धर्म और अध्यात्म की अविरल गंगा में गोते लगाते हुए कुचामन सिटी आज भक्ति के अनूठे रंग में रंगी नजर आई। आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य, एलक श्री क्षीर सागर जी महाराज का शहर के दिगंबर जैन नागोरी मंदिर में अत्यंत भव्य और मंगल प्रवेश हुआ। कुचामनसिटी से पढ़िए, सुभाष पहाड़िया की यह खबर…
कुचामन सिटी। धर्म और अध्यात्म की अविरल गंगा में गोते लगाते हुए कुचामन सिटी आज भक्ति के अनूठे रंग में रंगी नजर आई। आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य, एलक श्री क्षीर सागर जी महाराज का शहर के दिगंबर जैन नागोरी मंदिर में अत्यंत भव्य और मंगल प्रवेश हुआ। इस पुनीत अवसर पर गुरुदेव की एक झलक पाने और उनके चरण रज से खुद को कृतार्थ करने के लिए सैकड़ों की संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उमड़ पड़े। संपूर्ण वातावरण जैन धर्म की जय-जयकार और भक्तिमय भजनों से गुंजायमान हो उठा। महाराज श्री का मंगल प्रवेश गाजे-बाजे और असीम उल्लास के साथ संपन्न हुआ। श्रद्धालुओं ने जगह-जगह पाद प्रक्षालन कर उनकी भावपूर्ण अगवानी की। मंदिर प्रांगण में आयोजित धर्मसभा का शुभारंभ अत्यंत मधुर मंगलाचरण के साथ हुआ। यह मनमोहक मंगलाचरण प्रस्तुत करने का सौभाग्य सोभागमल गंगवाल को प्राप्त हुआ, जिन्होंने अपनी प्रस्तुति से सभी श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। धर्मसभा को संबोधित करते हुए एलक श्री क्षीर सागर जी महाराज ने अपनी अमृतमयी वाणी से उपस्थित जनसमूह का मार्गदर्शन किया। उन्होंने श्रावक-श्राविकाओं को जीवन में ‘स्वाध्याय’ के महत्व को समझाते हुए आत्म-कल्याण के मार्ग पर चलने पर विशेष जोर दिया।
महाराज श्री ने कहा कि बिना स्वाध्याय के आत्मा की उन्नति संभव नहीं है। इसके साथ ही, उन्होंने मंदिर के मूलनायक प्रथम तीर्थंकर भगवान श्री आदिनाथ के जीवन चरित्र पर अत्यंत सरल, सहज और मार्मिक भाषा में प्रवचन दिया। उन्होंने भगवान आदिनाथ के त्याग और तपस्या का वर्णन करते हुए सभी को उनके बताए मोक्ष मार्ग का अनुसरण करने की प्रेरणा दी। इस भव्य और मांगलिक आयोजन से कुचामन के संपूर्ण जैन समाज में भारी उत्साह और हर्षाेल्लास का माहौल है।













Add Comment