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श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल में भव्य अभिषेक एवं शांतिधारा सम्पन्न : भगवान महावीर जन्म कल्याणक पर दिया जैन एकता और सादगीपूर्ण धर्म पालन का संदेश


भगवान महावीर के पावन जन्म कल्याणक के अवसर पर जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल (हरियाणा) में अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ भव्य धार्मिक आयोजन संपन्न हुआ। इस अवसर पर भूगर्भ से अवतरित दिव्य प्रतिमाओं का विधिवत अभिषेक एवं शांतिधारा की गई, जिससे संपूर्ण वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा और पवित्रता से ओत-प्रोत हो गया। पढ़िए नितिन जैन की रिपोर्ट…


पलवल (हरियाणा)। भगवान महावीर के पावन जन्म कल्याणक के अवसर पर जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल (हरियाणा) में अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ भव्य धार्मिक आयोजन संपन्न हुआ। इस अवसर पर भूगर्भ से अवतरित दिव्य प्रतिमाओं का विधिवत अभिषेक एवं शांतिधारा की गई, जिससे संपूर्ण वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा और पवित्रता से ओत-प्रोत हो गया। प्रातःकाल से ही श्रद्धालुओं का आगमन प्रारंभ हो गया था। भक्तगणों ने स्नात्र पूजा एवं अभिषेक में बढ़-चढ़कर भाग लिया। मंत्रोच्चार, धूप-दीप और भक्ति संगीत के मध्य जल, केसर, चंदन एवं पुष्पों से प्रतिमाओं का अभिषेक किया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने अपने जीवन को धर्ममय एवं पवित्र बनाने का संकल्प लिया।

सिद्धांतों पर डाला प्रकाश

कार्यक्रम के अंतर्गत शांतिधारा का आयोजन किया गया, जिसमें समस्त विश्व में शांति, सद्भाव, समृद्धि एवं अहिंसा के प्रसार की कामना की गई। “जियो और जीने दो” तथा “अहिंसा परमो धर्मः” के उद्घोष से पूरा तीर्थ क्षेत्र गुंजायमान रहा। इस अवसर पर भगवान महावीर के जीवन एवं उनके सिद्धांतों पर भी प्रकाश डाला गया। उनके त्याग, तप, संयम और सत्य के मार्ग को अपनाने का संदेश देते हुए कहा गया कि सच्चा धर्म बाहरी आडंबर में नहीं, बल्कि आंतरिक शुद्धता, करुणा और सरलता में निहित है।

बताई एकजुटता की आवश्यकता

जैन समाज की एकता पर विशेष बल देते हुए कहा गया कि वर्तमान समय में सभी मतभेदों और विभाजनों से ऊपर उठकर एकजुट होना आवश्यक है। भगवान महावीर के अनेकांत और सहिष्णुता के सिद्धांतों को अपनाकर ही समाज सशक्त और संगठित बन सकता है। साथ ही साधु-साध्वियों एवं श्रावक-श्राविकाओं से विनम्र आग्रह किया गया कि वे भगवान महावीर के मूल सिद्धांतों का पालन करें और धर्म को आडंबर एवं दिखावे से दूर रखते हुए सादगी, संयम और सत्यनिष्ठा के मार्ग पर चलें। धर्म की प्रभावशीलता आचरण से आती है, न कि बाहरी भव्यता से। यह आयोजन समस्त समाज के लिए प्रेरणादायक एवं कल्याणकारी सिद्ध हुआ, जिसने सभी को आत्मचिंतन और सच्चे धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।

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