अध्यात्म और वात्सल्य की पावन धरा पर आज उस समय भक्ति का सैलाब उमड़ पड़ा, जब पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के परम शिष्य, उपाध्याय श्री विनिश्चल सागर जी एवं मुनि श्री अनुपम सागर जी महाराज ससंघ का नगर की सीमा में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। भिंड से पढ़िए, सोनल जैन की रिपोर्ट…
भिंड। अध्यात्म और वात्सल्य की पावन धरा पर आज उस समय भक्ति का सैलाब उमड़ पड़ा, जब पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के परम शिष्य, उपाध्याय श्री विनिश्चल सागर जी एवं मुनि श्री अनुपम सागर जी महाराज ससंघ का नगर की सीमा में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। ढोल-नगाड़ों की थाप, बैंड-बाजों की मधुर स्वर लहरियों और ‘गुरुवर के जयकारों’ से पूरा आकाश गुंजायमान हो उठा। सकल जैन समाज भिंड द्वारा मुनि संघ की भव्य अगवानी लश्कर रोड पर अत्यंत उत्साह के साथ की गई। यहाँ से शुरू हुई मंगल विहार यात्रा परेड चौराहा, सदर बाज़ार और गोल मार्केट जैसे प्रमुख मार्गों से होते हुए गुजरी। श्रद्धा का आलम यह था कि जैसे ही गुरुवर के चरण नगर की गलियों में पड़े।श्रावक-श्राविकाओं ने पलक-पावड़े बिछा दिए। हर मोड़ पर श्रद्धालुओं ने गुरुदेव के पाद प्रक्षालन किए और आरती उतारकर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया।
पचासा जैन मंदिर में धर्म सभा
नगर भ्रमण के पश्चात मुनि संघ का काफिला पचासा जैन मंदिर पहुँचा, जहाँ भक्ति का वातावरण अपने चरम पर था। श्रद्धालुओं ने गुरु भक्ति के गीतों पर नृत्य कर अपनी प्रसन्नता व्यक्त की। समाज के वरिष्ठ जनों ने बताया कि मुनि श्री के आगमन से संपूर्ण नगर का वातावरण धर्ममय और ऊर्जामय हो गया है। इस अवसर पर सकल जैन समाज के हजारों धर्मावलंबी उपस्थित रहे, जिन्होंने गुरुवर के दर्शन कर अपने जीवन को धन्य बनाया। मुनि श्री के सानिध्य में आगामी दिनों में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान और मंगल प्रवचन आयोजित किए जाएंगे।













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