनेन्द्र कासलीवाल ने बताया कि विहार यात्रा के दौरान बिल्लू की गुरु भक्ति सभी के लिए प्रेरणा बनी। माता जी के आहार ग्रहण करने से पहले बिल्लू कुछ भी ग्रहण नहीं करता तथा रात्रि विश्राम के समय माता जी के कमरे के सामने ही सोता है। बिल्लू ने माता जी के साथ नीलकंठ पर्वत पर वंदना की तथा माना गांव भी गया। दूसरे दिन आर्यिका दीदी के साथ पुनः नीलकंठ पर्वत पर वंदना हेतु पहुंचा। दद्दू ने बताया कि एक प्रसंग में जब माता जी का संघ आगे निकल गया तो बिल्लू अकेला रहकर जोर-जोर से रोने लगा।
अन्य लोगों के बुलाने पर भी वह नहीं गया। जब दीदी माता जी की पिच्छी लेकर वापस आईं, तभी वह उनके साथ चल पड़ा। वर्तमान में बिल्लू अष्टापद क्षेत्र में माता जी के सान्निध्य में है और आगे विहार में भी संघ के साथ जाएगा। क्षेत्र में उपस्थित एवं आगंतुक श्रद्धालु इस घटना को अतिशय मान रहे हैं। जैन परंपरा में माना जाता है कि संस्कारी जीव तिर्यंच गति में भी गुरु भक्ति के भाव रहते हैं। बिल्लू की यह यात्रा उसी का जीवंत प्रमाण है।













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