समाचार

धर्म मन को निर्भय,शांत और निर्मल बनाता है : मुनि श्री हितेंद्र सागर जी ने धर्म की सविस्तार व्याख्या की 


आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज श्री आदिनाथ जिनालय श्याम नगर जयपुर में संघ सहित विराजित है। आचार्य संघ सान्निध्य में तीन दिवसीय स्वयंभू मंडल विधान चल रहा है। मुनि श्री हितेंद्र सागरजी महाराज ने प्रवचन में बताया कि मनुष्य की सबसे बड़ी भूल यह है कि वह पूरी जिंदगी दुनिया में व्यस्त रहता है पर अपने आप को जानने का समय नहीं निकालता। जयपुर से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर…


जयपुर। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज श्री आदिनाथ जिनालय श्याम नगर जयपुर में संघ सहित विराजित है। आचार्य संघ सान्निध्य में तीन दिवसीय स्वयंभू मंडल विधान चल रहा है। मुनि श्री हितेंद्र सागरजी महाराज ने प्रवचन में बताया कि मनुष्य की सबसे बड़ी भूल यह है कि वह पूरी जिंदगी दुनिया में व्यस्त रहता है पर अपने आप को जानने का समय नहीं निकालता। सुरेश सबलावत के अनुसार मुनि श्री ने धर्म क्या है? इसकी विवेचना में बताया कि धर्म कोई बाहरी दिखावा या केवल नियम नहीं है। धर्म वह है जो मन को निर्भय, शांत और निर्मल बना दे।गलत कर्म से भय ओर दुःख होते हैं जबकि, सही जीवन से निर्भयता और सुख मिलता है। इसलिए निर्भयता ही धर्म का प्रमाण है भीतर का सत्य दुनिया मेंरूमेरा परिवार, मेरा धन” यह व्यवहार है लेकिन, सच्चाई अंत में केवल आत्मा ही मेरी है,जो यह समझ लेता है, वही धर्म की ओर बढ़ता है।

अहंकार छोड़ना ही साधना जब तक कि मैं बड़ा हूँ, मैं अलग हूँ तब तक धर्म नहीं जब मैं केवल एक आत्मा हूँ वहीं से सच्चा धर्म शुरू होता ह। ैनियम सहायक हैं, लक्ष्य नहीं। असली शुद्धता बाहर नहीं, भीतर के विचारों में है। संगति, सोच और व्यवहार ही जीवन बदलते हैं। दोपहर को स्वयंभू मंडल विधान में 24 तीर्थंकरों की पूजन कर अर्ध्य समर्पित किए जा रहे हैं।

आप को यह कंटेंट कैसा लगा अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।
+1
1
+1
0
+1
0
Shree Phal News

About the author

Shree Phal News

Add Comment

Click here to post a comment

You cannot copy content of this page