तप, त्याग एवं संयम की नगरी सनावद में आचार्य श्री विभव सागर महामुनिराज ससंघ का खंडवा की ओर से भव्य मंगल प्रवेश हुआ। प्रवक्ता सन्मति जैन काका ने बताया कि महाराष्ट्र के पुसेगांव एवं भुसावल में पंचकल्याणक संपन्न कर इंदौर की ओर विहार कर रहे आचार्य श्री विभव सागर जी (9 पिच्छी) का नगर आगमन हुआ। सनावद से पढ़िए, सन्मति जैन काका की यह खबर…
सनावद। तप, त्याग एवं संयम की नगरी सनावद में आचार्य श्री विभव सागर महामुनिराज ससंघ का खंडवा की ओर से भव्य मंगल प्रवेश हुआ। प्रवक्ता सन्मति जैन काका ने बताया कि महाराष्ट्र के पुसेगांव एवं भुसावल में पंचकल्याणक संपन्न कर इंदौर की ओर विहार कर रहे आचार्य श्री विभव सागर जी (9 पिच्छी) का नगर आगमन हुआ। समाजजनों ने ढकलगांव फाटा, खंडवा रोड पर पहुंचकर आचार्य संघ की आगवानी की।
आचार्य संघ ने नगर भ्रमण कर सभी जैन मंदिरों एवं गृह चैत्यालयों के दर्शन किए। इसके बाद श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर पहुंचे। जहां आचार्य श्री के सानिध्य में मूलनायक भगवान पार्श्वनाथ का अभिषेक और शांतिधारा हुई। प्रवचन हॉल में आचार्य श्री ने धर्म सभा में कहा कि जिस चीज का संयोग है, उसका नियम से वियोग है। चाहे पुण्य का संयोग हो या पाप का। मृत्यु के पूर्व आयु कर्म का बंध नियम से होता है। उन्होंने आगे कहा, कि यह सनावद नगरी धर्म तीर्थ के समान है। यहां से राष्ट्र गौरव आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज सहित 18 त्यागी निकले हैं। ऐसी नगरी में प्रतिवर्ष साधु संतों का चातुर्मास होना चाहिए, जिससे धर्म की वृद्धि हो। इस अवसर पर आहारदान का सौभाग्य मुकेश् कुमार जैन शुभम् पेप्सी एवं सावित्रीबाई, कैलाशचंद जटाले परिवार एवं संगस्त त्यागियों को प्राप्त हुआ। दोपहर में तत्वचर्चा व स्वाध्याय कक्षा तथा शाम को आचार्य भक्ति, सामायिक व आरती संपन्न हुई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।













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