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मोक्ष कल्याणक के साथ पंच कल्याणक महोत्सव की पुर्णाहुति : तीर्थकर भगवान की प्रतिमा दिगंबर जैन मंदिर के नव निर्मित मान स्तंभ में विराजित


लार श्री दिगंबर जैन समाज समिति के तत्वावधान में चल रहे छह दिवसीय पंचकल्याणक महोत्सव गुरुवार को संपन्न हुआ। इस अवसर पर आदिनाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक भक्ति भाव श्रद्धापूर्वक मनाया गया। लार से पढ़िए, यह खबर…


लार (टीकमगढ़)। लार श्री दिगंबर जैन समाज समिति के तत्वावधान में चल रहे छह दिवसीय पंचकल्याणक महोत्सव गुरुवार को संपन्न हुआ। इस अवसर पर आदिनाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक भक्ति भाव श्रद्धापूर्वक मनाया गया। समापन के साथ तीर्थंकर भगवान की प्रतिमाओं को दिगंबर जैन मंदिर के नव निर्मित मान स्तंभ में विराजमान किया गया। आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के सानिध्य में आदिनाथ भगवान का अभिषेक,रिद्धि सिद्धि मंत्रों से विश्व शांति के लिए महाशांतिधारा, नित्य नियम पूजन, दस भक्ति पाठ, मोक्ष गमन, निर्वाण कल्याणक की पूजा हुई। साथ ही विश्व शांति महायज्ञ में आहुति दी गईं। आचार्य के सानिध्य में भगवान आदिनाथ को कैलाश पर्वत पर निर्वाण प्राप्ति, अग्नि कुमार देवों द्वारा अग्नि प्रज्ज्वलित कर नख और केश विसर्जन की क्रियाएं संपन्न की गईं। महोत्सव में सौधर्म इन्द्र मनीष जैन,चक्रेश जैन उज्जैन, यज्ञनायक संयम जैन आकाश जैन, ईशान इंद्र डॉ.अरविन्द्र जैन, सानत इंद्र खुशाल चन्द्र जैन, महेंद्र इंद्र नितिन जैन उपस्थित रहे।

श्रद्धालु रथयात्रा सहित मंदिर पहुंचे

संगीतकार रामकुमार दोराहा ने मोक्ष कल्याणक के अवसर पर सुंदर भजन प्रस्तुत किए। आचार्य के पाद प्रक्षालन का सौभाग्य हुकुम, ज्ञान चंद्र,जिनेश,आशीष चौधरी के परिवार को प्राप्त हुआ। इसके बाद भक्ति भाव से आदिनाथ भगवान और चौबीस तीर्थांकर भगवान की प्रतिमाओं को रथ, पालकी और सिर पर विराजमान करके श्रद्धालु रथयात्रा के साथ दिगंबर जैन मंदिर पहुंचे। आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य और पं.बा.ब्र. जयकुमार निशांत,बा.ब्र.संजय जैन गुणाधीश अहार, और पंडित मनीष जैन के निर्देशन में मंत्रोच्चार के मध्य जिनेंद्र भगवान की जिन प्रतिमाओं को चैत्य वृक्ष पर विराजमान किया गया।

प्रतिष्ठा एवं गजरथ महोत्सव हुआ

दोपहर में आयोजन स्थल अयोध्या नगरी से गजरथ शोभायात्रा निकाली गई। जिसमें प्रभु के तीन रथ, घोड़ा, बग्गी राजस्थान का दिव्य घोष एवं पारस म्यूजिकल ग्रुप का दिव्य घोष मुख्य आकर्षण का केंद्र रहे। मार्ग पर केसरिया धर्म ध्वजाएं विश्व शांति और बंधुत्व का संदेश दे रही थीं। विभिन्न युवा मंडल ‘जय अरिहंत’ और ‘जय जिनेंद्र’ के जयकारों से वातावरण को भक्तिमय बना रहे थे। भव्य रथ यात्रा निकली गई, जिसमें विशाल जन सैलाब उमड़ा इंद्र-इन्द्राणी के साथ श्रद्धालु नृत्य कर रहे थे। सात परिक्रमा के साथ पंच कल्याणक प्रतिष्ठा एवं गजरथ महोत्सव हुआ। रात्रि महा आरती के बाद नव दीक्षार्थियों की गोदभराई की गई एवं उदयपुर से आए जैन जादूगर द्वारा एक से बढ़कर एक जादू प्रस्तुत किए गए।

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